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DRDO का TARA ग्लाइड वेपन दिखाएगा दुश्मन को दिन में तारे, होश उड़ाने वाली ताकत से लैस

TARA असल में एक मॉड्यूलर ग्लाइड वेपन किट है. आसान भाषा में कहें तो, इसे मौजूदा अनगाइडेड, हवाई जहाज से गिराए जाने वाले वॉरहेड्स से जोड़ने और उन्हें सटीक मार करने वाले ग्लाइड वेपन्स में बदलने के लिए डिजाइन किया गया है.

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DRDO ने TARA का सफल टेस्ट किया है (PHOTO-DRDO)

साल 2025. मई के महीने में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव अपने उफान पर था. भारत ने इस दौरान पाकिस्तान पर अलग-अलग तरह के हथियारों से हमला किया था. इनमें ब्रह्मोस, स्कैल्प और हैमर जैसे ताकतवर हथियार शामिल थे. लेकिन इन सभी में एक चीज कॉमन है. ये सारे हथियार 'गाइडेड' हैं. यानी इनमें लॉन्च से पहले ही निशाना क्या है, इसकी जानकारी फीड कर दी जाती है. इसके बाद ही ये सटीक हमला कर पाते हैं. इसी 'गाइडेड' वेपन सिस्टम की दिशा में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (DRDO) ने एक नई उपलब्धि हासिल की है. DRDO और Indian Air Force ने 'TARA' यानी Tactical Advanced Range Augmentation का सफल परीक्षण किया है. ये एक ऐसा हथियार है जो किसी साधारण बम को भी गाइडेड बम में बदल सकता है.

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7 मई को DRDO और इंडियन एयरफोर्स ने ओडिशा के तट के पास TARA का सफल परीक्षण किया है. रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, ये भारत का पहला ग्लाइड वेपन सिस्टम है जो किसी भी बम को गाइडेड हथियार में बदल देगा. TARA को हैदराबाद के रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) और DRDO की दूसरी लैब्स ने मिलकर डिजाइन और डेवलप किया है. इसका मकसद जमीन पर मौजूद टारगेट को खत्म करने के लिए, एक कम लागत वाले साधारण से हथियार की मारक क्षमता और सटीकता को बढ़ाना है. लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और बहुत कम लागत वाले सिस्टम की मदद से  तैयार किया गया  पहला ऐसा ग्लाइड वेपन है. इस किट को डेवलप करने का काम 'डेवलपमेंट कम प्रोडक्शन पार्टनर्स' (DcPP) और भारत की दूसरी इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर किया गया है. 

कैसे काम करता है ‘ग्लाइड वेपन’?

TARA असल में एक मॉड्यूलर ग्लाइड वेपन किट है. आसान भाषा में कहें, तो इसे मौजूदा अनगाइडेड, हवाई जहाज से गिराए जाने वाले वॉरहेड्स से जोड़ने और उन्हें सटीक मार करने वाले ग्लाइड वेपन्स में बदलने के लिए डिजाइन किया गया है. आम तौर पर जो अनगाइडेड हथियार होते हैं, उन्हें अंदाजे से टारगेट के ऊपर गिराया जाता है. इसके लिए पायलट को अपना जहाज टारगेट के करीब ले जाना पड़ता है. वहीं गाइडेड हथियारों को दूर से ही लॉन्च किया जा सकता है. इसलिए इसमें जान-माल का खतरा कम हो जाता है. 

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TARA के बारे में जानकारी लेते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (PHOTO-X)
कैसे काम करेगा ग्लाइड वेपन?

लेकिन असली सवाल है कि उन हथियारों से गाइडेड बम जैसा हमला कैसे किया जाएगा जो अनगाइडेड हैं? इसी समस्या का समाधान है ग्लाइड वेपन. जैसा कि नाम से जाहिर है, ये हथियार बम को हवा में तैरने यानी ग्लाइड करने में मदद करता है. बिल्कुल किसी चील की तरह जो पंख फैला कर हवा में तैरता है. इससे न सिर्फ हथियार की रेंज में बढ़ोतरी होती है, बल्कि सटीकता भी सुनिश्चित होती है. फाइटर से छोड़े जाने के बाद, यह सिस्टम एयरोडायनामिक लिफ्ट और गाइडेंस मैकेनिज्म का इस्तेमाल करके, एक आम फ्री-फॉल बम के मुकाबले कहीं ज्यादा दूरी तय करता है. साथ ही, हमले की सटीकता को भी बेहतर बनाता है.

इंडियन एयरफोर्स के लिए, TARA जैसे सिस्टम भविष्य में कुछ ऐसे स्ट्राइक मिशनों के लिए एक सस्ता विकल्प साबित हो सकते हैं, जिनके लिए महंगी क्रूज़ मिसाइलों या उन्नत स्टैंड-ऑफ हथियारों की जरूरत नहीं होती. स्टैंड-ऑफ वो हथियार होते हैं जिन्हें काफी दूर से, दुश्मन की नजर से दूर रह कर दागा जाता है. इन्हें बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) हथियार भी कहा जाता है. माने जहां तक हमारी नजर जाती है, ये हथियार उससे आगे तक हमला करेगा. TARA से फायदा ये होगा कि ये फाइटर जेट से दागे जाने वाले किसी भी बम को BVR वेपन में बदल देगा. पूरी तरह से नए मिसाइल के विपरीत, ग्लाइड किट मौजूदा बमों का इस्तेमाल कर के हमला कर सकती है. इससे खरीद की लागत तो कम होती ही है, साथ ही हर हथियार का उसकी पूरी क्षमता तक इस्तेमाल किया जा सकता है.

वीडियो: रखवाले: DRDO ने तैयार किया देसी प्रीडेटर TAPAS-BH ड्रोन, निगरानी भी करेगा और हमला भी

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