The Lallantop
Logo
लल्लनटॉप का चैनलJOINकरें

तमिलनाडु से हिंदी बोलने वालों को बाहर निकालने का सच ये निकला!

सोशल मीडिया पर अखबार की कटिंग वायरल है.

post-main-image
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर.
दावा

सोशल मीडिया पर 'दैनिक जागरण' अखबार की एक कथित ख़बर का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है. पहली नज़र में देखने पर ये स्क्रीनशॉट 'दैनिक जागरण' अखबार की कटिंग लग रहा है. कटिंग के बाईं ओर दैनिक जागरण का लोगो है तो दाईं तरफ लखनऊ लिखा हुआ है. इस कथित ख़बर की हेडिंग है,

तमिलनाडु में हिंदी मजदूरों को जान से मार दिया जा रहा है.

सोशल मीडिया पर वायरल अखबार कटिंग.

आगे इस कथित ख़बर में लिखा है, 

तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन का कहना है कि हिंदी वाले यहां से जा सकते हैं. तमिलनाडु सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी. तमिल में तमिल पर्सन ही वर्क करेगा.

साथ ही इस कथित ख़बर में यूपी के योगी आदित्यनाथ के बयान का भी जिक्र है. बयान में लिखा है कि योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रवासी मजदूरों से अपने-अपने राज्यों में लौटने की अपील की है.

पड़ताल

'दी लल्लनटॉप' ने वायरल कटिंग का सच जानने के लिए पड़ताल की. हमारी पड़ताल में वायरल कटिंग एडिटेड निकली और इसे एक ऐप के जरिए बनाया गया है.

वायरल कटिंग को गौर से देखने पर बीचों-बीच 'News Banner Maker' का वॉटरमार्क दिखाई देता है. सर्च से हमें पता चला कि यह एक एडिटिंग ऐप है जो प्लेस्टोर पर मौजूद है. इस ऐप की मदद से ऑनलाइन किसी भी अखबार की कटिंग बनाई जा सकती है. 
इसके बाद हमने इंटरनेट पर वायरल ख़बर के बारे में सर्च शुरू की. सर्च से हमें एक भी ऐसी विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली जो वायरल कटिंग के सच होने की पुष्टि करती हो. 
दैनिक जागरण की तरफ से ऐसी किसी भी ख़बर को प्रकाशित करने का खंडन किया गया है. दैनिक जागरण ने अपने बयान में कहा कि दैनिक जागरण के लोगो का गलत इस्तेमाल कर फेक न्यूज को फैलाने की कोशिश की जा रही है. जागरण में ऐसी कोई खबर प्रकाशित नहीं हुई है.

तमिलनाडु सीएम-डीजीपी का बयान

प्रवासी मजदूरों पर हमले के वायरल वीडियो और ख़बरों पर राज्य के पुलिस महानिदेशक शैलेन्द्र बाबू ने 2 मार्च को एक वीडियो के जरिए बयान जारी किया था. बयान में डीजीपी ने ऐसी किसी भी अफवाह पर यकीन न करने की बात कही थी. उनका कहना था कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रवासी मजदूरों पर अफवाह फैलाने वालों को देशविरोधी बताया है.

नतीजा

'दी लल्लनटॉप' की पड़ताल में वायरल दावा गलत साबित हुआ. अखबार की वायरल कटिंग एडिटेड है और इसका दैनिक जागरण से कोई संबंध नहीं है. साथ ही इसमें छपी जानकारी भी गलत है. तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने प्रवासी मजदूरों के लिए तमिलनाडु छोड़ने जैसी कोई बात नहीं कही है.

पड़ताल की वॉट्सऐप हेल्पलाइन से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

ट्विटर और फेसबुक पर फॉलो करने के लिए ट्विटर लिंक और फेसबुक लिंक पर क्लिक करें. 

वीडियो: तमिलनाडु में काम कर रहे मजदूरों ने हिंसा का क्या सच बताया?