फ़ैटी लिवर. यानी लिवर पर फ़ैट जमा हो जाना. इसके मामले पूरी दुनिया में तेज़ी से बढ़ने वाले हैं. दी लैंसेट जर्नल में छपे एक अनुमान के मुताबिक, 2050 तक फ़ैटी लिवर के मरीज़ों की संख्या 180 करोड़ तक पहुंच सकती है. और सिर्फ शराब पीने या ज़्यादा फ़ैटी चीज़ें खाने वालों को ही फ़ैटी लिवर नहीं होगा. इसके मामले उनमें भी बढ़ेंगे, जो मोटापे से जूझ रहे हैं. जिन्हें डायबिटीज़ है या जो बहुत कम फिज़िकल एक्टिविटी करते हैं.
फैटी लिवर की चपेट में होंगे 180 करोड़ लोग, कैसे पता चलेगा आप उनमें नहीं?
फ़ैटी लिवर अब एक लाइफस्टाइल डिज़ीज़ बन चुका है. इसे बिल्कुल इग्नोर नहीं किया जा सकता. अगर फ़ैटी लिवर का टाइम पर इलाज नहीं कराया, तो लिवर की क्षमता घटती रहेगी. धीरे-धीरे लिवर फ़ेल होने लगेगा.


फ़ैटी लिवर अब एक लाइफस्टाइल डिज़ीज़ बन चुका है. इसे बिल्कुल इग्नोर नहीं किया जा सकता. अगर फ़ैटी लिवर का टाइम पर इलाज नहीं कराया, तो लिवर की क्षमता घटती रहेगी. धीरे-धीरे लिवर फ़ेल होने लगेगा. पर ये पता कैसे चलेगा कि आपको फ़ैटी लिवर है या नहीं? इसी सवाल का जवाब पता करेंगे आज. डॉक्टर से जानेंगे कि क्या फ़ैटी लिवर के शुरुआती लक्षण दिखते हैं. फ़ैटी लिवर पता करने के लिए कौन-सा टेस्ट कराना चाहिए. फ़ैटी लिवर के कितने ग्रेड होते हैं. किस ग्रेड का क्या मतलब है. ये भी समझेंगे कि फ़ैटी लिवर होने पर किन बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है, और फ़ैटी लिवर का इलाज क्या है.
क्या फ़ैटी लिवर के शुरुआती लक्षण दिखते हैं?ये हमें बताया डॉक्टर सुरेश राघवैया ने.

जब तक लिवर में 60-70% तक नुकसान न हो, तब तक मरीज़ को कोई लक्षण नहीं दिखते. फ़ैटी लिवर के शुरुआती स्टेज में भी आमतौर पर कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते. जब तक आप खुद से जांच नहीं करवाते, तब तक इसका पता चलना मुश्किल होता है. जब आप किसी और कारण से, जैसे पेट दर्द या इंफेक्शन होने पर स्कैन करवाते हैं. तब फ़ैटी लिवर की शुरुआती स्टेज का पता चलता है. वर्ना इसके लक्षण तभी दिखते हैं, जब बीमारी बढ़कर एडवांस स्टेज में पहुंच जाती है.
फ़ैटी लिवर पता करने के लिए कौन-सा टेस्ट कराएं?फ़ैटी लिवर पता करने के लिए सबसे पहला और आसान टेस्ट अल्ट्रासाउंड है. ये सस्ता और आसानी से उपलब्ध होता है. इससे पता चल जाता है कि फ़ैटी लिवर है या नहीं. इसके अलावा, ये जानना ज़रूरी है कि आपको फ़ैटी लिवर के रिस्क फैक्टर्स हैं या नहीं. अगर डायबिटीज़ का शक है, तो उसका टेस्ट करवाना चाहिए. अगर कोलेस्ट्रॉल ज़्यादा है, तो लिपिड प्रोफाइल करवाना होगा. यूरिक एसिड की जांच भी करनी पड़ सकती है.
साथ ही, BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स चेक करना ज़रूरी है. जिन लोगों का वज़न ज़्यादा है, उनमें फ़ैटी लिवर का रिस्क ज़्यादा होता है. अगर अल्ट्रासाउंड में फ़ैटी लिवर दिखता है, तो अगला ज़रूरी टेस्ट फाइब्रोस्कैन होता है. क्योंकि, अल्ट्रासाउंड से सिर्फ ये पता चलता है कि फ़ैटी लिवर है. लेकिन उस फ़ैट से लिवर को कितना नुकसान हो रहा है, ये पता नहीं चलता. इसलिए फाइब्रोस्कैन करवाना ज़रूरी है. इससे पता चलता है कि लिवर में कितना फ़ैट है और उससे कितना नुकसान हो रहा है.
इसके अलावा, कुछ एडवांस टेस्ट भी होते हैं. जैसे CT स्कैन, MRI, और MRI Fat Fraction, इनसे ज़्यादा डिटेल मिलती है. इन सभी जांचों के आधार पर डॉक्टर को सही इलाज तय करने में आसानी होती है.

