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अभिजीत दिपके को मिली कंडीशनल बेल, इस 'हिदायत' के साथ हुई रिहाई

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को शांति बनाए रखने के बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद जमानत मिल गई और उन्हें रिहा कर दिया गया. AISA नेता नेहा बोरा को भी 17 अक्टूबर की सुबह रिहा किया गया. दोनों ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया.

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अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत मिली. (फोटो- India Today)

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  • कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को 50 हजार के श्योरिटी पीस बॉन्ड पर साइन कराने के बाद शांति भंग का आरोप मिलने के बाद सशर्त जमानत पर रिहा किया गया।
  • कॉकरोच जनता पार्टी की 16 मार्च की 'लहरा दो तिरंगा' रैली के आह्वान के कारण दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को नोटिस देकर इसमें शामिल न होने को कहा था, लेकिन वे रैली में जाने लगे तो उन्हें गिरफ्तार किया गया।
  • रिहाई के बाद नेहा बोरा ने गिरफ्तारी को अवैध बताया और देश में लंबे समय से गैरकानूनी गिरफ्तारियों का आरोप लगाते हुए कानून व्यवस्था में कमजोरी की ओर संकेत किया।

‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले गिरफ्तार किए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को जमानत मिल गई. 50 हजार के ‘श्योरिटी पीस बॉन्ड’ पर साइन करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. दिपके को आगे शांति भंग न करने की ‘हिदायत’ भी दी गई है. इससे पहले ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) की नेता नेहा बोरा को शनिवार, 17 अक्टूबर की सुबह 5 बजे रिहा किया गया. बोरा को भी 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च से पहले ही गिरफ्तार किया गया था. रिहाई के बाद नेहा ने उनकी और दिपके की गिरफ्तारी को अवैध बताया. उन्होंने कहा कि इसने ये सच देश के सामने ला दिया कि लंबे समय से देश में गैर-कानूनी गिरफ्तारियां हो रही हैं.

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कॉकरोच जनता पार्टी ने 16 मार्च को दिल्ली के कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में लहरा दो तिरंगा रैली का आह्वान किया था. दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को नोटिस देकर इस रैली में न जाने के लिए कहा था. फिर भी दिपके इसमें शामिल होने के लिए घर से निकले तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. उन पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग करने का आरोप लगा. गिरफ्तारी के बाद दिपके को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) के कोर्ट में पेश किया गया. यहां उन्हें सशर्त जमानत मिल गई. उनसे एक पीस बॉन्ड पर साइन कराया गया, जिसके बाद रिहा कर दिया गया. 

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नेहा बोरा की रिहाई

दिल्ली पुलिस ऐक्ट की धारा-65 के तहत हिरासत में ली गईं नेहा बोरा को भी शनिवार, 17 अक्टूबर को तड़के रिहा कर दिया गया. रिहाई के बाद नेहा ने दिल्ली पुलिस और केंद्र की भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए गिरफ्तारी को ‘अवैध’ बताया. उन्होंने कहा,

मुझे मंडी हाउस में हिरासत में लिया गया और पूरी रात सुबह 5 बजे तक पुलिस स्टेशन में रखा गया. आप (पुलिस) ये गैरकानूनी गिरफ्तारियां क्यों कर रहे हैं? ये सब इस देश में लंबे समय से होता आ रहा है और इस आंदोलन ने साफतौर पर दिखा दिया कि ऐसी गिरफ्तारियां हो रही हैं. 

नेहा ने कहा कि पुलिस दावा करती है कि वो कानून-व्यवस्था का पालन करती है और नियमों के अनुसार चलती है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है.

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