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सिर्फ एक गोली से बढ़ेगी कैंसर मरीज़ों की उम्र? इस दवा के ट्रायल नतीजों ने चौंकाया

दवा का नाम है डाराक्सोनरासिब. इसे दिन में एक बार खाना होता है. ट्रायल में इस दवा को खाने से कैंसर मरीज़ों का सर्वाइवल रेट लगभग दोगुना हो गया.

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डाराक्सोनरासिब को कैंसर के इलाज में 'गेम चेंजर' कहा जा रहा है

क्या सिर्फ एक गोली से कैंसर का इलाज हो सकता है? अब तक तो नहीं. लेकिन शायद आगे ऐसा हो. क्योंकि ट्रायल्स में नतीजे शानदार हैं. वैज्ञानिकों ने एक दवा बनाई है. नाम है डाराक्सोनरासिब. पैनक्रियाटिक कैंसर के इलाज में काम आती है. ट्रायल्स में देखा गया है कि इस दवा को खाने के बाद कैंसर के मरीज़ों का सर्वाइवल रेट लगभग दोगुना हो गया है. एक्सपर्ट्स इसे ‘गेम चेंजर’ कह रहे हैं.

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डाराक्सोनरासिब दवा के ट्रायल से जुड़े नतीजे 31 मई, 2026 को The New England Journal of Medicine में छपे हैं. इसे शिकागो में हुई American Society Of Clinical Oncology की एनुअल मीटिंग में भी पेश किया गया. डाराक्सोनरासिब दवा का फेज़-थ्री क्लीनिकल ट्रायल हो चुका है. इसमें 500 मरीज़ शामिल थे. इनमें से 248 मरीजों को डाराक्सोनरासिब गोली, तो वहीं 252 मरीज़ों को कीमोथेरेपी दी गई. ज़्यादातर मरीज़ों के ट्यूमर में KRAS जीन की खास तरह की म्यूटेशन थी.

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पैनक्रियाटिक कैंसर के इलाज में काम आती है डाराक्सोनरासिब (AI Image)

डाराक्सोनरासिब के ट्रायल के नतीजे 

डाराक्सोनरासिब गोली को दिन में सिर्फ एक बार लेना होता है. लेकिन इसने मरीज़ों की ज़िंदगी को काफी लंबा किया. ट्रायल में देखा गया कि सिर्फ कीमोथेरेपी लेने वाले मरीज़ों का औसत सर्वाइवल टाइम यानी ज़िंदा रहने की अवधि साढ़े 6 महीने के करीब थी. पर जिन्हें डाराक्सोनरासिब दी गई थी वो औसतन 13 महीने से ज़्यादा वक्त तक ज़िंदा रहे. यानी मरीज़ों का सर्वाइवल रेट लगभग डबल हो गया. 

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कीमोथेरेपी की तुलना में डाराक्सोनरासिब के साइड इफेक्ट्स भी कम थे. कीमोथेरेपी लेने वाले 57.5% मरीज़ों में गंभीर साइड इफेक्ट्स थे, जबकि डाराक्सोनरासिब लेने वाले सिर्फ 43.5% मरीज़ों को गंभीर साइड इफेक्ट्स हुए. इस दवा के सबसे आम साइड इफेक्ट्स हैं- स्किन पर चकत्ते, उबकाई आना, दस्त लगना और मुंह में छाले होना.

डाराक्सोनरासिब ने मरीज़ों में मौत का कुल रिस्क 60% तक कम कर दिया. यही नहीं, इसने लगभग एक-तिहाई मरीज़ों में ट्यूमर को बढ़ने से रोकने या उसे छोटा करने में भी मदद की. डाराक्सोनरासिब लेने वाले करीब 32% मरीज़ों में ट्यूमर सिकुड़ गया या पूरी तरह गायब हो गया. जबकि कीमोथेरेपी लेने वाले मरीज़ों में ऐसा असर सिर्फ 10% मामलों में ही दिखा.

डाराक्सोनरासिब कैसे काम करती है?

