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चाह कर भी मीठा नहीं छोड़ पा रहे, ये 5 टिप्स छुड़वा देंगी

आजकल हर दूसरा शख्स मीठा छोड़ने की बात करता है, लेकिन छोड़ कोई-कोई ही पाता है. यूं भी ये आदत छोड़ना थोड़ा मुश्किल है. हालांकि, नामुमकिन नहीं. आपने जिस भी वजह से मीठा छोड़ने का फैसला लिया है, हम उसमें आपकी मदद कर सकते हैं. बस आपको डॉक्टर की बताई खास टिप्स को फॉलो करना है.

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मीठा छोड़ना मुश्किल है, नामुमकिन नहीं

क्या आप मीठा छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन छोड़ नहीं पा रहे? हम समझ सकते हैं. ये आदत छोड़ना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन, नामुमकिन नहीं. आपने जिस भी वजह से मीठा छोड़ने का फैसला लिया है, हम उसमें आपकी मदद कर सकते हैं. बस आपको डॉक्टर अनु अग्रवाल की बताई खास टिप्स को फॉलो करना है.

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डॉ. अनु अग्रवाल, ऑन्कोलॉजी डाइटिशियन एंड फाउंडर, वन डाइट टुडे

पहली टिप. सारी मीठी चीज़ें एक साथ मत छोड़िए. इससे और ज़्यादा क्रेविंग होगी. अगर आप दिन में एक पैकेट बिस्किट और दो मीठी चाय पीते हैं. तो पहले चाय में चीनी घटाइए. बिस्किट भी कम खाइए. धीरे-धीरे ऐसा करने से मीठा खाने की आदत कम हो जाएगी. फिर छूट जाएगी. कुल मिलाकर अचानक से मीठा नहीं छोड़ना है. धीरे-धीरे उसकी मात्रा घटानी है. आप चाहें तो चाय में चीनी के बजाय गुड़ या खांड डाल सकते हैं.

दूसरी टिप. जिन चीज़ों में बहुत ज़्यादा चीनी होती है. उन्हें आसपास मत रखिए. जैसे मिठाइयां फ्रिज़ में सबसे आगे न रखिए. उन्हें एकदम अंदर या नीचे की तरफ़ रखिए. ताकि फ्रिज़ खोलते ही ये चीज़ें आपको तुरंत दिखाई न दें. ऐसी मिठाइयां कम खरीदिए, जिन्हें स्टोर किया जा सकता है. इसी तरह, बिस्किट का पैकेट और दूसरी मीठी चीज़ें मेज़ पर या किचन में सामने न रखें. जब ये चीज़ें नज़र के सामने होती हैं, तो उन्हें खाने का मन भी ज़्यादा करता है.

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आप फल खाइए, ये मीठे होते हैं और पोषण भी देते हैं

तीसरी टिप. अपने आस-पास हेल्दी चीज़ें रखिए. जैसे फल, ड्राई फ्रूट्स खासकर गीला खजूर, गुड़ या केरेमालाइज्ड मखाने. इन्हें खाना ज़्यादा बेहतर है.

अब आप कहेंगे कि शुगर तो फल में भी होती है. फिर हम भला केक, पेस्ट्री या बिस्किट से बैर क्यों करें. तो, भले फल और बिस्किट दोनों में शुगर होती है, मगर इसके सोर्स और असर में फर्क होता है. फलों में नेचुरल शुगर होती है. जो फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ मिलकर शरीर को पोषण देती है. ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रखती है. इतना ही नहीं, फल खाने से पेट भी देर तक भरा रहता है. जिससे क्रेविंग्स कम होती हैं. वहीं बिस्किट और ऐसी ही दूसरी चीज़ों में प्रोसेस्ड और एडेड शुगर होती है. ये तेज़ी से ब्लड शुगर बढ़ाती है. उस पर, इनमें कोई पोषक तत्व भी नहीं होते, सिर्फ कैलोरी होती हैं.

चौथी टिप. पैकेटबंद चीज़ों के फूड ज़रूर लेबल पढ़िए. देखिए, हम बाज़ार से ऐसी बहुत सारी चीज़ें खरीदकर लाते हैं, जिनमें छिपी हुई शुगर होती है. जैसे बिस्किट, तली-भुनी और फैटी चीज़ों में. ज़्यादातर फूड पैकेट्स पर भले ही ज़ीरो शुगर या शुगर फ्री लिखा हो, मगर उनमें इनबिल्ट शुगर भी होती है. इनबिल्ट शुगर यानी वो शुगर जो किसी चीज़ में प्राकृतिक रूप से मौजूद होती है. इसलिए, खरीदारी करते समय हमेशा फूड लेबल्स चेक करें. देखें कि उसमें प्रति सर्विंग्स कितनी कैलोरीज़, कार्ब्स और ऐडेड शुगर है.

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रोज़ ब्रेकफास्ट ज़रूर करें. इससे  ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है

पांचवी टिप. सुबह का नाश्ता ज़रूर करें. हेल्दी नाश्ता करने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है. शुगर क्रेविंग्स कम करने में भी मदद मिलती है. इसलिए, नाश्ता ज़रूर करें. और, ये नाश्ता हेल्दी होना चाहिए. आपके नाश्ते में फाइबर, प्रोटीन जैसे पोषक तत्व होने चाहिए. आप पोहा, दलिया, उपमा, इडली-सांभर, चीला, पनीर भुर्जी, अंडे और मल्टीग्रेन पराठा वगैरा खा सकते हैं.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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