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सैलरी बढ़ती तो है लेकिन बचती नहीं, ये 3 काम सब ठीक कर देंगे

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ ज्यादा कमाना ही अमीर बनने का रास्ता नहीं है, बल्कि कमाई में से कितना बचाया और कहां निवेश किया यही असली कला है. ज्यादातर लोग पहले खर्च करते हैं और फिर जो बच जाए उसे सेविंग मान लेते हैं, जबकि यही सबसे बड़ी गलती है.

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अच्छी तनख्वाह होने के बावजूद भी कई लोग पैसे बचा नहीं पाते हैं. (फोटो क्रेडिट: Business Today)

हर साल सैलरी बढ़ती है, लेकिन अकाउंट बैलेंस वही का वही रहता है. ऐसी शिकायत बहुत लोगों की होती है. इसकी कई वजहें हैं. लाइफस्टाइल पर बढ़ता खर्च, बिना प्लान खर्च, लोन की बढ़ती किस्तें (EMI) और फालतू की शॉपिंग. यानी जो मन किया वो खरीद लिया वाली आदत. नतीजन कमाई बढ़ने के बावजूद महीने के आखिर तक बैंक बैलेंस लगभग खाली हो जाता है.

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फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ ज्यादा कमाना ही अमीर बनने का रास्ता नहीं है, बल्कि कमाई में से कितना बचाया और कहां निवेश किया यही असली कला है. ज्यादातर लोग पहले खर्च करते हैं और फिर जो बच जाए उसे सेविंग मान लेते हैं, जबकि यही सबसे बड़ी गलती है. आइए जानते हैं कि महीने की सैलरी खाते में आते ही कैसे 3 सिंपल स्टेप्स अपनाकर आप अपनी सेविंग को बढ़ा सकते हैं.

पहले बचत करें फिर खर्च

आमतौर पर अच्छी तनख्वाह होने के बावजूद भी कई लोग पैसे बचा नहीं पाते हैं. दुनिया के मशहूर निवेशक वॉरेन बफे का कहना है कि आपको अपनी कमाई में से हमेशा कुछ पैसे बचत के लिए अलग रखने चाहिए. बफे कहते हैं, “खर्च के बाद जो बचे उसे सेव (बचत) मत करो, पहले सेव करो फिर खर्च करो.”

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उदाहरण के लिए, आपकी सैलरी 50 हजार हर महीने है. अभी आप घर का किराया भरने, बच्चों की फीस, ग्रॉसरी और घूमने-फिरने में खर्च कर देते हैं और महीने के आखिर में आपके खाते में सिर्फ 1000-2000 रुपये बचते हैं. वॉरेन बफे का नियम कहता है कि पहले बचत करें, फिर खर्च करें.

आप सैलरी आते ही 5000-10 हजार रुपये अलग निकाल लीजिए. आप इस पैसे को कहीं निवेश करना शुरू कर सकते हैं. मसलन, म्यूचुअल फंड, रिकरिंग डिपॉजिट या सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये किसी दूसरी स्कीम्स में निवेश की शुरुआत करना. इस तरह आप पहले बचत करते हैं और फिर बची हुई राशि खर्च करते हैं. यह तरीका आपको अपने बजट को बेहतर ढंग से मैनेज करने और फालतू के खर्च कम करने में मदद करेगा.

'Pay Yourself First' वाला तरीका अपनाएं

निवेश सलाहकार विनोद रावल लल्लनटॉप से बातचीत में सलाह देते हुए कहते हैं, “सैलरी आते ही 20–30% अलग निकालो. पहले बचत/निवेश को तरजीह दो, फिर बाकी खर्च. शुरू में आप सैलरी से 10-20% निकाल सकते हैं. इसके बाद लक्ष्य के हिसाब से यह रकम 20-30% तक की जा सकती है. 80/20 के नियम का भी पालन किया जा सकता है. यह पैसे बचाने का बेहद आसान तरीका है.” 

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विनोद रावल आगे कहते हैं, “कमाई का 20% हिस्सा सबसे पहले बचत या निवेश में डालें और बाकी 80% से घर खर्च, बिल, EMI और बाकी जरूरतें पूरी करें. यानी सैलरी आते ही पहले अपनी सेविंग्स अलग कर दें, फिर खर्च करें. इससे हर महीने कुछ पैसा जरूर बचता है और जो रकम बचत के लिए रखी गई है, उसे फालतू खर्च करने की संभावना भी कम हो जाती है.”

दो बैंक अकाउंट थ्योरी अपनाएं

दिल्ली यूनिवर्सिटी के माता सुंदरी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर सिद्वार्थ राठौर बताते हैं कि पर्सनल फाइनेंस में 2-अकाउंट थ्योरी (Two-Account Rule) पैसे बचाने और खर्च को कंट्रोल करने का आसान तरीका माना जाता है. इसमें आप दो अलग-अलग बैंक अकाउंट रख सकते हैं. पहला अकाउंट सैलरी, सेविंग्स, SIP और इमरजेंसी फंड के लिए होता है, जबकि दूसरा अकाउंट रोजमर्रा के खर्च जैसे किराया, बिल, ग्रॉसरी, ट्रैवल और शॉपिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है. 

सैलरी आते ही पहले बचत या निवेश की रकम अलग रखी जाती है और फिर तय बजट दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है. इससे अनाश-शनाप खर्च पर लगाम लगती है. यह तरीका आपको निवेश के मामले में अनुशासित बनाता है क्योंकि खर्च वाला अकाउंट खाली होने लगे तो आप खुद कंट्रोल करने लगते हैं. 

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