डाराक्सोनरासिब, RAS इनहिबिटर्स नाम की दवाओं में शामिल है. जो म्यूटेटेड KRAS जीन को निशाना बनाती है और उसे काम करने से रोक देती हैं. ये वही जीन है, जो 90% से ज़्यादा पैनक्रियाटिक ट्यूमर्स में पाया जाता है. इसके अलावा, ये कोलोरेक्टल कैंसर के 40-45% मामलों और नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर के करीब 30% मामलों में भी पाया जाता है. म्यूटेटेड KRAS जीन, कैंसर सेल्स को बढ़ने व फैलने का संकेत देता है. लेकिन डाराक्सोनरासिब इस संकेत को रोक देती है. जिससे कैंसर का बढ़ना कम हो सकता है या रुक सकता है.

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पैनक्रियाटिक कैंसर को बहुत घातक माना जाता है 

डाराक्सोनरासिब की दो सबसे अच्छी बातें 

डाराक्सोनरासिब के साथ पहली अच्छी बात है कि ये पिल फॉर्म में आती है. यानी पैकेट खोला, दवा निकाली, और दिन में एक बार खा ली. 

इसकी दूसरी अच्छी बात है कि ये सबसे खतरनाक कैंसर्स में से एक, पैनक्रियाटिक कैंसर के इलाज में काम आएगी. अक्सर पैनक्रियाटिक कैंसर का पता बहुत देर से चलता है. तब तक कैंसर बहुत ज़्यादा फैल चुका होता है. इसलिए इसका इलाज भी मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से, पैनक्रियाटिक कैंसर के आधे से ज़्यादा मरीज़ों की मौत, बीमारी का पता चलने के 3 महीने के भीतर हो जाती है. दुनियाभर में इससे लाखों मौतें होती हैं. 

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO के ग्लोबोकैन डेटाबेस के मुताबिक, साल 2022 में दुनियाभर में पैनक्रियाटिक कैंसर के 5 लाख से ज़्यादा नए मामले आए थे. वहीं, साढ़े 4 लाख से ज़्यादा मौतें हुई थीं. इसलिए जब इसके इलाज की खबर आएगी, उम्मीद तो जगेगी ही.

दवा से कितनी उम्मीदें रखें?

मगर इस ट्रायल के नतीजे कितने भरोसेमंद हैं? और डाराक्सोनरासिब दवा को कैंसर ट्रीटमेंट का हिस्सा बनने में अभी कितना वक्त लग सकता है? ये हमने पूछा, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली में मेडिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर अंकित जैन से.

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डॉ. अंकित जैन, सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली

डॉक्टर अंकित कहते हैं कि ट्रायल के नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले हैं. क्योंकि मेटास्टेटिक पैनक्रियाटिक कैंसर बहुत आक्रामक होता है. मेटास्टेटिक यानी जब कैंसर अपनी शुरुआत वाली जगह से निकलकर शरीर के दूसरे अंगों तक फैल जाए. ऐसे मरीज़ों का इलाज करना काफी मुश्किल होता है. लेकिन डाराक्सोनरासिब दवा के ट्रायल में देखा गया है कि इसे लेने से मरीज़ ज़्यादा वक्त तक ज़िंदा रहे. बीमारी पर उनका कंट्रोल भी बेहतर था. ये दवा पैनक्रियाटिक कैंसर के मरीज़ों के इलाज में काफी असरदार साबित हो सकती है. हालांकि अभी इस पर अभी और रिसर्च की ज़रूरत है. साथ ही, इसके इस्तेमाल की मंज़ूरी मिलना भी बाकी है.

डाराक्सोनरासिब को KRAS म्यूटेशन को निशाना बनाने के लिए डेवलप किया गया है. जो पैनक्रियाटिक कैंसर के ज़्यादातर मामलों में पाया जाता है. इसलिए इसका फायदा खास उन मरीज़ों को मिलेगा, जिनके ट्यूमर में ये म्यूटेशन मौजूद है. एक और चीज़. डाराक्सोनरासिब दवा, पैनक्रियाटिक कैंसर के इलाज का एक हिस्सा होगी. इसे पूरा इलाज नहीं माना जा सकता. डाराक्सोनरासिब दवा को आने में अभी टाइम लगेगा. पहले इसके ट्रायल्स पूरे होंगे. इसके बाद इसे सरकार से मंज़ूरी मिलेगी. तब ही ये दवा इलाज में इस्तेमाल की जा सकेगी. और क्योंकि ये एक नई टारगेटेड थेरेपी है. इसलिए शुरुआती दौर में इसकी कीमत ज़्यादा हो सकती है.

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