वैदिक काल के भिखारी
मन्दिर या मस्जिद के बाहर फटे कपड़े पहन कर दुवाएं फेंकना सबसे साधारण और सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है. इसमें ज्यादा मेहनत नहीं बस सब्र करके बैठना पड़ता है.

मन्दिर या मस्जिद के बाहर फटे कपड़े पहन कर दुवाएं फेंकना सबसे साधारण और सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है. इसमें ज्यादा मेहनत नहीं बस सब्र करके बैठना पड़ता है.

कुछ भिखारी हाथ पैर भी चला लेते हैं. फटे कपड़े पहन कर रेलवे और बस स्टेशनों या चौराहों पर घूम घूम कर भीख मांगते हैं. ये खुद के जिस्म से भी लगातार प्रयोग करते हैं. कभी उंगलियां मोड़ कर. कभी पैर हाथ पर अजीब किस्म के केमिकल पोत कर. इस तरह थोड़ी मेहनत करके कमाने वाले कहते हैं कि इसमें बरकत होती है.
कुछ लोग भीख माँगने के लिए थोड़ा इन्वेस्टमेंट करने को बुरा नहीं समझते. वे किसी ठेला या ट्रॉली में कुछ धार्मिक तस्वीरें या चादर रखते हैं. एक म्यूजिक सिस्टम जिसमें कोई भजन या कव्वाली बजा कर गली गली घूम कर माल जमा करते हैं.
कुछ शातिर किस्म के भिखारी अपंग बच्चों से भीख मंगवाते हैं. जबकि कुछ खुद के कटे फटे अंगों का सहारा लेकर या कुपोषित बच्चों को कन्धे से चिपका कर भीख माँगते हैं.
किसी अस्पताल से दिल में छेद वाला एक्स रे या कैन्सर के कागजात बनवा कर फन्ड जुटाना भी भीख माँगने का लेटेस्ट तरीका है. कभी कभी तो दिल में बेपनाह दर्द की एक्टिंग भी करते हैं.
नॉर्थ इंडिया की किसी शहर में चलते हुए कोई चिपट कर मराठी या बंगाली में बात करने लगे. बताए कि किसी ने काम दिलाने के लिए बुलाया था. यहां आए तो धोखा दे दिया. सब पैसा वैसा कपड़ा लत्ता लेकर चला गया. पिलीज हेल्प मी. उसको हिंदी आती होगी लेकिन बोलेगा तुगलकी लैंग्वेज. समल्लो गुरू. लोचा है.
मन्दिर या मस्जिद बनवाने के लिये चन्दा इकट्ठा करना भीख मांगने का नुस्खा है. इसी कैटेगरी में उनको भी रख लीजिए जो माता के दरबार से निकली चिट्ठी लेकर चलते हैं. वो भगवान के पोस्टमैन बताते हैं कि जो दुनिया है सब ये चिट्ठी है. इसको 100 कॉपी अगर बंटवा दो तो आदमी बन जाओगे और फाड़ के फेंको बस तुम्हारा इकलौता लौंडा मरा धरा है.
एक भिखारी टाइप होती है उन हुन्नरबाजों की जो रूप बदल लेते हैं. हनुमान जी या गब्बर सिंह बन कर टहलते हैं मार्केट में.
देहातों में आते हैं कुछ भिखारी दर्द भरी दास्तान लेकर. कि उनके गांव में लग गई आग. सब जल कर खाक हो गया. अब आप ही उनका सहारा हो. बदले में गेंहूं चावल और कपड़े बोरियों में भर कर ले जाते हैं. खास बात कि ये फसलें कटने के बाद ही आते हैं.
आते हैं हर साल नवराते माता के. और उनके साथ आते हैं सो कॉल्ड भक्त भिखारी. उनको मेला लगवाना होता है. भंडारा कराना होता है. सड़क पर बैरिकेडिंग लगाकर चौचक धंधा चलता है. उसमें से फोट्टी परसेंट माता का बाकी अपना.
मल्टी लेवल मार्केटिंग के नाम पर चिट फण्ड कम्पनियों के साथ मिलकर दोस्तों और रिश्तेदारों को चूना लगाना वही भीख मांगने का तरीका है. बस ये वाला थोड़ा व्हाइट कॉलर है यू नो.
दिल्ली स्टेशन पर इस बार ऐसे 2 भिखारी मुझे मिले. एक अंकल अच्छे भले कपड़े पहने आए. बोले मैं किसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हूं. बैग चोरी हो गया. पर्स पैसा सब उसमें था. आप न एक 50 रुपए की मदद कर दो. और अपना नंबर दे दो. मैं इस रुपए का रिचार्ज करा दूंगा. मैं नया था. दे दिए 50 रुपए. ये खेल तब खुला जब 5 मिनट बाद वैसा ही एक और केस सामने आकर खड़ा हो गया. ये तो वही व्हाट्सऐप वाला हो गया कि मार्केट में नया है फॉरवर्ड करो.