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फिल्म स्टार की औलादें होने के अलावा इन एक्टर्स में कौन सी खूबी है?

जिन एक्टर्स को अपने दम पर कोई न पूछे उन्हें करण जौहर स्टार बनाने में लगे हैं.

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फोटो - thelallantop

यह लेख डेली ओ से लिया गया है, जिसे भास्कर चावला ने लिखा है.   दी लल्लनटॉप के लिए हिंदी में यहां प्रस्तुत कर रही हैं शिप्रा किरण.

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एक साल होने को हैं जब कंगना रनौत ने नेपोटिज़्म (जिसमें अपने रिश्तेदारों, दोस्तों या जान-पहचान वालों को ही काम दिया जाता है या सिर्फ़ उनका प्रचार किया जाता है) वाली बहस शुरू की थी. अब भी ‘नेपोटिज्म का बादशाह’ एक ही है. वो हैं- करण जौहर.

करण जौहर और नेपोटिज़्म को लेकर सोशल मीडिया पर खूब बहसें हुईं, बातें हुईं. जौहर की खिल्ली भी खूब उड़ी. जब-जब जौहर अपनी कोई नई फिल्म शुरू करते या अपनी आने वाली फिल्म से जुड़ी कोई भी अनाउंसमेंट या प्रचार-प्रसार करते हैं, सोशल मीडिया पर उनका खूब मज़ाक उड़ाया जाता. उनपर नेपोटिज़्म का आरोप कोई गलत भी नहीं है. बल्कि ये आरोप तब-तब और भी मजबूत हो जाता, जब-जब वो अपनी फिल्मों में सिर्फ बॉलीवुड के अभिनेताओं के बच्चों यानी स्टार किड्स को ही मुख्य भूमिकाओं में लेते हैं. और सिर्फ एक ही बार नहीं बल्कि बार-बार वो उन्हें अपनी फिल्मों में लेते हैं. 

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दो साल पहले करण जौहर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि असल में सिनेमा के दर्शक ही नहीं चाहते कि नए लोगों को फिल्मों में मौक़ा दिया जाए. कंगना के नेपोटिज़्म वाले आरोप पर करण ने बड़े गुस्से में कहा कि कंगना औरत होने का फायदा न उठाएं और औरत होने के नाम पर लोगों पर आरोप लगाना बंद करें. अगर उन्हें यही सब करना है, तो इंडस्ट्री छोड़कर चली जाएं. बाद में जौहर ने अपने बचाव में एक कॉलम भी लिखा. इन सारी बातों से जौहर की सामंती सोच ज़ाहिर होती है. और ये भी पता चलता है कि प्रतिभा या टैलेंट उनके लिए कोई मायने नहीं रखती. ऐसी ही मूर्खतापूर्ण बयानों के कारण उन्हें माफी भी मांगनी पड़ी. लेकिन माफ़ी मांगने वाली पूरी घटना नाटक थी. तमाम विवादों या माफीनामे के बावजूद उनकी सामंती सोच में कोई बदलाव दिखाई नहीं पड़ता. पिछले वर्षों में जौहर ने स्टार्स के बच्चों से बात करने की पूरी कोशिश की है. जल्द ही टाइगर श्रॉफ उनकी फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ़ द इयर 2’ में मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे. ये भी एक योजना के तहत ही किया जा रहा है ताकि टाइगर की पहुंच मल्टी-स्क्रीन के दर्शकों तक हो सके.

‘ब्रह्मास्त्र’ का निर्माण भी करण जौहर ही कर रहे हैं. इसके निर्देशक हैं- अयान मुखर्जी. लीड रोल में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट हैं. कैमरे के सामने तो करण जौहर रहते ही हैं, कैमरे के पीछे भी उनका नेपोटिज़्म उतना ही हावी रहता है. dhadak 'धड़क' में बोनी कपूर-श्रीदेवी की बेटी और शाहिद कपूर के भाई को मुख्य रोल में रखने पर उन्होंने सफाई देते हुए ये बताया कि इन दोनों को इस फिल्म में रखने के पीछे सिर्फ़ एक ही कारण था, वो था- इनका टैलेंट. करण चाहे जो कह लें लेकिन इसके पीछे और कुछ नहीं सिर्फ और सिर्फ उनका नेपोटिज़्म ही था.

