1. सलमान का 'फन्नी लैंग्वैज' अवतार
सुल्तान की प्रेम कहानी में पहलवानी ही नहीं है. इसमें हरियाणवी पहलवान की 'फन्नी' इंग्लिश वाला तड़का है. यह लोकप्रिय हिन्दी सिनेमा की परंपरा में है. हमारे सिनेमा के हीरो पहले भी देसी अवतार में अंग्रेज़ी की खटिया खड़ी करते नज़र आए हैं. बच्चन साब ने 'नमक हलाल' में इसको अपने पोकर फेस से अमर बना दिया था.
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वैसे यह भी सच है कि फिल्म का यही हिस्सा सबसे नकली अौर सबसे बनावटी लग रहा है. कॉमेडी फूहड़ लग रही है. अनुष्का रोल में अनफिट लगती हैं. देखें, अपने अभिनय से वो इस मिसमैच को जीत पाती हैं या नहीं.
2. दूसरे हिस्से में दिल्ली की छवियां
'सुल्तान' की कहानी जब 'वापसी' की राह पर निकलती है तो वापस लड़ने को खड़ा नायक दिल्ली की धरा पर खड़ा होता है. अग्रसेन की बावड़ी, जामा मस्जिद के गुंबद, इंडिया गेट के एरियल शॉट ट्रेलर में कौतुहल भरी छवियां रचते हैं. यही दिल्ली की धरा पर अकेले खड़े नायक की छवि उम्मीद जगाती है, कि शायद यह टिपिकल 'सलमान' फिल्म ना हो. क्योंकि यशराज ने जब पिछली बार ऐसे ही एक महानायक के साथ 'हारे हीरो के फिर जीतने की कहानी' दिल्ली की धरा पर फिल्माई थी, तो हमें 'चक दे! इंडिया' मिली थी.
3. रणदीप हुड्डा अौर सलमान की हरियाणवी कैमिस्ट्री
ट्रेलर के सबसे गजब के हिस्से वो हैं जहां कोच की भूमिका में रणदीप हुड्डा हरियाणवी पहलवान बने सलमान से टकराते हैं.
असल हरियाणवी हुड्डा परदे पर हरियाणवी पहलवान बने हीरो को रद्दा मार सुधार रहे हैं.
वैसे मैं तो इस संभावना से ही प्रसन्न हूं कि दोनों फिर स्क्रीन शेयर करेंगे. रणदीप वो धांसू अभिनेता हैं, जो चलती पिक्चर में सामने खड़े हों तो सुपरस्टार के भीतर के अभिनेता को भी जिला देते हैं. 'किक' वाले सलमान का 'सात समन्दर पार' डांस इसकी जीती जागती मिसाल है.
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4. तराशी नायकीय छवि का मिथक, क्या टूटेगा?
लेकिन पूरे ट्रेलर में सबसे स्ट्राइकिंग छवि बेडौल शरीर को आदमकद शीशे में निहारते सुल्तान की छवि है. अगर आप इस छवि में खुद सलमान की छवि देखें तो यह कमाल का मैटा-नैरेटिव है. नायक सलमान इस समय अपनी लोकप्रियता के शिखर पर हैं. लेकिन दूसरी सच्चाई ये भी है कि वो उमर के पचास बसंत पार कर चुके हैं. प्रकृति की घड़ी उनके खिलाफ़ है.

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अौर इसी के बीच उनकी तराशी हुई नायकीय छवि है. नयनाभिराम, सुडौल, सपनीली. कहते हैं इस छवि पर इंडस्ट्री के हज़ारों करोड़ रुपए अौर सैंकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी टिकी है. फिर उनकी पिछली फिल्मों पर कंप्यूटर ग्राफिक्स से हीरो की यही 'तराशी छवि' बनाने के आरोप भी लगते रहे हैं. ऐसे में फिक्शन ही सही, अगर सत्तर एमएम पर इस छवि का विलोम दिखता है तो डर है कि कहीं वो मेहनत से कमाए भरम के परदे को भंग ना कर दे.
यह खतरा है, इसीलिए यह हिम्मत भी है. क्या 'सुल्तान' के खुरदुरेपन में ऐसी हिम्मत दिखेगी? सच ये है कि 'सुल्तान' नायक के अवसान की कथा सुनाते हुए गर पल भर को भी स्टार की इस 'तराशी हुई' छवि पर टिप्पणी कर दे, तो यह फिल्म के सौ, पांच सौ करोड़ कमाने से भी बड़ा कमाल होगा.
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