अब से आप सीधा मेडिकल स्टोर पर जाकर कफ सिरप या कोई दूसरा सिरप नहीं खरीद सकेंगे. केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव किया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नोटिफिकेशन के मुताबिक, चाहे खांसी का सिरप हो या कोई और सिरप, खरीदने के लिए डॉक्टर का पर्चा ज़रूरी होगा. अगर पर्चा नहीं है, तो सिरप नहीं मिलेगा.
कफ सिरप डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगा, तो हल्की खांसी में क्या करें? डॉक्टर ने बताया
नियमों में बदलाव के तहत, ड्रग्स रूल्स, 1945 के ‘शेड्यूल K’ में शामिल दवाओं की कैटेगरी से ‘सिरप’ शब्द हटा दिया गया है. यानी कोई भी सिरप अब आपको ओवर-द-काउंटर नहीं मिलेगा. पहले आप डॉक्टर को दिखाएंगे. अगर डॉक्टर को लगेगा कि आपको किसी सिरप की ज़रूरत है, तो वो आपको प्रिस्क्राइब करेंगे, और इसके बाद ही आप वो सिरप खरीद पाएंगे.


नियमों में बदलाव के तहत, ड्रग्स रूल्स, 1945 के ‘शेड्यूल K’ में शामिल दवाओं की कैटेगरी से ‘सिरप’ शब्द हटा दिया गया है. यानी कोई भी सिरप अब आपको ओवर-द-काउंटर नहीं मिलेगा. पहले आप डॉक्टर को दिखाएंगे. अगर डॉक्टर को लगेगा कि आपको किसी सिरप की ज़रूरत है, तो वो आपको प्रिस्क्राइब करेंगे, और इसके बाद ही आप वो सिरप खरीद पाएंगे.
पर ऐसा क्या हो गया है, क्यों अब बिना पर्ची के सिरप नहीं मिलेंगे? इस फैसले से क्या-कुछ फायदा होगा? हमने पूछा नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर पियूष गोयल से. ये भी जाना कि अगर किसी को हल्की खांसी हो, तो अब उसे क्या करना चाहिए?

डॉक्टर पियूष कहते हैं कि इस कदम की सबसे बड़ी वजह मरीज़ों की सुरक्षा करना और नकली या दूषित दवाओं पर रोक लगाना है. पिछले कुछ सालों में कफ सिरप से जुड़े कई गंभीर मामले सामने आए हैं. आपको याद होगा, सितंबर 2025 में मध्य प्रदेश और राजस्थान में दूषित कफ सिरप पीने से 20 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो गई थी. इससे पहले 2022 में गाम्बिया और उज़्बेकिस्तान में भी भारत में बने कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे.
अक्सर लोग बिना डॉक्टरी सलाह के सिरप खरीदकर इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं. लेकिन ऐसा करना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. सबसे बड़ा खतरा गलत डोज़ का होता है. कई सिरप में ऐसे तत्व होते हैं. जिनकी ज़्यादा मात्रा सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकती है. खूब नींद ला सकती है और दिल की धड़कनें भी बढ़ा सकती है. छोटे बच्चों में गलत डोज़ कुछ केसों में जानलेवा साबित हुई है. यही वजह है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन और डॉक्टर, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को बिना जांच और सलाह के कफ सिरप देने से सख्त मना करते हैं.
इसके अलावा, अगर किसी सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकोल जैसे ज़हरीले सॉल्वेंट की मिलावट हो, तो इसके टॉक्सिन सीधे किडनी और लिवर पर असर डालते हैं. इससे यूरिन आना बंद हो सकता है और अचानक किडनी फेल होने से मौत भी हो सकती है. वहीं, कई युवा नशे के लिए कोडीन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल करते हैं. इन सारी समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने ये फैसला लिया है.

अब क्योंकि, दवा दुकानदार बिना प्रिस्क्रिप्शन के सिरप नहीं बेच पाएंगे. इससे अवैध बिक्री और कालाबाज़ारी रुकेगी. साथ ही, कंपनियों पर मैन्युफैक्चरिंग के दौरान डाइएथिलीन ग्लाइकोल जैसे सॉल्वेंट्स की शुद्धता जांचने का भारी दबाव होगा. जिससे भारत की दवाओं की वैश्विक साख सुधरेगी. वहीं, गांवों और छोटे कस्बों में झोलाछाप डॉक्टरों या सीधे मेडिकल स्टोर से दवा लेकर बच्चों को पिलाने की आदत पर लगाम लगेगी, जिससे भविष्य में कफ सिरप से होने वाली अकाल मौतों को रोका जा सकेगा.
अगर किसी को हल्की खांसी है, तो वो क्या करें?डॉक्टर पियूष का कहना है कि हर बार हल्की खांसी होने पर डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नहीं है. खांसी की गोलियां, लोज़ेंजेस और कफ पिल्स को इस नए नियम से बाहर रखा गया है. यानी इन्हें आप पहले की तरह बिना प्रिसक्रिप्शन के खरीद सकते हैं.
खांसी आने पर कुछ घरेलू नुस्खे भी आजमा सकते हैं. जैसे गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करना. भाप लेना. और शहद व अदरक का रस मिलाकर पीना. हालांकि अगर खांसी 4-5 दिनों से ज़्यादा रहे. बलगम में खून आए या सांस फूले, तब बिना देरी किए डॉक्टर से मिलकर प्रिस्क्रिप्शन लिखवाना ही समझदारी होगी.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: सेहत: प्रोटीन, फाइबर, कार्ब्स रोज़ कितना लेना ज़रूरी?


















