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बिखारी भांत-भांत के: 'दो रुपिया दे दो, दुआ लगेगी'

अलग अलग किस्म के भिखारी भी दिखते हैं आस पास. आपको कौन से मिले हैं?

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Source: Reuters
कानपुर रेलवे स्टेशन पर एक कूल एटीट्यूडी भिखारी मिला था. जो ये सौदा कर रहा था. वो भी फुल कॉन्फिडेंस के साथ. तब लगा कि भिखारी भी एक प्रॉपर सिटीजन है देश का. उसको भी धंधा फैलाए रखने का उतना ही हक है जितना बाकी सबको. मजबूरी मेें गरीबी के चलते भीख मांगने वाले घट रहे हैं. उसकी जगह पढ़े लिखे लोग अब इस लाइन में आने लगे हैं. इसमें ढेर सा एडवेंचर और पइसा है. इसका नाम बदल कर कुछ भी रख लो अपने इंट्रेस्ट से. भीख, चंदा या बिजनेस भी कहते हैं कुछ लोग. भीख की सबसे बड़ी पहचान ये है कि सामने वाले को लालच या डर की भारी डोज दी जाती है.  लालच दुवाओं का भी हो सकता है. जिससे वो तुरंत अपनी अंटी ढीली करके चिल्लर चुआ देता है. यहां हैं वो कुछ तरीके जिनका इस्तेमाल करके यहां भीख मांगने के लिए किया जाता है.

वैदिक काल के भिखारी


मन्दिर या मस्जिद के बाहर फटे कपड़े पहन कर दुवाएं फेंकना सबसे साधारण और सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है. इसमें ज्यादा मेहनत नहीं बस सब्र करके बैठना पड़ता है.

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ग्राउंड लेवल भिखारी


कुछ भिखारी हाथ पैर भी चला लेते हैं. फटे कपड़े पहन कर रेलवे और बस स्टेशनों या चौराहों पर घूम घूम कर भीख मांगते हैं. ये खुद के जिस्म से भी लगातार प्रयोग करते हैं. कभी उंगलियां मोड़ कर. कभी पैर हाथ पर अजीब किस्म के केमिकल पोत कर. इस तरह थोड़ी मेहनत करके कमाने वाले कहते हैं कि इसमें बरकत होती है.

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भिखारी कम बिजनेसमैन


कुछ लोग भीख माँगने के लिए थोड़ा इन्वेस्टमेंट करने को बुरा नहीं समझते. वे किसी ठेला या ट्रॉली में कुछ धार्मिक तस्वीरें या चादर रखते हैं. एक म्यूजिक सिस्टम जिसमें कोई भजन या कव्वाली बजा कर गली गली घूम कर माल जमा करते हैं.


 

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असली भिखारी


कुछ शातिर किस्म के भिखारी अपंग बच्चों से भीख मंगवाते हैं. जबकि कुछ खुद के कटे फटे अंगों का सहारा लेकर या कुपोषित बच्चों को कन्धे से चिपका कर भीख माँगते हैं.


 


इनकी बीमारी ही भिखारी है


किसी अस्पताल से दिल में छेद वाला एक्स रे या कैन्सर के कागजात बनवा कर फन्ड जुटाना भी भीख माँगने का लेटेस्ट तरीका है. कभी कभी तो दिल में बेपनाह दर्द की एक्टिंग भी करते हैं.


 


दूर देस से आयो भिखारी


नॉर्थ इंडिया की किसी शहर में चलते हुए कोई चिपट कर मराठी या बंगाली में बात करने लगे. बताए कि किसी ने काम दिलाने के लिए बुलाया था. यहां आए तो धोखा दे दिया. सब पैसा वैसा कपड़ा लत्ता लेकर चला गया. पिलीज हेल्प मी. उसको हिंदी आती होगी लेकिन बोलेगा तुगलकी लैंग्वेज. समल्लो गुरू. लोचा है.


 


आपको पुण्य प्रसाद देने निकले भिखारी


मन्दिर या मस्जिद बनवाने के लिये चन्दा इकट्ठा  करना भीख मांगने का नुस्खा है. इसी कैटेगरी में उनको भी रख लीजिए जो माता के दरबार से निकली चिट्ठी लेकर चलते हैं. वो भगवान के पोस्टमैन बताते हैं कि जो दुनिया है सब ये चिट्ठी है. इसको 100 कॉपी अगर बंटवा दो तो आदमी बन जाओगे और फाड़ के फेंको बस तुम्हारा इकलौता लौंडा मरा धरा है.


 


इंसान से हनुमान


एक भिखारी टाइप होती है उन हुन्नरबाजों की जो रूप बदल लेते हैं. हनुमान जी या गब्बर सिंह बन कर टहलते हैं मार्केट में.


 


मौसमी भिखारी


देहातों में आते हैं कुछ भिखारी दर्द भरी दास्तान लेकर. कि उनके गांव में लग गई आग. सब जल कर खाक हो गया. अब आप ही उनका सहारा हो. बदले में गेंहूं चावल और कपड़े बोरियों में भर कर ले जाते हैं. खास बात कि ये फसलें कटने के बाद ही आते हैं.


 


माता के नहीं चंदा के भक्त हैं


आते हैं हर साल नवराते माता के. और उनके साथ आते हैं सो कॉल्ड भक्त भिखारी. उनको मेला लगवाना होता है. भंडारा कराना होता है. सड़क पर बैरिकेडिंग लगाकर चौचक धंधा चलता है. उसमें से फोट्टी परसेंट माता का बाकी अपना.


 


धंधा वही अंदाज नया


मल्टी लेवल मार्केटिंग के नाम पर चिट फण्ड कम्पनियों के साथ मिलकर दोस्तों और रिश्तेदारों को चूना लगाना वही भीख मांगने का तरीका है. बस ये वाला थोड़ा व्हाइट कॉलर है यू नो.


 


सॉफिस्टिकेटेड भिखारी


दिल्ली स्टेशन पर इस बार ऐसे 2 भिखारी मुझे मिले. एक अंकल अच्छे भले कपड़े पहने आए. बोले मैं किसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हूं. बैग चोरी हो गया. पर्स पैसा सब उसमें था. आप न एक 50 रुपए की मदद कर दो. और अपना नंबर दे दो. मैं इस रुपए का रिचार्ज करा दूंगा. मैं नया था. दे दिए 50 रुपए. ये खेल तब खुला जब 5 मिनट बाद वैसा ही एक और केस सामने आकर खड़ा हो गया. ये तो वही व्हाट्सऐप वाला हो गया कि मार्केट में नया है फॉरवर्ड करो.


  आप कोई जिल्लाटॉप भिखारी झेले हों तो बताओ न इधर.


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