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'रामायण' के मेकर्स ने ऐसा जुगाड़ लगाया कि गलती की गुंजाइश ही खत्म हो गई!

रणबीर कपूर की 'रामायण' की शूटिंग शुरू होने से पहले मेकर्स फिल्म के हर एक शॉट को एनिमेट कर चुके थे.

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'रामायण' की मार्केटिंग पर 1200 करोड़ रुपए खर्च होंगे.

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  • फिल्म रामायण में प्री-विज़ुअलाइज़ेशन और मोशन कैप्चर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके हर सीन को पहले एनिमेट किया गया ताकि शूटिंग में गलती की गुंजाइश न रहे और काम की योजना पहले से तैयार हो।
  • रामायण को भारत की सबसे महंगी फिल्म माना जाता है इसलिए शूटिंग में VFX हैवी तकनीक और डिजिटल सेट्स का उपयोग किया गया, जिससे बड़े सेट्स बनाने के बजाय ब्लू स्क्रीन का प्रयोग हुआ।
  • इस तकनीक के कारण सेट पर टीम को पहले से ही शूटिंग के तरीकों का पता था, जिससे समय, संसाधनों की बचत हुई और प्रोडक्शन प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई।

Nitesh Tiwari की Ramayana देश की सबसे महंगी फिल्म है. इसलिए मेकर्स मूवी में ऐसी कई अडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें आमतौर पर भारत में न के बराबर देखा जाता है. फिल्म के डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी (DoP) Pankaj Kumar की मानें, तो Namit Malhotra इस फिल्म में गलती की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहते. इसलिए उन्होंने Motion Capture Technology की मदद से मूवी के हर एक सीक्वेंस को पहले ही एनिमेट करवा लिया था. इससे VFX और प्रोडक्शन टीम के अलावा एक्टर्स को भी फिल्म का विज़न समझने में सहूलियत हुई. और किसी किस्म की गड़बड़ी का रिस्क भी तकरीबन खत्म हो गया.

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DoP पंकज कुमार को 'हैदर', 'तुम्बाड' और 'शिप ऑफ थीसस' जैसी फिल्मों की सिनेमैटोग्राफी के लिए जाना जाता है. वो रणबीर कपूर की 'रामायण' में भी इसी हैसियत से काम कर रहे हैं. पिछले दिनों वैरायटी इंडिया से हुई बातचीत में पंकज ने ‘रामायण’ के बारे में बात करते हुए बताया,  

"रामायण का प्रोसेस काफी अलग था. क्योंकि ये एक VFX हेवी फिल्म है. फिल्म के ज्यादातर सीन्स डिजिटली बनाए गए हैं. हमने बड़े-बड़े सेट बनाने की जगह केवल उसके कुछ हिस्से तैयार किए थे. ज्यादातर जगहों पर ब्लू स्क्रीन का इस्तेमाल हुआ, जिसे बाद में CGI के डिजिटल वर्ल्ड से बदला जाना था. इसलिए फिल्म के सभी सीन्स पहले ही विज़ुअलाइज़ कर लिए गए थे. ऐसा नहीं था कि हम शूटिंग पर पहुंचें और फिर ये तय करें कि आगे कैसे काम करना है. फिल्म के हर शॉट को मोशन-कैप्चर टेक्नोलॉजी की मदद से प्री-विज़ुअलाइज़ किया गया था. आसान भाषा में कहें तो, हम हर सीन को वर्चुअली एनिमेट कर चुके थे."

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पंकज बताते हैं कि इस प्रोसेस में डायरेक्टर नितेश तिवारी हर वक्त उनके साथ मौजूद रहते थे. वो कहते हैं,

"मैं एनिमेटर्स के साथ बैठकर अपने कैमरा मूव्स को स्क्रिप्ट के हिसाब से डिज़ाइन करता था. नितेश तिवारी और मैं साथ में उन शॉट्स पर माथा-पच्ची करते थे कि ये काम करेगा या नहीं. या हम इसमें क्या सुधार कर सकते हैं. इस तरह प्री-विज़ुअलाइज़ेशन के दौरान ही फिल्म को लेकर सारी चर्चा और प्लानिंग हो जाती थी. फिर जब हम शूटिंग के लिए सेट पर पहुंचते, तब किसी तरह के डिस्कशन की जरूरत नहीं पड़ती. हम सबको पहले से पता होता कि कौनसा सीन, किस तरह फिल्माया जाएगा."

प्री-विज़ुअलाइज़ेशन का सबसे बड़ा फायदा ये हुआ कि सेट पर सबको पहले ही ये पता रहता कि उन्हें क्या करना है. इससे समय, पैसा और एनर्जी, तीनों की बचत हुई. पंकज के मुताबिक, 'रामायण' के सेट पर VFX वालों को जानकारी रहती थी कि उन्हें किस एंगल से कौन सा सीन बनाना है. प्रोडक्शन डिजाइनर्स को पता रहता था कि उन्हें आज कैसा सेट तैयार करना है. कैमरा टीम अपने कैमरे और लाइट का इंतज़ाम भी पहले ही कर लेती, क्योंकि उन्हें आइडिया था कि वहां किस सीक्वेंस की शूटिंग होगी. कुल मिलाकर, 'रामायण' की शूटिंग शुरू होने से पहले ही फिल्म पर काफी मेहनत कर ली गई थी. पंकज की मानें तो उन्होंने अपने करियर में इतना प्री-प्रोडक्शन पहले कभी नहीं किया है.

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