The Lallantop

लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रॉसेस क्या है?

Loksabha Speaker No confidence motion: भारत के संविधान में लोकसभा के स्पीकर को पद से हटाने के प्रावधान अनुच्छेद 94 में मिलते हैं.

Advertisement
post-main-image
स्पीकर को हटाने के लिए विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चा है. (india today)

राज्यसभा के बाद अब लोकसभा में भी ‘जगदीप धनखड़ मोमेंट’ होने वाला है? स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव ला रहा है, जिसके लिए लोकसभा महासचिव को नोटिस भी दे दिया गया है. कांग्रेस, DMK, समाजवादी पार्टी जैसे दलों के करीब 118 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के नोटिस पर साइन किए हैं. इस नोटिस के तत्काल बाद से ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही से अलग कर लिया है. मंगलवार, 10 फरवरी को सदन की कार्यवाही के दौरान वह आसन पर नहीं बैठे.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

लोकसभा के स्पीकर को पद से हटाने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 94 में प्रावधान है. यही सांसदों को लोकसभा स्पीकर को हटाने की शक्ति देता है. इस अनुच्छेद में कहा गया है कि लोकसभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की आसन से विदाई तीन स्थितियों में हो सकती है. 

पहला ये कि अगर स्पीकर या डिप्टी स्पीकर लोकसभा का सदस्य नहीं रहता है तो उसे अपना पद छोड़ना होगा. यानी 'अयोग्यता' पर भी स्पीकर को अपना पद छोड़ना पड़ता है.

दूसरा कि वह किसी भी समय इस्तीफा दे सकता है. यह इस्तीफा लिखित रूप में अपने हस्ताक्षर के साथ देना होगा. स्पीकर अपना इस्तीफा डिप्टी स्पीकर को संबोधित करते हुए देंगे जबकि डिप्टी स्पीकर अपना इस्तीफा स्पीकर को अड्रेस करते हुए देंगे.

तीसरा जो प्रावधान है वो स्पीकर को हटाने को लेकर है. इसमें लोकसभा के सभी तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव से स्पीकर को उनके पद से हटाया जा सकता है.

Advertisement
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया

लोकसभा नियमावली के अनुच्छेद 200 में स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया बताई गई है. इसके तहत सदन का कोई भी सदस्य अध्यक्ष को हटाने की मांग कर सकता है. इसके लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने से 14 दिन पहले उसे लोकसभा महासचिव को इसका नोटिस देना होगा. आगे इस नियम में कहा गया है,

प्रस्ताव के लिए नोटिस देने वाले सांसद को प्रस्ताव का पूरा टेक्स्ट लोकसभा महासचिव को देना होगा. इसमें स्पीकर के खिलाफ आरोपों के बारे में साफ-साफ लिखा होना चाहिए. कोई तर्क, अनुमान, व्यंग्यात्मक बातें या मानहानिकारक बयान इस प्रस्ताव में नहीं होने चाहिए. नोटिस मिलने के बाद प्रस्ताव पेश करने की इजाजत के लिए एक प्रस्ताव संबंधित सदस्य के नाम पर लोकसभा के कामकाज की सूची में दर्ज किया जाएगा. फिर प्रस्ताव के लिए दिन तय किया जाएगा, जो नोटिस मिलने की तारीख से 14 दिन बाद का कोई भी दिन होगा. 

नियमावली में साफ कहा गया है कि इस प्रस्ताव को कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन मिलना चाहिए. नहीं तो प्रस्ताव गिर जाएगा. स्वीकार होने के 10 दिनों के भीतर इस पर चर्चा और वोटिंग कराई जाती है.

Advertisement

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य ने इस प्रक्रिया को विस्तार से समझाया था. उन्होंने कहा था कि लोकसभा नियमावली में अविश्वास प्रस्ताव का प्रावधान है, जिसके लिए किसी भी सदस्य को 14 दिन पहले नोटिस देना होगा और फिर आरोपों के बारे में विस्तार से बताना होगा.

स्वीकार किए जाने के बाद इस पर चर्चा होगी, लेकिन जब अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होती है तो अध्यक्ष आसन पर नहीं बैठते. वो सदन में आकर बैठेंगे क्योंकि उन्हें अपना बचाव करने का अधिकार है. आचार्य ने बताया कि ये बहुत दुर्लभ अवसर होता है जब अध्यक्ष सदन में बोलते हैं. अगर अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है तो अध्यक्ष को जाना पड़ता है.  

कितने स्पीकर्स के खिलाफ आया है अविश्वास प्रस्ताव?

आजादी के बाद कम ही ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें स्पीकर के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया हो. देश में पहले आम चुनाव के ठीक दो साल बाद ऐसा हुआ था. 

सबसे पहला अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा के पहले ही स्पीकर के खिलाफ लाया गया था. साल 1954 में जीवी मावलंकर पर सांसद विघ्नेश्वर मिश्रा ने ये आरोप लगाकर उन्हें हटाने का प्रस्ताव पेश किया था कि वह निष्पक्ष नहीं हैं. 

इसके बाद 1966 में विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष सरदार हुकुम सिंह के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया, जिसका नेतृत्व मधु लिमये ने किया था. 

स्पीकर के खिलाफ तीसरा प्रस्ताव 15 अप्रैल 1987 को सीपीएम सांसद सोमनाथ चटर्जी लेकर आए, जिन्होंने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया था. हालांकि, सदन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

वीडियो: दुनियादारी: कौन हैं जिमी लाई, जिन्हें चीनी सरकार ने सुनाई 20 साल की सजा?

Advertisement