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मोटापा कम करने वाले मोंजारो इंजेक्शन नकली बनने लगे, डॉक्टर ने बताया कैसे पहचानें

ड्रग कंट्रोल विभाग ने 18 अप्रैल को नकली मोंजारो इंजेक्शन का जखीरा पकड़ा है. इसकी कीमत करीब 70 लाख रुपए बताई जा रही है. आरोपी रॉ ड्रग्स में पानी मिलाकर इंजेक्शन तैयार करता था. इसके लिए उसने चीन की ई-कॉमर्स साइट अलीबाबा से ढाई लाख रुपए में नकली मोंजारो इंजेक्शन बनाने का सामान ऑर्डर किया था.

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नकली मोंजारो इंजेक्शन बनाने के मुख्य आरोपी ने 2 करोड़ महीने की कमाई का टारगेट सेट किया था

आपने ओज़ेम्पिक और मोंजारो का नाम सुना है? ये टाइप-2 डायबिटीज़ कंट्रोल करने वाले इंजेक्शन हैं. जो वेट लॉस में भी काफी असरदार माने जाते हैं. दुनियाभर में कई सेलेब्रिटीज़ इन दवाओं की मदद से अपना वज़न घटा चुके हैं. भारत में भी पिछले कुछ वक्त से इनका इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा है. इसी बढ़ती मांग का फ़ायदा उठाकर कुछ लोगों ने इनके नकली इंजेक्शन बनाने शुरू कर दिए हैं.

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ऐसा ही एक मामला सामने आया है गुरुग्राम से. आज तक से जुड़े नीरज वशिष्ठ की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां ड्रग कंट्रोल विभाग ने 18 अप्रैल को नकली मोंजारो इंजेक्शन का जखीरा पकड़ा है. इसकी कीमत करीब 70 लाख रुपए बताई जा रही है. आरोपी रॉ ड्रग्स में पानी मिलाकर इंजेक्शन तैयार करता था. इसके लिए उसने चीन की ई-कॉमर्स साइट अलीबाबा से ढाई लाख रुपए में नकली मोंजारो इंजेक्शन बनाने का सामान ऑर्डर किया था. अधिकारियों की माने तो आरोपी ने 2 करोड़ महीने की कमाई का टारगेट सेट किया था. लेकिन विभाग को पहले ही भनक लग गई. जिसके बाद उन्होंने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है.

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कई लोग वज़न घटाने वाले वीकली इंजेक्शन लगा रहे हैं 

देखिए, आजकल तेज़ी से वज़न घटाने वाली दवाएं काफी पॉपुलर हो रही हैं. बहुत से लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं. इसलिए ये जानना ज़रूरी है कि आप जो मोंजारो या इसके जैसे दूसरे इंजेक्शन खरीद रहे हैं, वो कहीं फ़ेक तो नहीं हैं. 

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कैसे करें असली और नकली वेट लॉस इंजेक्शंस की पहचान, ये हमने पूछा अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, पुणे में बेरियाट्रिक सर्जन, डॉक्टर शशांक शाह से.

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डॉ. शशांक शाह, बेरियाट्रिक सर्जन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, पुणे

डॉक्टर शशांक कहते हैं कि सबसे पहले इंजेक्शन की पैकेजिंग और लेबल चेक करें. नकली प्रोडक्ट पर अक्सर स्पेलिंग मिस्टेक होती हैं. उनकी प्रिंटिंग भी साफ़ और प्रोफेशनल नहीं होती. अगर छपाई धुंधली हो, शब्द गलत हों या रंग अजीब लगे, तो सतर्क हो जाएं.

असली पैकेजिंग पर बैच नंबर और एक्सपायरी डेट साफ़-साफ़ छपी होती है. अगर ये धुंधली हो, मिटाई हुई लगे या मेल न खाए, तो दवा इस्तेमाल न करें. साथ ही, बॉक्स हमेशा सीलबंद होना चाहिए. कई असली प्रोडक्ट में QR कोड या स्कैनिंग का ऑप्शन होता है. अगर आपके वाले में कोड नहीं है, या स्कैन करने पर काम नहीं करता, तो ऐसा इंजेक्शन इस्तेमाल करने से बचें.

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अब बात पेन की बनावट की. असली मोंजारो पेन में मज़बूत और अच्छी फिनिश वाला होता है. इसमें बटन आमतौर पर बैंगनी रंग की होती है और अंगूठा रखने के लिए हल्का गड्ढा बना होता है. लेकिन नकली पेन में प्लास्टिक सस्ता, ढीला या असमान हो सकता है.

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GLP-1 दवाएं हमेशा फार्मेसी से ही खरीदें 

असली पेन में डोज़ सेट करने के लिए घुमाने वाला डायल नहीं होता. अगर पेन में नंबर घुमाकर सेट करने की सुविधा है, तो वो नकली हो सकता है. आप दवा के रंग पर भी ध्यान दें. पेन के अंदर की दवा साफ, रंगहीन या हल्की पीली होनी चाहिए. अगर दवा धुंधली दिखे या उसमें कण नजर आएं, तो उसे इस्तेमाल न करें.

मोंजारो और बाकी जितनी भी GLP-1 दवाएं हैं, उन्हें बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं खरीदा जा सकता. भारत में इन्हें सिर्फ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट ही लिख सकते हैं. तो अगर कोई बिना पर्चे के दवा दे रहा है. या बहुत सस्ते में ऑफर कर रहा है, तो सावधान हो जाएं. ऐसी दवा नकली या असुरक्षित हो सकती है. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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