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'ब्रेन डेड' पति के स्पर्म से गर्भवती होगी पत्नी, क्या है प्रोसेस, कितना सेफ है?

महिला ने कहा कि वो भविष्य में ART यानी एसिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नॉलजी के ज़रिए मां बनना चाहती है. यानी मेडिकल मदद से प्रेग्नेंट होना चाहती है. लेकिन पति की हालत ऐसी है, कि वो ART एक्ट के सेक्शन 22 के तहत, सहमति देने की स्थिति में नहीं हैं.

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एक बार जब स्पर्म निकल आए, तो उसे सेफ रखने के लिए फ्रीज़ किया जाता है.

केरल हाई कोर्ट ने एक महिला को अपने 'ब्रेन-डेड' पति के स्पर्म सुरक्षित रखने की इजाज़त दी है. महिला ने कोर्ट को बताया कि उसके पति को पहले चिकनपॉक्स हुआ. फिर दो हफ्ते बाद सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस हो गया. यानी उसके दिमाग में खून का थक्का जम गया. इससे वो ब्रेन-डेड हो गया और फिलहाल वेंटिलेटर पर है.

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महिला ने कहा कि वो भविष्य में ART यानी एसिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नॉलजी के ज़रिए मां बनना चाहती है. यानी मेडिकल मदद से प्रेग्नेंट होना चाहती है. लेकिन पति की हालत ऐसी है, कि वो ART एक्ट के सेक्शन 22 के तहत, सहमति देने की स्थिति में नहीं है. दरअसल ART एक्ट के सेक्शन 22 के मुताबिक, ART प्रोसीजर्स के लिए दोनों पक्षों की लिखित सहमति ज़रूरी होती है. चाहे स्पर्म पति का हो या किसी डोनर का. महिला ने कोर्ट से ये भी कहा कि अगर इस मामले में और देरी होती है तो उसे Irreparable Loss हो सकता है. यानी ऐसा नुकसान जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती.

इसके बाद, हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कोझिकोड के हॉस्पिटल को निर्देश दिया कि हॉस्पिटल एक मान्यता-प्राप्त ART क्लीनिक के ज़रिए गेमेट्स यानी पुरुष के स्पर्म को निकालकर फ्रीज़ करे. कोर्ट ने ये भी साफ किया कि इसके अलावा, कोई और प्रक्रिया बिना कोर्ट की परमिशन लिए नहीं की जाएगी. अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होनी है.

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केरल हाई कोर्ट ने जिस प्रोसेस की इजाज़त दी है. वो है- स्पर्म रिट्रीवल. कई मामलों में पुरुष की मौत के बाद भी, एक तय टाइम के अंदर स्पर्म निकाले जाते हैं. जिसे पोस्थुमस स्पर्म रिट्रीवल कहा जाता है. लेकिन ये प्रक्रिया कैसे होती है. क्यों की जाती है. क्या पोस्थुमस स्पर्म रिट्रीवल का हर मामला सफल होता है? ये सारे सवाल हमने पूछे, नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली में यूरोलॉजी, यूरो-ऑन्कोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट डिपार्टमेंट के डायरेक्टर एंड सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर मयंक गुप्ता से.

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डॉ. मयंक गुप्ता, डायरेक्टर एंड सीनियर कंसल्टेंट, यूरोलॉजी, यूरो-ऑन्कोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली

डॉक्टर मयंक कहते हैं कि पोस्थुमस स्पर्म रिट्रीवल एक मेडिकल प्रक्रिया है. इसमें किसी पुरुष की मौत के बाद उसके शरीर से स्पर्म निकाले जाते हैं. ताकि भविष्य में उनसे बच्चा पैदा किया जा सके. इस प्रक्रिया को समय पर करना बहुत ज़रूरी है. वरना स्पर्म की क्वालिटी पर असर पड़ सकता है. पुरुष की मौत के 24 से 36 घंटे के भीतर स्पर्म निकालना ज़रूरी है.

स्पर्म निकालने के तीन तरीके हैं. पहला है, सर्जरी. इसमें अंडकोष या एपिडिडिमिस से सीधे स्पर्म निकाला जाता है. ये एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया होती है. दूसरा तरीका है, एस्पिरेशन. इसमें सुई की मदद से बिना सर्जरी के स्पर्म निकाले जाते हैं. तीसरा तरीका है, इलेक्ट्रो इजैकुलेशन. ये कुछ खास मामलों में ही किया जाता है. इसमें हल्के इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन के ज़रिए स्पर्म निकालने की कोशिश की जाती है.

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स्पर्म रिट्रीवल करके IVF या ICSI जैसी टेक्नीक में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है  

एक बार जब स्पर्म निकल आए, तो उसे सेफ रखने के लिए फ्रीज़ किया जाता है. ताकि आगे चलकर IVF या ICSI जैसी टेक्नीक में इनका इस्तेमाल किया जा सके.

IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन. इसमें महिला के एग्स यानी अंडों और पुरुष के स्पर्म को लैब में मिलाया जाता है. फिर इससे बनने वाले भ्रूण यानी एम्ब्रयो को महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है. वहीं ICSI यानी इंट्रासाइटोप्लाज़्मिक स्पर्म इंजेक्शन. ये IVF का एडवांस रूप है. इसमें स्पर्म को सीधे अंडे में इंजेक्ट किया जाता है.

हालांकि पोस्थुमस स्पर्म रिट्रीवल के हर मामले में सफलता की गारंटी नहीं होती. इसके पीछे कई वजहें हैं. जैसे टाइम. समय बीतने के साथ स्पर्म की क्वालिटी घट सकती है. अगर व्यक्ति की मौत किसी लंबी बीमारी से हुई है. उसके अंग फेल हो रहे थे या बहुत तेज़ बुखार था. तब स्पर्म की क्वालिटी पहले से ही खराब हो सकती है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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