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एग्ज़ाम टाइम में कैसे बढ़ाएं फोकस? खुद को कैसे रखें रिलैक्स? एक्सपर्ट से जानिए

अगर आपके घर में कोई स्टूडेंट है, तो ये 5 टिप्स उसके ज़रूर काम आएंगी.

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एग्ज़ाम टाइम में अक्सर बच्चों को स्ट्रेस हो जाता है

फरवरी-मार्च यानी एग्ज़ाम्स का टाइम. इस वक़्त स्कूल-कॉलेज में फाइनल एग्ज़ाम्स, बोर्ड एग्ज़ाम्स होते हैं. ये टाइम स्टूडेंट्स के लिए बहुत स्ट्रेसफुल है. मोटी-मोटी किताबें पढ़ना. लंबे-लंबे चैप्टर रटना. अच्छे नंबर लाने की टेंशन. उफ्फ्फ़…फुल टेंशन का माहौल होता है.

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ऐसे में क्या किया जाए, जिससे स्टूडेंट्स अपना दिमाग शांत कर पाएं. खुद को रिलैक्स कर पाएं. उनका फोकस बढ़े और वो ठीक से पढ़ पाएं.

स्टूडेंट्स के लिए कुछ बहुत ही काम की टिप्स दी हैं डॉक्टर मिकी मेहता ने. 

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डॉ. मिकी मेहता, समग्र स्वास्थ्य गुरु

डॉक्टर मिकी कहते हैं कि एग्ज़ाम्स के दिनों में स्टूडेंट्स का स्ट्रेस-फ्री रहना ज़रूरी है. अगर आपके घर में कोई बच्चा है. जिसके एग्ज़ाम्स चल रहे हैं, तो उसे ये 5 चीज़ें करने को ज़रूर कहें.

पहला- गहरी सांसें लेना यानी डीप ब्रीदिंग. धीमे-धीमे लंबी और गहरी सांसें लेने से दिमाग शांत होता है. फोकस बढ़ता है. इसलिए, हर एक-दो घंटे बाद 5 से 10 मिनट का ब्रेक लें. इस दौरान गहरी सांसें लें. फिर जब आप पढ़ने बैठेंगे तो पढ़ाई में आपका मन लगेगा.

दूसरा- 5-4-3-2-1 टेक्नीक. ये एक सेंसरी एक्सरसाइज़ है. यानी इसमें आप अपने सेंसेज़ का इस्तेमाल करते हैं. जैसे आंख, नाक, कान, जीभ और टच का. 5-4-3-2-1 टेक्नीक में आपको अपने आसपास 5 चीज़ें देखनी हैं. चार को छूना है. तीन आवाज़ें सुननी हैं. दो की स्मेल पहचाननी हैं. किसी एक चीज़ का स्वाद चखना है. इस टेक्नीक को करने से एंग्ज़ायटी और स्ट्रेस दूर करने में मदद मिलती है.

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तीसरा- स्ट्रेचिंग और हल्की एक्सरसाइज़ करना. हर दो से तीन घंटे बाद अपनी सीट से उठें. फिर गर्दन, कंधों, हाथ और पैरों की स्ट्रेचिंग करें. ऐसा करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है. जिससे शरीर रिलैक्स होता है. स्ट्रेस कम होता है और खून का फ्लो भी सुधरता है.

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स्ट्रेस दूर करने और मन को शांत करने के लिए ध्यान लगाना एक अच्छा तरीका है (क्रेडिट: Getty Images)

चौथा- ध्यान लगाना. स्ट्रेस दूर करने और मन को शांत करने के लिए ध्यान लगाना एक अच्छा तरीका है. इसे करने के लिए 5 मिनट पालथी मारकर बैठें. फिर आंखें बंद करें और अपनी सांसों पर ध्यान दें. कुछ और न सोचें. ऐसा करने से 5 मिनट बाद आप बहुत रिलैक्स्ड महसूस करेंगे.

पांचवा- म्यूज़िक सुनें. कुछ ऐसा जो इंस्ट्रुमेंटल हो या जिसमें प्रकृति से जुड़ी आवाज़ें हों. जैसे बारिश की आवाज़. समुद्र की लहरें. कुछ ऐसा जो मन को शांत करें. इस तरह का म्यूज़िक सुनने से दिमाग एकदम शांत हो जाता है और फोकस बढ़ता है.

साथ ही, जब भी पढ़ने बैठें. अपने साथ पानी की बोतल ज़रूर रखें. शरीर में पानी की कमी हो तो स्ट्रेस और चिढ़चिढ़ापन बढ़ सकता है. लेकिन, पानी पीने से दिमाग तरोताज़ा महसूस करता है. आप चाहें तो ORS का घोल भी पी सकते हैं.

एक बात और. पॉज़िटिव रहें. निगेटिव सोचेंगे तो पढ़ाई में मन नहीं लगेगा और टेंशन बढ़ती जाएगी. पैरेंट्स से एक स्पेशल रिक्वेस्ट है. इस वक़्त आपका बच्चा काफ़ी प्रेशर महसूस कर रहा है. उसको समझें. उस पर और दबाव न डालें.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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