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टेबल से टकराकर डॉनल्ड ट्रंप का हाथ नीला पड़ा! कसूरवार एस्पिरिन दवा भी है

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप एस्पिरिन दवा खाते हैं. ऐसा वो अपने दिल को सही-सलामत रखने के लिए करते हैं. लेकिन इस दवा से स्किन पर नीले-बैंगनी रंग के निशान पड़ सकते हैं.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) अलग-अलग वजहों से अक्सर चर्चा में रहते हैं. इस बार चर्चा में रहने की वजह है उनका हाथ. वैसे तो उनका ‘हाथ’ कभी टैरिफ बढ़ाने के लिए उठता है तो कभी नोबेल पीस प्राइज मांगने के लिए. लेकिन इस बार उनके ‘हाथ’ के चर्चा में रहने की वजह दूसरी है. पिछले दिनों ट्रंप दावोस में थे. दावोस स्विटज़रलैंड का एक शहर है. यहां 19 से 23 जनवरी World Economic Forum की एनुअल मीटिंग हुई थी. इसी दौरान ट्रंप का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उनके हाथ पर नीले-बैंगनी रंग के निशान देखे गए. यानी ब्रूसेज़.

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टेबल से हाथ टकराने की वजह से ट्रंप के हाथ पर नीले निशान पड़ गए

जब डॉनल्ड ट्रंप से इन निशानों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनका हाथ टेबल से टकरा गया था. लेकिन उन्होंने उस पर क्रीम लगा ली. इसके बाद ट्रंप ने एस्पिरिन की बात छेड़ दी. बोले, 

अगर आपको अपना दिल पसंद है तो एस्पिरिन लीजिए. लेकिन अगर आप थोड़ी-सी भी ब्रूसिंग नहीं चाहते तो एस्पिरिन मत लीजिए. मैं ‘बिग एस्पिरिन’ लेता हूं. 

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यहां वो एस्पिरिन नाम की दवा की ज़्यादा डोज़ की बात कर रहे थे. ट्रंप आगे बोले, 

जब आप बिग एस्पिरिन लेते हैं तो इससे ब्रूस पड़ जाते हैं. डॉक्टर्स ने कहा कि आपको ये लेने की ज़रूरत नहीं है. आप स्वस्थ हैं. लेकिन मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता. ये उसके साइड इफेक्ट्स में से एक है.

अब सवाल है कि क्या ट्रंप के हाथ पर ये नीले-बैगनी निशान एस्पिरिन की वजह से हैं? एस्पिरिन क्यों ली जाती है और इससे ब्रूसेज़ क्यों पड़ जाते हैं? ये सब कुछ हमने पूछा धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल दिल्ली में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर एंड यूनिट हेड, डॉक्टर समीर कुब्बा से.

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डॉ. समीर कुब्बा, डायरेक्टर एंड यूनिट हेड, कार्डियोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली

डॉक्टर समीर कहते हैं कि एस्पिरिन लेने से ब्रूसेज़ (चोट जैसे निशान) हो सकते हैं. यानी स्किन पर नीले-बैंगनी रंग के निशान पड़ सकते हैं. दरअसल, एस्पिरिन एक ब्लड थिनर है. ये खून को पतला करती है. ऐसे में अगर स्किन पर कहीं चोट लगे तो उस जगह पर ब्रूसिंग आसानी से हो जाती है. एस्पिरिन ब्लड थिनर होने के साथ-साथ एंटी-इंफ्लेमेट्री दवा भी है. ये एंटी-प्लेटलेट दवा के रूप में भी काम करती है. इसे अक्सर दिल की बीमारियों, जैसे कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है. 

कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ दिल की एक बीमारी है. इसमें दिल तक खून पहुंचाने वाली आर्टरीज़ यानी धमनियां पतली हो जाती हैं या ब्लॉक हो जाती हैं. ऐसा आर्टरीज़ में प्लाक जमने से होता है. इससे दिल तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता, जिससे हार्ट अटैक का ख़तरा बढ़ जाता है.

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एस्पिरिन खून को पतला करने वाली दवा है (फोटो: Freepik)

आमतौर पर दिल की बीमारियों में एस्पिरिन की तीन डोज़ दी जाती हैं. 75 मिलीग्राम, 150 मिलीग्राम और 325 मिलीग्राम. इन्हें सेफ़ भी माना जाता है लेकिन बुज़ुर्गों, पेप्टिक अल्सर के मरीज़ों या कमज़ोर इम्यूनिटी वाले लोगों में ब्लीडिंग का रिस्क हो सकता है. इसके अलावा, अगर एस्पिरिन की हाई डोज़ दी जा रही है. तब ब्लीडिंग का थोड़ा ज़्यादा रिस्क रहता है. इसलिए, डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी एस्पिरिन नहीं लेनी चाहिए.

दर्द कम करने या दिल की सेहत के लिए, एस्पिरिन के अलावा भी दवाएं दी जा सकती हैं. लेकिन किस मरीज़ को कौन-सी दवा लेनी चाहिए. उसका कितना डोज़ लेना चाहिए. ये मरीज़ की उम्र और उसकी मेडिकल कंडीशन देखने के बाद डॉक्टर तय करते हैं.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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