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अपनी किताब 'ऐन अनसूटेबल बॉय' के विमोचन के मौके पे करण जौहर ने बताया कि वो ‘कल हो न हो’ में प्रीति ज़िंटा की जगह करीना कपूर को लेना चाहते थे. लेकिन उन्होंने करीना को वो रोल इसलिए नहीं दिया क्योंकि करीना फिल्म के लिए शाहरुख़ खान जितने पैसे ही मांग रही थीं. करण हर जगह खुद को ऐसे दिखाते हैं, जैसे उनसे बड़ा आज़ाद ख्याल कोई नहीं. लेकिन जैसे उन्होंने ईक्वल पे (Equal Pay) जैसे मसले को नज़रअंदाज़ किया, उसी घटना से उनकी असलियत सामने आ जाती है. उससे साफ पता चलता है कि वे स्त्रीविरोध, जातिवाद (नेपोटिज़्म के प्रमुख तत्व) और श्रेष्ठता बोध से ग्रस्त हैं.

आज स्त्रीवाद के दौर में जब किसी भी तरह के असंवेदनशील बयानों या गलतबयानी पर हॉलीवुड को भी नहीं बख़्शा जाता, तो फिर बॉलीवुड को इसकी छूट कैसे मिल जाती है.

करण जौहर तो बस एक उदाहरण हैं. सलमान खान और संजय दत्त जैसे लोगों के फिल्मी जीवन में तो न जाने कितने गैर-कानूनी काम और अपराध दर्ज़ हैं. और स्त्री द्वेष से भरी न जाने कितनी ही और बातें भी दर्ज़ हैं. अपराध तो इनके साबित भी हो चुके हैं. लेकिन वे अब भी अपने करियर में खूब सफल हैं. सैफ़ अली खान की मूर्खतापूर्ण बातों या बयानों से भी उनके करियर पर कोई फर्क नहीं पड़ा. बहुत जल्द ही सब उस घटना को भूल भी गए.

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ऐसे लोग बॉलीवुड में सिर्फ़ सफल ही नहीं हैं बल्कि पूरी फिल्म-इंडस्ट्री को अपने वश में भी कर रखा है. बॉलीवुड दिखाता तो ऐसे है जैसे वे हर मामले में जनता की राय मानते हैं. असल में पूरा मामला इसके बिलकुल उलट है. ताकि हर चीज के लिए जनता को दोषी ठहरा कर खुद बचा जा सके. दर्शकों का इन सब बातों से कोई लेना-देना नहीं होता. सच तो ये है कि हमारे यानी आम दर्शक के नज़रिए पर ये कोई ध्यान ही नहीं देते. ये ऐसे दिखाते हैं कि जैसे जनता पर इन स्टार्स का इतना प्रभाव है कि उन्हें इनकी कोई गलती नज़र ही नहीं आती. करण जौहर चाहे जितनी भी ऊटपटांग और मूर्खतापूर्ण बातें कहें, सच तो ये है कि वे अब भी बॉलीवुड के सबसे बड़े फिल्म-निर्माता (फिल्म-प्रोड्यूसर) हैं.

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तमाम अपराधों के आरोपी साबित हो जाने के बाद आज भी सलमान खान बॉलीवुड के सुपरस्टार हैं. जैसे कि कोई आम आदमी इस सवाल का जवाब नहीं दे सकता कि आधुनिकता से पहले या पूर्व-आधुनिक समाज पर किसका अधिकार था? उसी तरह बॉलीवुड के दर्शकों को भी इस बात का बिलकुल अंदाज़ा नहीं है कि असल में इस इंडस्ट्री को कौन लोग अपने इशारे पर नचा रहे हैं.


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वीडियो देखें:  https://www.youtube.com/watch?v=UGajABfGTt8

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