आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इसे अपलोड किया है विवेक राजपूत नाम के शख्स ने. उनका दावा है कि ब्लैक कॉफी पीकर उन्होंने अपना फैटी लिवर पूरी तरह ठीक कर लिया. वीडियो में विवेक कहते हैं, “मैं पिछले 100 दिनों से ब्लैक कॉफी पी रहा हूं. इसका एक फायदा हुआ कि मेरा फैटी लिवर नॉर्मल हो गया. दूसरा, SGPT 56 से 38 हो गया.” ब्लैक कॉफी पीने के साथ-साथ उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल में भी कुछ बदलाव किए. जैसे मीठी चीज़ें खानी बंद कर दीं. जिम जॉइन किया. हफ्ते में 5 दिन एक्सरसाइज़ करनी शुरू की. नतीजा? अच्छा-खासा वेट लॉस भी हुआ.
सिर्फ ब्लैक कॉफी पीकर पूरी तरह ठीक हो सकता है फैटी लिवर? डॉक्टर ने पूरी बात बताई
सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इसमें शख्स का दावा है कि ब्लैक कॉफी पीकर उसने अपना फैटी लिवर पूरी तरह ठीक कर लिया.


फैटी लिवर हमारे देश में एक बहुत ही आम समस्या बन गई है. इसमें लिवर पर चर्बी जम जाती है, जिससे लिवर के काम करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है. साथ ही SGPT भी बढ़ जाता है. SGPT एक एंजाइम है, जो ज़्यादातर लिवर के सेल्स में पाया जाता है. जब लिवर हेल्दी होता है, तो SGPT खून में कम मात्रा में रहता है. लेकिन जब लिवर में कोई दिक्कत होती है. जैसे चोट, सूजन या फैटी लिवर. तब SGPT बढ़ जाता है. और ये काफ़ी नुकसानदेह है.
ब्लैक कॉफ़ी लिवर के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है. ये बात एक्सपर्ट्स कई बार दोहरा चुके हैं. पर क्या इससे फैटी लिवर पूरी तरह ठीक हो सकता है? ये सवाल हमने पूछा नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम में लिवर ट्रांसप्लांट एंड एचपीबी सर्जरी के डायरेक्टर, डॉक्टर संजय गोजा से.

डॉक्टर संजय कहते हैं कि ब्लैक कॉफी फैटी लिवर को रिवर्स करने में मदद कर सकती है. लेकिन अकेले कॉफी से पूरा इलाज नहीं हो सकता. कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट्स ग्लूकोज़ तोड़ने में लिवर की मदद करते हैं. इससे लिवर में फैट जमने का चांस कम होता है. अगर फैट पहले से ही जमा है. तब ब्लैक कॉफी इस फैट को धीरे-धीरे कम करने में मदद करती है.
एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर के सेल्स को नुकसान से भी बचाते हैं. इससे लिवर अपना काम सही तरह कर पाता है. जिसमें फैट को प्रोसेस करना और टॉक्सिंस को बाहर निकालना भी शामिल है.
ब्लैक कॉफी पीने से लिवर में मौजूद एंज़ाइम्स का लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है. लिवर एंजाइम खास तरह के प्रोटीन हैं. जो लिवर में केमिकल रिएक्शन्स पैदा करते हैं. जब लिवर में सूजन आती है या दबाव पड़ता है. तब SGPT जैसे एंज़ाइम्स ज़्यादा मात्रा में खून में रिलीज़ होते हैं. लेकिन ब्लैक कॉफी लिवर के सेल्स को सपोर्ट करती है. इससे एंज़ाइम्स कम मात्रा में रिलीज़ होते हैं. ये इस बात का इशारा है कि लिवर पर सूजन और दबाव कम हो रहा है. लिवर बेहतर काम कर रहा है.

कॉफी में कैफीन होता है. जब शरीर इसे पचाता है, तो Paraxanthine नाम का केमिकल बनता है. ये केमिकल लिवर में स्कार टिशूज़ को कम करता है.
देखिए, जब लिवर खराब होना शुरू होता है. तब उसमें स्कार टिशूज़ बनने लगते हैं. ये स्कार टिशूज़ लिवर के हेल्दी टिशूज़ की जगह ले लेते हैं. फिर हेल्दी टिशूज़ न होने की वजह से लिवर सही तरह काम नहीं कर पाता. ख़राब होने लगता है. लेकिन, कॉफी स्कार टिशूज़ बनने की प्रक्रिया को धीमा करती है. उन्हें बढ़ने से भी रोकती है. इससे लिवर कैंसर, लिवर सिरोसिस और नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर का रिस्क घटता है.
आप एक दिन में दो ब्लैक कॉफी पी सकते हैं. लेकिन सिर्फ ब्लैक कॉफी से फैटी लिवर ठीक नहीं होगा. आपको अपनी डाइट सुधारनी होगी. एक हेल्दी वज़न मेंटेन करना होगा. और, शराब व ज़्यादा फैट वाली चीज़ों से परहेज़ करना होगा. साथ ही, डॉक्टर ने जो दवाइयां दी हैं. उन्हें टाइम पर लेना होगा.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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