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'बैरण' गाने की अनसुनी कहानी: कैसे दो भाइयों ने डेढ़ साल में बनाया सबसे ऑफबीट हरियाणवी गाना?

इंडियन बिलबोर्ड पर ये हफ्तों तक नंबर 1 रैंक पर रहा. ‘बैरण’ ये ऐसा करने वाला पहला हरियाणवी गाना है.

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'बैरण' को बनाने में 50 हजार रुपये खर्च हुए हैं.

बैरण. ये सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के दिलों में छुपी एक चुभन है. एक ऐसी चुभन, जो वक्त के साथ कम नहीं होती, बस एक आदत बन जाती है. ऊपरी नज़रों से देखें तो ये धुनों से सजी एक शिकायत है. मगर जब शिकायत में इतनी सादगी हो, तो वो किसी प्रेम पत्र से कम नहीं लगती. देखा जाए तो ये सादगी ही 'बैरण' की असली पहचान है. लेकिन ये पहचान बनी कैसे, आइए जानते हैं.

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हरियाणा का ज़िक्र होते ही लोग मन में एक खास तरह की इमेज बना लेते हैं. एक रफ-टफ इमेज. मगर 'बैरण' जैसा गाना, उस छवि को तोड़ने का काम करता है. इसने लोगों को बताया कि यदि दिल इज़हार करने पर उतरे, तो भाषा, क्षेत्र और समुदाय से कुछ खास फ़र्क नहीं पड़ता. तभी तो जब भिवानी के संडवा गांव में रहने वाले दो चचेरे भाई ये कहते हैं कि "खोया रहूं याद तेरी कर क नादानियां, बटुवे में राखूं तेरी सांभ के निशानियां"- तो उन्हें सुन रहे देश के प्रेमी भी रिलेट कर जाते हैं.

'बैरण' को फरवरी 2026 में यूट्यूब पर रिलीज़ किया गया था. इसे गढ़ने का क्रेडिट सुमित और अनुज को जाता है. दोनों रिश्ते में एक-दूसरे के चचेरे भाई हैं. गाने में आप जो आवाज़ सुन रहे हैं, वो अनुज की है. वहीं इसका पॉप-इंस्पायर्ड फील गुड म्यूजिक को सुमित ने तैयार किया है. वैसे, तो दोनों भाई बचपन से ही गाने गाते आए हैं. मगर कोविड लॉकडाउन के वक्त उन्होंने इस पर प्रोफेशनली सोच-विचार करना शुरू किया था. इस काम में उनके पैरेंट्स ने भी उनका पूरा साथ दिया. पर जैसा कि अक्सर होता है, आसपास के लोगों ने उन्हें टोकना शुरू कर दिया. लोग उन्हें स्टेबल करियर ऑप्शंस देखने को कहते, जो उनके हिसाब से म्यूजिक में तो बिल्कुल नहीं था.

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सुमित का जन्म 20 अप्रैल 1998 में हुआ है. उनके पिता टीचर हैं. उन्होंने हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से बीटेक (एग्रीकल्चर) की पढ़ाई की है. दूसरी तरफ अनुज 30 अगस्त 2002 को पैदा हुए थे. उनके पिता भी टीचर हैं. अनुज वैसे तो शुरू से ही सिंगर बनना चाहते थे. मगर घर के माहौल के कारण उन्हें पढ़ाई के साथ बैलेंस बनाकर चलना पड़ता था. उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में एमए किया है. साथ ही नेट का एग्जाम भी क्लियर कर चुके हैं. एक वक्त पर वो सरकारी एग्जाम्स की तैयारी भी कर रहे थे. मगर जब वहां कुछ खास खिचड़ी नहीं पकी, तो उन्होंने म्यूजिक की तरफ रुख कर लिया.

