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पड़ताल: क्या रॉयटर्स ने बालाकोट की बिल्डिंग में लाशें होने की बात कही है?

रॉयटर्स के पत्रकार बिल्डिंग के पास थे...

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ये तस्वीर रॉयटर्स ने छापी है. इसे जैश-ए-मोहम्मद का मदरसा बताया जा रहा है. भारत ने इसे तबाह करने का दावा किया था. इसे के बारे में रॉयटर्स का नाम लेकर सोशल मीडिया पर झूठ ठेला जा रहा है
एक होती है इंफेंटरी, आर्मी वाली. ये जंगी मोर्चे पर देश के लिए लड़ती है. और एक होती है सोशल मीडिया इंफेंटरी. ये सोशल मीडिया पर लड़ती है. फर्क इतना है कि ये देश को मज़बूत बनाने के बजाए, रोज़ झूठ ठेलकर कमज़ोर करती हैं. ताजा झूठ है बालाकोट में मारे गए आतंकियों के बारे में. इस झूठ का शिकार बनी इंटरनैशनल न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट. इस रिपोर्ट को गलत तरीके से पेश करके झूठ फैलाया जा रहा है.
पहले दावा जान लीजिए. दावा है कि
'दुनियां की सबसे बड़ी न्यूज़ एजेन्सी राईटर ने कहा है की बालाकोट मे इतनी लाशे है की हमे 9दिन बाद भी वहा जाने से रोक रही है पाक सरकार'
राहुल पोखरिया ने ये झूठ कई ग्रुप्स में फैलाया है. इस झूठ को डेढ़ हज़ार से ज्यादा लोग शेयर कर चुके हैं.
राहुल पोखरिया ने ये झूठ कई ग्रुप्स में फैलाया है. इस झूठ को डेढ़ हज़ार से ज्यादा लोग शेयर कर चुके हैं.

एक नहीं, कई जगहों पर ये झूठ फैलाया गया है. इस झूठ पर तीन हज़ार लोगों ने रिएक्ट किया है.
कई और ग्रुप्स भी हैं जहां इसे शेयर किया गया है. यहां भी इसे क़रीब डेढ़ हज़ार बार शेयर किया गया है.
कई और ग्रुप्स भी हैं जहां इसे शेयर किया गया है. यहां भी इसे क़रीब डेढ़ हज़ार बार शेयर किया गया है.

सच क्या है? न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने इस संबंध में दो खबरें पब्लिश की हैं. पहली 7 मार्च
 को और दूसरी 9 मार्च
को. 7 मार्च की रिपोर्ट में लिखा है कि
रॉयटर्स की टीम को बालाकोट के जाबा इलाके में उस बिल्डिंग का दौरा करने से रोका जा रहा है, जिसे भारत सरकार आतंकियों का ट्रेनिंग कैंप बता रही है.
लेकिन, 7 मार्च की रिपोर्ट में कहीं भी जिक्र नहीं है कि उस बिल्डिंग में लाशें हैं. इस रिपोर्ट में भारत के विदेश सचिव विजय गोखले के बयान का जिक्र है. गोखले ने कहा था-
इस हमले में बड़ी संख्या में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी, ट्रेनर, सीनियर कमांडर और जिहादी मारे गए हैं.
9 मार्च को पब्लिश खबर में भी रॉयटर्स ने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का बयान छापा है. जिसमें उन्होंने कहा है कि
पाकिस्तान के पास छिपाने के लिए काफी कुछ है. इसीलिए वो पत्रकारों को जाने से रोक रहा है.
लेकिन इस रिपोर्ट में भी रॉयटर्स ने अपनी ओर से कुछ नहीं कहा.
असल में क्या लिखा रॉयटर्स ने 7 मार्च को छपी रिपोर्ट में रॉयटर्स ने लिखा है कि
9 दिन में तीसरी बार है, जब रॉयटर्स के रिपोर्टर्स को जबा के इलाके में जाने से रोका गया है. रॉयटर्स टीम इस बिल्डिंग को 100 मीटर की दूरी से ही देख पाई है. इस बिल्डिंग के आस-पास लगे चीड़ के पेड़ों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. और किसी भी तरह के डैमेज का कोई निशान नहीं दिख रहा. 6 मार्च, बुधवार को रॉयटर्स को मिली सैटेलाइट फोटोज़ के हिसाब से दिखता है कि मदरसे (बिल्डिंग) में अप्रैल 2018 से अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है.
रॉयटर्स ने एक ग्रामीण के हवाले से कहा है कि जून 2018 में ये मदरसा बंद हो गया था. इससे पहले रॉयटर्स की टीम को कई लोकल लोगों ने बताया था कि इस मदरसे को जैश-ए-मोहम्मद चलाता था. इस बिल्डिंग के पास एक साइन बोर्ड भी लगा था, जो अब नहीं है.
इसी बिल्डिंग को जैश-ए-मोहम्मद का ट्रेनिंग कैंप बताया जा रहा है.
इसी बिल्डिंग को जैश-ए-मोहम्मद का ट्रेनिंग कैंप बताया जा रहा है.

सो सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा-
'दुनियां की सबसे बड़ी न्यूज़ एजेन्सी राईटर ने कहा है की बालाकोट मे इतनी लाशे है की हमे 9दिन बाद भी वहा जाने से रोक रही है पाक सरकार'
झूठ निकला.
कुल मिलाकर 2 बातें हैं:  1. ये सच है कि रॉयटर्स के पत्रकारों को उस बिल्डिंग में नहीं जाने दिया गया 2. लेकिन रॉयटर्स ने ये कभी नहीं कहा कि उस बिल्डिंग में लाशें हैं
रॉयटर्स ने ऐसा नहीं कहा. ये भारतीय सरकार की ओर से जारी बयान था. इसे सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और अब रॉयटर्स की रिपोर्ट बताकर फैलाया जा रहा है.
अगर आपको कोई ऐसी खबर पर शक हो, तो हमें ई-मेल कीजिए. हम उसकी पड़ताल करेंगे. ईमेल आईडी है- padtaalmail@gmail.com


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