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'हैंगओवर लीव' के बाद ये पांच तरह की छुट्टियां और मिलें तो ऑफिस स्वर्ग हो जाए

फिर कोई एमप्लॉइ झूठ नहीं बोलेगा, दुनिया में सत्य की स्थापना होगी.

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जब आपका बॉस भी खुश हो, और आप भी. (फोटो क्रेडिट- 'रॉकेट सिंह- सेल्समैन ऑफ द ईयर')
लाइफ का 'लोड' कम करने के लिए थोड़ा बहुत 'सोमरस' कौन नहीं लेता. दोस्त समझते हैं. मां-बाप मूड में हों, तो समझ लेते हैं. जो नहीं समझता वो है HR. एक बढ़िया 'बैठक' के बाद हैंगओवर होता है, लेकिन HR की दुनिया में इसका कॉन्सेप्ट नहीं है. तो आपको झूठ बोलना पड़ता है. और हर बार पहले से अलग, इम्प्रोवाइज़ करना पड़ता है. 'बुआ की लड़की की मंगनी' करवानी पड़ती है, 'मामा के बेटे का मुंडन' या 'ताऊ के पाइल्स का ऑपरेशन' टाइप नया सोचना पड़ता है. नहीं सोचा, तो गई लीव (या पैसे भी).
लेकिन म्यूज़िक टिकिटिंग ऐप बनाने वाली लंदन की DICE कंपनी ने ये मुश्किल आसान कर दी है. ये कंपनी अपने हर एम्पलॉइ को साल में चार छुट्टियां 'हैंगओवर डे' के नाम पर देना शुरू कर रही है.
इस कंपनी के कूल बॉस फिल हचियन का मानना है कि म्यूज़िक नाइट्स और उसके बाद 'बैठकों' में होने वाली नेटवर्किंग कंपनी के बहुत काम की है. इसलिए वो हैंगओवर के लिए छुट्टियां देंगे ताकी उनके एम्पलॉइ को झूठ न बोलना पड़े.
DICE के फिल को हम अपनी ओर से कुछ नायाब लेकिन बेहद ज़रूरी छुट्टियों के लिए सजेशन दे रहे हैं. वो इन पर अमल कर लें तो हम लंदन जाकर 30 फीट का मंच लगाएंगे, उन्हें शॉल और श्रीफल देंगे और कूडोज़ कहेंगे.
 
# 'आज मैचिंग मोज़े नहीं मिल रहे डे' - डेढ़ दिन
 
देखो भाई के साथ क्या हुआ. (जिफः लेटॉयल)


 
मोज़े मिसमैच हों तो पैंट पूरे दिन घाघरे की तरह संभालनी पड़ती है. टखने तक उठ जाए और कोई नोटिस कर ले तो एक बहुत अजीब तरह की खज्जू होती है. आदमी खीखी कर के आगे बढ़ तो जाता है, लेकिन टीस बनी रहती है. काम में मन नहीं लगता. धड़ाधड़ टाइपो होने लगते हैं. तो नियम बनाया जाए कि साल में डेढ़ दिन सैंक्शंड लीव हो जिसमें आप कारण 'मोज़ा मिसमैच' भर सकें.
 
# 'दो वीकऑफ के बाद तीसरे दिन आने का मन नहीं कर रहा डे' - 4 दिन
 
रिदम टूटती है तो ऐसा ही होता है.


 
दो दिन लगातार छुट्टी के बाद रिदम गड़बड़ा जाती है. 'बैठक' न भी की हो, तो ऑफिस आने का मन नहीं करता. हमेशा नहीं, पर साल में चार बार तो कंपनी कंसीडर कर ही सकती है.
 
# 'गर्लफ्रेंड की सबसे अच्छी दोस्त का बर्थडे मनाने जाना है डे' - 1 दिन
 
बड्डे मुबारक


 
एक कूल बॉस गर्लफ्रेंड के बड्डे पर आपको छुट्टी देगा, लेकिन उसकी फ्रेंड के बड्डे पर बात फंस जाती है. पर आपको तो ड्यूटी देनी है. तो एक छुट्टी इस बाबत भी मिलनी चाहिए.
 
# 'ब्रेकअप डे' - 2 दिन
 
तच्च-तच्च-तच्च


 
नो एक्सप्लेनेशन. इतना जानिए कि 2 दिन इसलिए रखे हैं कि इन केस...
 
# 'पता नहीं क्या बहाना बनाऊं डे' - साढ़े तीन दिन
 

 
हां. ऐसा होता है. आपको छुट्टी चाहिए लेकिन कोई कारण नहीं है, न बहाना बचा है. इसलिए एक फाइनेंशियल ईयर में कम से कम साढ़े तीन दिन छुट्टी ऐसी मिले जिसमें आपको न ऑफिस जाना है, न कारण के चक्कर में पड़ना है. लीव अप्लाई करते हुए चेप देना है कि नहीं आया था पर बहाना भी नहीं है. बॉस भी चट से अप्रूव कर दे. दुनिया कितनी सुंदर हो जाएगी.
कॉर्पोरेट की दुनिया में एम्पलॉइ अपनी क्रिएटिविटी कॉपी के इंट्रो के बजाय और जगह खर्च न करें और सत्य का राज स्थापित हो, इसके लिए हमारी तरफ से ये पांच सजेशन थे. आपके दिमाग में और हों तो lallantopmail@gmail.com पर लिख के सेंडें
.



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