कोविड के दौरान, जब पूरी दुनिया घरों में बंद थी, सुमित और अनुज ने अपने म्यूजिक का काम चालू किया. उन्हें कोई गाइड करने वाला नहीं था. उन्होंने संगीत की कोई ट्रेनिंग भी नहीं ली है. इसलिए वो जो करते, आपसी समझ से ही करते. अब जब दोनों प्रोफेशनली म्यूजिक की तरफ बढ़ने का मन बना चुके थे, तो उन्होंने एक कंप्यूटर और हारमोनियम भी खरीद लिया. हारमोनियम सुनकर आपको लगा होगा कि दोनों बड़े तोप रहे होंगे. मगर ऐसा नहीं था. उन्हें तो ये बजाना तक नहीं आता था. थोड़ी मशक्कत के बाद उन्होंने यूट्यूब पर इसे सीखने की कोशिश की थी. मगर उनका हाथ हारमोनियम पर ठीक तरह से बैठ नहीं पाया.

'बैरण' आज इंटरनेट पर खूब वायरल हो गया है. कई लोग इसे रातों-रात मिला सक्सेस समझ सकते हैं. मगर इसकी नींव सालों पहले पड़ गई थी. हुआ ये कि 2019 में कोविड के दौरान सुमित ने एक गाना लिखा था. वो उसका प्रोफेशनल प्रोडक्शन करवाना चाहते थे. मगर तब वो खुद नए-नवेले थे. इसलिए उन्होंने फैसला किया कि वो किसी म्यूजिक कम्पोज़र से ये काम करवाएंगे. थोड़ी खोज-बीन के बाद उन्हें हिसार का एक कम्पोज़र मिल भी गया. अब किसी दूसरे से काम करवाना है, तो पैसे लगेंगे न मालिक? उस कम्पोज़र ने सुमित से 40 हजार रुपयों की डिमांड की. सुमित ने कुछ सोच-विचार किया और अपने घर वालों से पैसे मांग लिए. घर वाले सपोर्ट तो करते ही थे, इसलिए पैसे भी मिल गए. मगर दिक्कत तब हुई, जब उन्होंने कम्पोज़र का काम देखा.

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दरअसल, उन्हें उस कम्पोज़र का तैयार किया गाना पसंद ही नहीं आया था. इसलिए उन्होंने फैसला किया कि अब वो खुद ही म्यूजिक बनाया करेंगे. इसके बाद उन्होंने पांच गाने और बनाए. मगर वो भी कुछ खास चले नहीं. फास्ट फॉरवर्ड. साल 2024 में दोनों भाइयों ने एक यूट्यूब चैनल बनाया. नाम रखा- 'बंजारा'. सुमित और अनुज का मानना है कि उनके गानों में एक कहानी छिपी होती है. ऐसी कहानी, जो चलती जाती है. एक जगह से दूसरी जगह. बिल्कुल वैसे ही, जैसे बंजारे चलते हैं.

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अनुज (बाएं) और सुमित (दाएं).

खैर, नए चैनल पर उन्होंने 28 नवंबर 2024 को पहला गाना लॉन्च किया. नाम रखा-'सूट्स विद मी'. व्यूज़- 1 लाख 59 हजार. दूसरा गाना 'डिफरेंट टॉक'. व्यूज़- 1 लाख 70 हजार. तीसरा गाना 'आशिक आवारा'. व्यूज़- 9 लाख 12 हजार. चौथा गाना 'मौज'. व्यूज़- 2 लाख 58 हजार. पांचवां गाना 'हाय रे'. व्यूज़- 20 लाख. तब तक उन्होंने पांच गाने रिलीज़ किए, जिन पर उन्हें ठीक-ठाक व्यूज़ आने लगे थे. फिर आया उनका छठा गाना. नाम? 'बैरण'. और व्यूज़? 8 करोड़ 48 लाख.

