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इन देशों में शादियों को लेकर बने कानून जानकर चकरा जाओगे

एक देश ऐसा है जहां कानूनी तौर पर मरे हुए इंसान से शादी की जा सकती है.

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दुनिया के कई देशों में शादी से जुड़े अजब-गजब कानून हैं.
हम आए दिन किसी न किसी देश के अजीबो-गरीब रीति-रिवाज़ के बारे में सुनते रहते हैं. रीति-रिवाज़ों का अजीब होना खास हैरानी पैदा नहीं करता. हैरानी होती है, जब हम ऐसे कानूनों के बारे में सुनते हैं जो हमारी समझ से बाहर होते हैं. दुनिया के कई देशों में शादियों को लेकर ऐसे ही कानून बने हुए हैं, जिन्हें सुनकर हैरानी होती है.
1. फ़्रांस में कानूनी तौर पर मरे हुए इंसान से शादी की जा सकती है
फ़्रांस के सिविल कोड के आर्टिकल 172 के तहत अगर शादी की फॉर्मैलिटीज़ पूरी करने के बाद पति-पत्नी में से किसी एक की मौत हो जाए तो ज़िंदा पार्टनर मरे हुए पार्टनर से कानूनी तौर पर शादी कर सकता है. ये तभी हो सकता है जब शादी की फॉर्मैलिटीज़ में मरे हुए पार्टनर की स्पष्ट सहमती ज़ाहिर होती हो. ऐसी शादियों को फ़्रांस के राष्ट्रपति ऑथराइज़ कर सकते हैं. लेकिन उन्हें इस शादी के पीछे कोई गंभीर कारण नज़र आना चाहिए.
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फ़्रांस में ये प्रैक्टिस प्रथम विश्व युद्ध से शुरू हुई थी.

इसे पॉस्चुमस मैरिज( posthumous marriage) यानी मर्णोपरांत शादी कहा जाता है. फ़्रांस में जिसे भी पॉस्चुमस मैरिज करनी हो वो राष्ट्रपति को एक अर्ज़ी भेजता है. अगर शादी की तैयारियां पहले से हो रखी थीं और मरने वाले के परिवार को इस शादी से कोई आपत्ती नहीं हो,  तो शादी की मंज़ूरी मिलने के चांसेज़ काफ़ी हाई रहते हैं. चार में से तीन अर्ज़ियों को स्वीकृति मिल ही जाती है.
2. अमेरिका के इन पांच राज्यों में शादी के लिए ज़रूरी नहीं कि दूल्हा-दुल्हन दोनों मौजूद हों 
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प्रॉक्सी मैरिज में दूल्ह या दुल्हन में से किसी एक के रहते भी शादी हो जाती है

अमेरिका के कुछ राज्यों में प्रॉक्सी मैरिज का चलन है. ये कॉलेज वाली प्रॉक्सी से अलग है. कॉलेज न जाओ और दोस्तों की लगाई प्रॉक्सी पकड़ में आ जाए तो दिक्कत हो जाती है. लेकिन अमेरिका के कंसास, कैलीफ़ोर्निया, कोलोराडो, टेक्सस और मोंटाना में प्रॉक्सी मैरिज का खौफ़ नहीं क्योंकि यहां इसे कानूनी मान्यता मिली हुई है. लेकिन अकेले शादी करके किसे खुशी मिलेगी? उनको, जिनके गर्लफ़्रेंड या बॉयफ़्रेंड मिलिटरी में हों. प्रॉक्सी मैरिज का नियम आर्म्ड फ़ॉर्सज़ में काम करने वालों के लिए ही है.
कैलिफ़ॉर्निया में प्रॉक्सी मैरिज के लिए ज़रूरी है कि साथी किसी युद्ध क्षेत्र में तैनात हो. मोंटाना वो अकेला राज्य है जहां दूल्हा-दुल्हन दोनों सिविल अथॉरिटी के सामने मौजूद न हों तब भी शादी हो जाती है.
3. सऊदी अरब के पुरुष इन चार देश की महिलाओं से शादी नहीं कर सकते
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सऊदी अरब में बाहरी लोगों की पॉपुलेशन और ज़्यादा न बढ़े इसके लिए ये कानून बनाया गया है.

ये देश हैं पाकिस्तान, बांग्लादेश, चाड और बर्मा. सऊदी अरब में लगभग पांच लाख महिलाएं इन्हीं देश की रह रही हैं. यहां बाहरी लोगों की पॉपुलेशन और ज़्यादा न बढ़े इसके लिए ये कानून बनाया गया है.
बीबीसी की एक खबर के मुताबिक इन देशों के अलावा अगर किसी सऊदी पुरुष को किसी और देश की महिला से शादी करनी हो, तो उस आदमी की इनकम 50 हज़ार रुपए से ज़्यादा होनी चाहिए. साथ ही उम्र 40 साल से 65 साल के बीच. वो गैर-सऊदी महिला कम से कम 25 साल की होनी चाहिए और दोनों की उम्र में 30 साल से ज़्यादा का अंतर नहीं होना चाहिए.
यदि किसी सऊदी महिला को गैर-सऊदी पुरुष से शादी करनी हो, तो उसकी उम्र 30 से 55 के बीच होनी चाहिए. साथ ही दोनों के उम्र में दस साल से ज़्यादा का अंतर नहीं होना चाहिए.
4. इन देशों में बच्चों की शादी गैरकानूनी नहीं
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अफ्रीका के कई देशों में बाल विवाह गैर-कानूनी नहीं है

शादी की ज़िम्मेदारियां निभाने के लिए पति-पत्नी को एक सेहतमंद शरीर और मन चाहिए होता है. इसलिए ज़्यादातर देशों में बाल विवाह की मनाही होती है. एक तय उम्र से पहले शादी को गैर-कानूनी माना जाता है. लेकिन यमन, सऊदी अरब और अफ्रीका के देश दक्षिण सूडान, इक्वेटोरियल गिनी, गाम्बिया और सोमालिया में बाल विवाह कानूनी तौर पर जायज़ है.
5. इस देश में कानूनी तौर पर तलाक़ नहीं मिलता
वेटिकन सिटी के अलावा फिलीपींस वो इकलौता देश है जहां तलाक के लिए कानून नहीं है. फिलीपींस में अपनी शादी से नाखुश लोगों के पास बहुत कम ऑपशन्स रहते हैं. अलग होने की चाहत रखने वाले पति-पत्नी कोर्ट में कानूनी रूप से अलग होने की अर्ज़ी डालकर अलग तो हो सकते हैं, लेकिन कानूनी तौर पर उनकी शादी खत्म नहीं होती. इस वजह से अलग हुए पति-पत्नी किसी और से शादी नहीं कर पाते. ऐसा इसलिए है क्योंकि फिलीपींस में कैथलिक चर्च का काफी प्रभाव है, जो तलाक को धर्म के खिलाफ मानता है.
फिलीपींस की आबादी में मुसलमानों का हिस्सा 5% है. ये लोग तलाक के मामले में कुछ लकी हैं. इनके तलाक़ के मामले मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आते हैं. मुसलमान अदालत जाकर भी तलाक ले सकते हैं. आदालत में उन्हें ये साबित करना होता है कि शादी 18 साल की उम्र से पहले हो गई थी. एक से ज़्यादा शादी के मामलों में भी अदालत से तलाक़ मिल जाता है.

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