Satluj फिल्म से जुड़े विवाद में अब सरकारी दखल आ गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक पैनल का गठन किया है. जो Diljit Dosanjh स्टारर इस फिल्म के कॉन्टेंट को इग्ज़ामिन करेगी. 'सतलुज' 3 जुलाई को Zee5 पर रिलीज़ हुई थी. मगर 5 जुलाई की शाम इसे वहां से हटा दिया गया. Zee5 ने एक स्टेटमेंट जारी करते हुए बताया कि किन्हीं वजहों से ये इंडिया में उनके प्लैटफॉर्म पर नहीं देखी जा सकेगी. वो इसे वापस लाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं.
'सतलुज' के कॉन्टेंट की जांच के लिए सरकार ने गठित की हाई लेवल कमिटी!
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इंटर डिपार्टमेंटल कमिटी 'सतलुज' के कॉन्टेंट की जांच करने के बाद केंद्र सरकार को रिपोर्ट देगी. उसके बाद तय होगा फिल्म का भविष्य.


NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्रायल ने हाई लेवल की इंटर डिपार्टमेंटल कमिटी बनाई है. जो 'सतलुज' फिल्म के कॉन्टेंट की जांच करेगी. इस फिल्म को इग्ज़ामिन करने के बाद वो कमिटी केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी. उसी के आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे. इसी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से इस फिल्म को Zee5 से हटाने की वजह भी बताई गई. सूत्र के मुताबिक 'सतलुज' के कुछ हिस्सों को भारत विरोधी ताकतें गलत तरीके से इस्तेमाल कर सकती हैं. बड़े ध्यान से इसका रिव्यू करने के बाद इसे ओटीटी प्लैटफॉर्म से हटवाने का फैसला लिया गया.
'सतलुज' ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म है. जसवंत सिंह खालड़ा अमृतसर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में डायरेक्टर थे. वो शिरोमणि अकाली दल के मानवाधिकार विंग से भी जुड़े थे. उनके कलीग प्यारा सिंह एक दिन अचानक गायब हो गए. उनकी तलाश में ही जसवंत श्मशान घाट पहुंचे. वहां उन्हें बड़ी तादाद में लाशों को लावारिस बताकर जलाने की बात पता चली. उन्होंने पड़ताल शुरू की और कुछ वक्त बाद दावा किया कि पुलिस ने फ़र्जी तरीके से आम लोगों को मारा या गायब कर दिया. उन्होंने 1984 से 1994 तक हुई ऐसी हज़ारों अवैध हत्याओं और दाह संस्कारों की जानकारी जुटाई. जिसके मुताबिक लावारिस बताकर लाशों का अंतिम संस्कार कर दिया गया, या लाशें नदी-नहर में फेंक दी गईं. फिल्म में इन हत्याओं की संख्या 25000 बताई गई है. 1995 में एक दिन अचानक जसवंत सिंह खालड़ा उन्हीं के घर के बाहर से ग़ायब हो गए. 10 साल तक उनकी कोई ख़बर नहीं मिली. फिर एक दिन छह पुलिसवालों को उनके किडनैपिंग और क़त्ल के इल्ज़ाम में गिरफ्तार किया गया.
'सतलुज' 2022 में बनकर तैयार हो गई थी. दिसंबर 2022 में इसे सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया. वहां के अधिकारियों ने पहले इसे हिंदी के बजाय पंजाबी फिल्म मानकर सर्टिफिकेशन प्रोसेस रोक दिया. उन्होंने डायरेक्टर हनी त्रेहान से कहा कि वो सर्टिफिकेशन प्रोसेस के लिए दोबारा अप्लाई करें. दूसरी बार अप्लाई करने के बाद सेंसर बोर्ड की रिवाइज़िंग कमिटी ने फिल्म में 21 कट्स लगाने के निर्देश दिए. इसमें फिल्म और जसवंत सिंह खालड़ा का नाम बदलने से लेकर पंजाब के ज़िक्र, भारत के झंडे और गुरबानी वाले हिस्सों को हटाने के निर्देश दिए गए. बीतते समय के साथ इन कट्स की संख्या 45 और फिर 127 हो गई. मामला कोर्ट में पहुंचा. मगर मेकर्स को बाहरी दबाव में अपना केस वापस लेना पड़ा. तीन साल तक वो सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने का इंतज़ार करते रहे. सेंसर बोर्ड और 'सतलुज' के मेकर्स के बीच आखिरी संवाद दिसंबर 2024 में हुआ. तब सेंसर बोर्ड की तरफ से ये कहा कि वो इस फिल्म को अभी रिलीज़ न करें. दिल्ली इलेक्शन के बाद उन्हें बताया जाएगा कि कैसे आगे बढ़ना है. दिल्ली इलेक्शन को पूरा हुए सवा साल से ज़्यादा हो गया. मगर मेकर्स को सेंसर बोर्ड की ओर से कोई जानकारी या सूचना नहीं दी गई.
मेकर्स ने फिल्म का नाम 'घल्लूघारा' से 'पंजाब 95' और फिर 'सतलुज' किया. और 3 जुलाई की रात बिना किसी शोर-शराबे के फिल्म का अनकट वर्जन Zee5 पर रिलीज़ कर दिया. क्योंकि ओटीटी प्लैटफॉर्म पर फिल्म को रिलीज़ करने के लिए सेंसर सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं पड़ती. मगर रिलीज़ के 48 घंटे के भीतर ये फिल्म उस प्लैटफॉर्म से हटा दी गई. अब सूत्रों के मुताबिक सरकार की बनाई हाई लेवल कमिटी इस फिल्म के कॉन्टेंट का जांच करेगी. उसके बाद तय होगा कि ये फिल्म दोबारा रिलीज़ होगी या नहीं.
वीडियो: दिलजीत की फिल्म 'पंजाब 95' में 100 से अधिक कट्स, सेंसर बोर्ड ने रोकी रिलीज
