ये केवल वो व्यूज़ हैं, जो इस गाने को यूट्यूब पर मिले हैं. दूसरे म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर भी इसे करोड़ों बार सुना गया है. यूट्यूब पर इस गाने के डिस्क्रिप्शन में लिखा है-"Bairan was never meant to be a hit." मगर ये गाना हिट नहीं, सुपर हिट हो गया. इंडियन बिलबोर्ड पर ये हफ्तों तक नंबर 1 रैंक पर रहा. ‘बैरण’ ये ऐसा करने वाला पहला हरियाणवी गाना है. बाकी, इंस्टाग्राम पर इस पर अनगिनत रील्स बनीं, सो अलग. पर ये सब सुनकर ऐसा लगता है न जैसे दोनों भाइयों के हाथ तुक्का लग गया हो? मगर सच्चाई इससे काफी अलग है.

'बैरण' की शुरुआत काफी सिम्पल हुई थी. दरअसल, एक रात अनुज ने सुमित को एक गाना गुनगुनाकर भेजा. अनुज का सजेशन था कि उन्हें रॉक बीट पर कोई म्यूजिक बनाना चाहिए. सुमित को ये आइडिया पसंद आया. वो भी इतना पसंद कि उन्होंने 15 मिनट के अंदर गाने का फर्स्ट ड्राफ्ट लिख दिया. यही नहीं, अगली सुबह दोनों ने उसे कम्पोज़ भी कर दिया. मगर ये वो वर्जन नहीं था, जो हम आज सुन रहे हैं. उन्होंने अगले एक साल तक इसके लिरिक्स कई बार लिखे. 16 बार इसके म्यूजिक में फेर-बदल किया. इतना सब कुछ करके उन्होंने चंडीगढ़ में गाने का एक वीडियो भी शूट कर लिया था. मगर सुमित को चाहिए था परफेक्शन. उन्हें वो वीडियो जमा नहीं. नतीजतन, उन्होंने उसे रिजेक्ट कर दिया.

23 जनवरी 2026 को उन्होंने ‘बैरण’ का ऑडियो वर्जन रिलीज़ किया था. देखते-ही-देखते उस पर लोगों के अच्छे रिएक्शन आने लग गए. इससे उन्हें एक बात तो समझ आ गई. वो ये कि उनका म्यूजिक अच्छा है. कमी है तो बस वीडियो में. कुछ सोच-विचार करके उन्होंने गाने में एक एनिमेशन को जोड़ने का प्लान किया. कहने की जरूरत नहीं कि उनका ये प्लान आज ‘बैरण’ का बड़ा हाइलाइट है. इसके जरिए उन्होंने ढाई मिनट में अपनी पूरी कहानी कह दी. ऐसी कहानी, जिसमें हर आशिक खुद को खोज ले रहा है. गाने को बनाने में उन्हें 50 हजार रुपये का खर्च आया था. तमाम ताम-झाम से निपटने के बाद उन्होंने 13 फरवरी 2026 को ऑफिशियली ‘बैरण’ गाना यूट्यूब पर रिलीज़ कर दिया.

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‘बैरण’ का एनिमेशन.

'बैरण' के फर्स्ट ड्राफ्ट को लिखने और इसके म्यूजिक वीडियो को रिलीज़ करने के बीच डेढ़ साल का फासला था. यानी जिस गाने को आज लोग ओवरनाइट सक्सेस समझ रहे हैं, उसे बनाने में इन दो भाइयों ने कई रातों की नींद खपाई है. 'बैरण' आज हर तरफ वायरल हो चुका है. सुमित और अनुज को मुंबई से ऑफर आ रहे हैं. हरियाणवी और पंजाबी इंडस्ट्री भी उन्हें काफी सपोर्ट कर रही है. मगर ये 'बंजारे' किसी हड़बड़ी में नहीं. न तो वो थाल में परोसे हर व्यंजन को लपकना चाहते हैं. न ही वो वायरल सेंसेशन बनकर रह जाते हैं. दोनों बस अपनी कला पर काम कर रहे. कुछ ‘बैरण’ से भी ज्यादा खूबसूरत रच रहे. शायद इसलिए ताकि जब लोग उनके गाने सुनें तो उनके मुंह से खुद ही ये निकले-"अरे, हरियाणा में ऐसे गाने भी बनते हैं?"  

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