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क्या है वॉकिंग निमोनिया, जिसमें बीमारी के लक्षण ही नहीं दिखते!

वॉकिंग निमोनिया, निमोनिया का ही एक रूप है. निमोनिया हमारे फेफड़ों से जुड़ा इंफेक्शन है.

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वॉकिंग निमोनिया, सामान्य निमोनिया से अलग होता है (फोटो: Getty Images)

निमोनिया. आपने इस बीमारी का नाम कभी न कभी ज़रूर सुना होगा. ये हमारे फेफड़ों से जुड़ा एक इंफेक्शन है. अक्सर लोगों को लगता है कि निमोनिया सिर्फ बच्चों को होता है, जबकि ऐसा नहीं है. ये किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है. और, निमोनिया सिर्फ एक तरह का नहीं होता. इसका एक रूप वॉकिंग निमोनिया भी है.

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आमतौर पर, जब किसी को निमोनिया होता है तो उसे फुल बेड रेस्ट की ज़रूरत पड़ती है. मगर वॉकिंग निमोनिया में निमोनिया होने के बावजूद व्यक्ति चलता-फिरता रहता है. माने उसे इंफेक्शन तो होता है लेकिन लक्षण बहुत उभरकर नहीं आते.

ऐसे में कई बार लोग समझ ही नहीं पाते कि उन्हें वॉकिंग निमोनिया हुआ है या नहीं. लिहाज़ा, डॉक्टर से समझिए कि वॉकिंग निमोनिया क्या है. ये क्यों होता है. इसके लक्षण क्या हैं. वॉकिंग निमोनिया, सर्दी-खांसी से कैसे अलग है. और, अगर किसी को वॉकिंग निमोनिया हो जाए. तो इससे बचाव और इलाज कैसे किया जाए. 

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वॉकिंग निमोनिया क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर मानव मनचंदा ने. 

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डॉ. मानव मनचंदा, डायरेक्टर एंड हेड, रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर, एशियन हॉस्पिटल, फरीदाबाद

निमोनिया एक गंभीर बीमारी है, जो फेफड़ों पर असर डालती है. फेफड़ों में होने वाले इंफेक्शन को निमोनिया कहा जाता है. निमोनिया होने पर मरीज़ को पूरे आराम की ज़रूरत होती है, कई बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है. वॉकिंग निमोनिया को एटिपिकल निमोनिया भी कहा जाता है. ये सामान्य निमोनिया से अलग होता है क्योंकि इसके लक्षण हल्के होते हैं. मरीज़ बीमार होते हुए भी चलता-फिरता रहता है. लेकिन, अंदर ही अंदर उसके फेफड़ों में इंफेक्शन मौजूद रहता है. साल 1930 में इस स्थिति को 'वॉकिंग निमोनिया' नाम दिया गया था. मेडिकल भाषा में, इसे एटिपिकल निमोनिया के नाम से ज़्यादा जाना जाता है.

वॉकिंग निमोनिया के कारण

वॉकिंग निमोनिया कुछ अलग तरह के बैक्टीरिया, वायरस या फंगस की वजह से होता है. ये बैक्टीरिया, सामान्य निमोनिया करने वाले बैक्टीरिया से अलग होते हैं. जैसे क्लैमाइडिया, माइकोप्लाज़्मा और क्लेबसिएला; ये बैक्टीरिया आमतौर पर सामान्य निमोनिया नहीं करते. लेकिन, कुछ मरीज़ों में निमोनिया का कारण बन सकते हैं. इसके अलावा, कुछ वायरस भी वॉकिंग निमोनिया का कारण बन सकते हैं. जैसे रेस्पिरेटरी वायरस, इंफ्लुएंज़ा वायरस और कुछ फंगस.

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वॉकिंग निमोनिया के लक्षण

वॉकिंग निमोनिया के लक्षण सामान्य निमोनिया से अलग होते हैं. सामान्य निमोनिया में मरीज़ को तेज़ बुखार आता है. वहीं वॉकिंग निमोनिया में बुखार हल्का (100-101 डिग्री) होता है. इसमें सिरदर्द, बदन दर्द, कमज़ोरी और सुस्ती जैसे लक्षण देखे जाते हैं. वॉकिंग निमोनिया में बलगम कम बनता है, जबकि सामान्य निमोनिया में ज़्यादा बलगम बनता है. ये कुछ खास लक्षण हैं, जो वॉकिंग निमोनिया को सामान्य निमोनिया से अलग बनाते हैं.

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वॉकिंग निमोनिया के लक्षण सर्दी-जुकाम से मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन ये लंबे समय तक रहता है (फोटो: Getty Images)

वॉकिंग निमोनिया, सर्दी-खांसी से कैसे अलग है?

सर्दी-जुकाम में बुखार हल्का (99-100 डिग्री) होता है और मरीज़ एक-दो दिन में ठीक हो जाता है. वॉकिंग निमोनिया के लक्षण सर्दी-जुकाम से मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन ये लंबे समय तक रहता है. जैसे बुखार हफ्ते-दो हफ्ते तक बना रह सकता है. सिरदर्द बहुत ज़्यादा होता है. बाकी लक्षण भी हफ्ते-दो हफ्ते तक रहते हैं. अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो मरीज़ की जांच की जाती है. एक्स-रे या सीटी स्कैन के ज़रिए वॉकिंग निमोनिया का पता लगा सकते हैं.

वॉकिंग निमोनिया से बचाव और इलाज

वॉकिंग निमोनिया के इलाज में एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं. मगर, सामान्य निमोनिया में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक्स इसमें काम नहीं करतीं. वॉकिंग निमोनिया में अलग एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं. जैसे मैक्रोलाइड्स, डॉक्सीसाइक्लिन और क्विनोलोन्स ग्रुप की एंटीबायोटिक्स. इन ग्रुप्स की एंटीबायोटिक्स वॉकिंग निमोनिया के इलाज में ज़्यादा कारगर होती हैं. दवाइयां एक से दो हफ्ते तक चलती हैं. कुछ मरीज़ बिना दवा के भी ठीक हो सकते हैं. लेकिन, ज़्यादातर मामलों में एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत पड़ती है. 

इससे बचने का तरीका सामान्य निमोनिया जैसा ही है. सामाजिक दूरी बनाए रखें. मास्क लगाएं. सिगरेट न पिएं. ज़रूरी वैक्सीन लगवाएं. जिन्हें पहले से बीमारियां हैं, वो प्रदूषण से बचें. धूल-मिट्टी से जुड़े काम न करें. बचाव के ये तरीके वॉकिंग निमोनिया के लिए भी उतने ही ज़रूरी हैं, जितने सामान्य निमोनिया के लिए.

आम निमोनिया की तरह ही वॉकिंग निमोनिया का इंफेक्शन भी संक्रमित व्यक्ति से दूसरे लोगों में फैल सकता है. लिहाज़ा, अगर किसी को वॉकिंग निमोनिया है या इसके लक्षण हैं, तो वो तुरंत मास्क लगाए. लोगों से दूरी बनाए  और बिना देर किए डॉक्टर से मिले.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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