पड़ताल: क्या रायटर्स ने बालाकोट की इमारत में लाशें होने की बात कही है?
रॉयटर्स के पत्रकार बिल्डिंग के पास थे...
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एक होती है इंफेंटरी, आर्मी वाली. ये जंगी मोर्चे पर देश के लिए लड़ती है. और एक होती है सोशल मीडिया इंफेंटरी. ये सोशल मीडिया पर लड़ती है. फर्क इतना है कि ये देश को मज़बूत बनाने के बजाए, रोज़ झूठ ठेलकर कमज़ोर करती हैं. ताजा झूठ है बालाकोट में मारे गए आतंकियों के बारे में. इस झूठ को सच दिखाने के लिए न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट का सहारा लिया जा रहा है. हमने पूरी पड़ताल की है. देखिए वीडियो.
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