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सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत के लिए भी ज़रूरी हैं मसाले, ये 5 तो आपके पास होने ही चाहिए

मसाले सिर्फ़ ज़ुबान को स्वाद नहीं देते. सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद हैं. आपको अंदाज़ा भी नहीं कि आपके किचन में रखी मसालदानी कितनी जादुई चीज़ है.

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हर मसाले का अपना अलग फ़ायदा होता है (फोटो: Freepik)

फ़र्ज़ कीजिए आप घर पर अपना फ़ेवरेट पकवान बना रहे हैं. कढ़ाई पनीर. चना मसाला. बटर चिकन. बिरयानी. कुछ भी. सबसे पहले आप कढ़ाई में डालते हैं तेल. फिर थोड़ा-सा जीरा, हल्दी, लौंग, काली मिर्च, दालचीनी वगैरह. यानी मसाले. जब तक खाने में मसाले न पड़ें, स्वाद नहीं आता. खाना फ़ीका और बेस्वाद लगता है.

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जिन मसालों की खातिर अंग्रेज़ भारत तक आ गए. वो सिर्फ़ ज़ुबान को स्वाद नहीं देते. सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद हैं. आपको अंदाज़ा भी नहीं है, आपके किचन में रखी मसालदानी कितनी जादुई चीज़ है. इसलिए, खाना बनाते हुए कुछ मसाले आपको रोज़ इस्तेमाल करने चाहिए. इन मसालों के बारे में हमें बताया आकाश हेल्थकेयर, नई दिल्ली में हेड डाइटिशियन गिन्नी कालरा ने. 

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गिन्नी कालरा, हेड डाइटिशियन, आकाश हेल्थकेयर, नई दिल्ली

दालचीनी

पहला मसाला दालचीनी (Cinnamon) है. दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. ये शरीर के सेल्स को मज़बूत रखने में मदद करते हैं. इसमें कुछ ज़रूरी मिनरल्स और विटामिंस भी पाए जाते हैं. दालचीनी एसिडिटी से राहत दिलाती है और पाचन दुरुस्त रखती है. ये दिल की सेहत सुधारने में भी मदद करती है. रोज़ 1-2 ग्राम दालचीनी खाने में इस्तेमाल कर सकते हैं

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मेथी दाना  (मेथी के बीज)

दूसरा मसाला मेथी दाना (Fenugreek Seeds) है. इसमें फाइबर, कैल्शियम और दूसरे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं. मेथी दाना हमारे मेटाबॉलिज़्म को सुधारता है. डायबिटीज़ और थायरॉइड ग्रंथि से जुड़ी परेशानियां कंट्रोल करने में भी मदद करता है. रोज़ आधा चम्मच (3 से 4 ग्राम) मेथीदाना लिया जा सकता है. मेथी दाना इस्तेमाल करने से पहले डाइटिशियन की सलाह ज़रूरी है, क्योंकि इसके साइड इफेक्ट्स भी होते हैं. इसलिए ये जानना ज़रूरी है कि कौन मेथी दाना ले सकता है और कौन नहीं.

जीरा

तीसरा मसाला जीरा (Cumin) है. इसे रोज़ खाने में इस्तेमाल किया जाता है. जीरे में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. ये मेटाबॉलिज़्म भी सुधारता है. ब्लोटिंग, एसिडिटी और पेट से जुड़ी दूसरी दिक्कतों में जीरा बहुत फायदेमंद है. रोज़ 2-3 ग्राम जीरा अपने खाने में इस्तेमाल कर सकते हैं.

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काली मिर्च में एंटीऑक्सीडेंट्स और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं (फोटो: Freepik)

काली मिर्च

चौथा मसाला काली मिर्च (Black Pepper) है. काली मिर्च में पिपेरिन होता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं. इसलिए जो इंफेक्शन बहुत आसानी से हो जाते हैं, जैसे खांसी और सर्दी. ये उनमें असरदार हैं. ये जोड़ों के दर्द और आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी मदद करता है.

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लौंग

पांचवा मसाला लौंग (Clove) है. लौंग में एंटी-इंफ्लेमेट्री (सूजन कम करने वाले) गुण पाए जाते हैं. इस वजह से ये जोड़ों के दर्द और पीठ दर्द में आराम दिलाती है. रोज़ 1 से 2 लौंग खाने में इस्तेमाल कर सकते हैं. पिसी लौंग है तो एक चुटकी भर ही इस्तेमाल करें. कुछ हद तक ये दांतों और मसूड़ों के दर्द में भी राहत दिलाती है.

समझे आप! मसालदानी में रखे मसाले, सिर्फ़ खाने का ज़ायका नहीं बढ़ाते. इनके फायदे भी हैं. तभी इन्हें खाने में डाला जाता है. बस एक चीज़ का ख़ास ध्यान रखें. मसालों का ओवरडोज़ न करें. वरना खाने का स्वाद तो बिगड़ेगा ही, सेहत भी बिगड़ जाएगी.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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