फ़ैटी लिवर के आमतौर पर 3 ग्रेड होते हैं. सामान्य (हेल्दी) लिवर में 5% से कम फ़ैट होना चाहिए. अगर लिवर में 5% से 33% तक फ़ैट जमा हो जाए, तो इसे ग्रेड 1 फ़ैटी लिवर कहते हैं. 33% से 66% तक फ़ैट होने पर इसे ग्रेड 2 फ़ैटी लिवर कहा जाता है. 66% से ज़्यादा फ़ैट होने पर इसे ग्रेड 3 फ़ैटी लिवर माना जाता है. सिर्फ फ़ैटी लिवर होने से शुरुआत में लिवर को ज़्यादा नुकसान नहीं होता, जब तक ये एडवांस स्टेज में न पहुंचे.
लेकिन अगर फ़ैटी लिवर के साथ कोई और रिस्क फैक्टर हो. जैसे डायबिटीज़, हाई कोलेस्ट्रॉल, ज़्यादा यूरिक एसिड, मोटापा और शराब पीने की आदत, तब ख़तरा बढ़ जाता है. ऐसी स्थिति में लिवर में सूजन होने लगती है, जिसे स्टिएटोहेपेटाइटिस कहा जाता है. जब स्टिएटोहेपेटाइटिस होता है, तभी लिवर को नुकसान पहुंचने का पता चलता है. क्योंकि, तब ब्लड टेस्ट में लिवर एंजाइम बढ़े हुए दिख सकते हैं. फ़ैटी लिवर में सबसे ज़्यादा नुकसान तभी पहुंचता है, जब ये एडवांस स्टेज में होता है.
फ़ैटी लिवर का इलाजफ़ैटी लिवर कई बार दूसरी बीमारियों का संकेत भी देता है. अगर अल्ट्रासाउंड से फ़ैटी लिवर का पता चलता है. तब कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज़ की जांच भी ज़रूर करवाएं. हो सकता है, ब्लड शुगर लेवल और कोलेस्ट्रॉल ज़्यादा निकले. दिल और दिमाग से जुड़े टेस्ट भी कराएं क्योंकि फ़ैटी लिवर होने पर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है
फ़ैटी लिवर का इलाज भी बहुत आसान है. फ़ैटी लिवर तब होता है जब हम ज़्यादा कैलोरीज़ लेते हैं, लेकिन खर्च कम करते हैं. इसलिए हमें कम खाना पड़ेगा और फिज़िकली ज़्यादा एक्टिव रहना होगा. खाने में शक्कर कम करें, क्योंकि इसमें कैलोरी ज़्यादा होती है. सफेद चावल कम करें, क्योंकि इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज़्यादा होता है. मैदा की जगह गेहूं, सब्ज़ियां और फाइबर ज़्यादा लें.

जितना हो सके, कार्बोहाइड्रेट्स कम खाएं. सब्ज़ियां और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स ज़्यादा रखें. अगर आप शराब पीते हैं, तो इसे पूरी तरह बंद करें. डायबिटीज़ और हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखें. साथ ही, रोज़ कम से कम 20 मिनट या हफ्ते में करीब 150 मिनट एक्सरसाइज़ करें. इससे फ़ैटी लिवर को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है.
जब फ़ैटी लिवर बहुत गंभीर हो जाता है, तब कुछ लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे भूख न लगना, उबकाई आना, पेट के दाएं हिस्से में थोड़ा-थोड़ा दर्द होना. लेकिन तब तक कई बार स्थिति गंभीर हो चुकी होती है. इसलिए रेगुलर टेस्टिंग ज़रूरी है, ताकि फ़ैटी लिवर को समय पर पकड़ा जा सके.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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