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हादसे जिसने तोड़ दिया देश का दिल! सत्य निकेतन हादसे से पहले भी कहीं इमारत गिरी तो कहीं आग में जल गए सपने

Satya Niketan building collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है. पिछले कुछ सालों में बिल्डिंग और कोचिंग सेंटरों में हुए हादसे में कई छात्रों की जाम जा चुकी है. सवाल अब भी वही है कि आखिर प्रशासन कब चेतेगा?

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सत्य निकेतन में इमारत गिरने जैसी घटनाएं पहले भी घट चुकी हैं. (फाइल फोटो)

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  • मई 2019 में गुजरात के सूरत में एक अवैध कोचिंग सेंटर वाली इमारत में आग लगने से 20 छात्रों की मौत हुई।
  • भारत में कई हादसों का कारण निर्माण मानकों का उल्लंघन और बिल्डिंग मालिकों व प्रशासन की लापरवाही रही है।
  • ये घटनाएं प्रशासन और सरकार की सुरक्षा नियमों के पालन में कमी को उजागर करती हैं, जिसके बाद भी सुधार नहीं हुआ।

साल 2019. गुजरात का सूरत शहर. एक कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगी. 20 छात्र मारे गए. 

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कट टू साल 2024. दिल्ली का ओल्ड राजेंद्र नगर इलाका. एक कोचिंग सेंटर की बेसमेंट में पानी भर गया. तीन छात्रों की मौत हो गई. 

फिर कट टू साल 2026. दिल्ली का सत्य निकेतन इलाका. एक PG हॉस्टल की बिल्डिंग गिर गई. अब तक सात लोगों की मौत.  

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ये केवल घटनाएं नहीं हैं. ये प्रमाण है सिस्टम की लापरवाही का. साल बदला. जगह बदली. मगर इन हादसों से किसी ने सीख नहीं ली. भारत में सुरक्षा मानकों का पालन ना करने की वजह से ऐसे कई हादसे हुए हैं. बिल्डिंग के मालिक और प्रशासन की लापरवाही की कीमत स्टूडेंट्स को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है. हाल में हुई ऐसी घटनाओं पर एक नज़र डालते हैं.

सूरत कोचिंग सेंटर की आग में राख हुई जिंदगियां 
  • मई, 2019 में गुजरात के सूरत शहर की एक कॉमर्शियल बिल्डिंग में आग लग गई. बताया गया कि इस बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर “अवैध रूप से” एक कोचिंग सेंटर चलाया जा रहा था. आग वहां तक पहुंच गई और हादसे में कम से कम 20 छात्रों की मौत हो गई. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के वक़्त अंदर 50-60 लोग मौजूद थे. छात्रों की उम्र 14-17 साल थी. आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी. उस वक़्त जो वीडियो सामने आईं थीं उसमें दिखा कि छात्र चौथी मंज़िल से कूदकर अपनी जान बचा रहे थे.  
  • फिर आया साल 2023. 15 जून को दिल्ली के मुखर्जी के एक बिल्डिंग में आग लग गई, जहां कई कोचिंग सेंटर चल रहे थे. आग और धुएं से बचने के लिए छात्रों को खिड़कियों से रस्सियों और बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरना पड़ा. कुछ को इमारत से कूदना पड़ा. इस घटना में 61 छात्र घायल हुए.
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मुख़र्जी नगर में रस्सियों से नीचे उतरते छात्र. 
  • कट टू जून, 2026. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लग गई. इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से ज्यादातर 16 से 25 साल की उम्र के स्टूडेंट थे. पता चला कि 2016 में बिल्डिंग को ‘अवैध’ करार कर गिराने का आदेश दिया गया. मगर फिर आदेश वापस ले लिया गया. 

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बिल्डिंग गिरी, मलबे में दब गए छात्र  
  • मई, 2026 में दिल्ली के सैदुलाजब इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई. इस इमारत का मलबा बगल में चलने वाली एक कैंटीन पर गिरा, जिससे वहां बैठकर खाना खा रहे लोग दब गए. इस हादसे में कुल छह लोगों की मौत हुई, जिनमें से पांच अभ्यर्थी थे, जो भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे और एक कैंटीन चलाने वाली महिला थीं. लोकल लोगों ने बताया कि बिल्डिंग जर्जर हो गई थी और MCD की वॉर्निंग के बाद भी वहां अवैध कंस्ट्रक्शन हो रहा था.  
  • जुलाई 2025 में भी राजस्थान के झालावाड़ जिले के एक सरकारी स्कूल की इमारत का हिस्सा गिर गया. हादसे में 7 छात्रों की मौत हुई और 28 बच्चे घायल हुए. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्थानीय स्तर पर स्कूल बिल्डिंग की जर्जर हालत को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी.
  • इसके अलावा जुलाई, 2024 में RAU'S IAS कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने के कारण तीन छात्रों की जान चली गई. बेसमेंट लाइब्रेरी के लिए इस्तेमाल होता था और भारी बारिश के दौरान करीब 30 स्टूडेंट अंदर पढ़ाई कर रहे थे. तेज बहाव के चलते तीन छात्र अंदर ही फंसे रह गए और उनकी मौत हो गई.  
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RAU'S IAS के बेसमेंट में तीन छात्रों की गई जान. 

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घटनाएं कई, मगर सवाल वही

करीब तीन महीने बाद ही दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक और इमारत गिर गई. इस इमारत में एक हॉस्टल चलाया जा रहा था, जिसमें कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट रहते थे. मलबे में दबने की वजह से अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है. ये एक पांच मंजिला 50 साल पुरानी इमारत थी, जबकि MCD अधिकारी के मुताबिक, सिर्फ दो मंजिल बनाने की ही अनुमति दी गई थी.

इन सभी हादसों में एक बात कॉमन रही कि सभी इमारतों में नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा था, जिसपर ध्यान नहीं दिया गया. हादसे के बाद एक्शन लिया गया. मगर सवाल ये है कि हादसों को रोकने पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया? जो छात्र पढ़ने के लिए घर से बाहर निकलते हैं उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन और सरकार का इतना ढीला रवैया बहुत से सवाल खड़े करता है. 

ये घटनाएं तो कुछ एग्जाम्पल हैं. ऐसी कई घटनाएं आकर गुज़र जाती हैं. मगर सवाल अब भी वही है कि इमारत गिरने या आग लगने के बाद ही प्रशासन क्यों जागता है? 

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में 7 की मौत, जिम्मेदार कौन?

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