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भारतीय रेलवे का मई महीना: मज़दूर मरे, ट्रेनें भयानक लेट हुईं और कई बार तो भटक ही गईं!

रेलवे ने पूरा मई का महीना लड़ते-भिड़ते, सफाई देते और पल्ला झाड़ते गुज़ारा.

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श्रमिक ट्रेनों से घरों को लौटते बच्चे. महिलाएं और पुरुष खिड़की से बाहर झांकते हुए. (Photo: AP)
2020 का मई महीना. कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों और लॉकडाउन के बीच गुज़़रा. यह महीना रेलवे और उसके विवादों के लिए भी याद रखा जाएगा. मई की एक तारीख से रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलानी शुरू की. उसी दिन से विवादों, आरोपों, शिकायतों, शिकवों का सिलसिला भी चल पड़ा. ट्रेनों को लेकर बंगाल, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों से रेल मंत्री पीयूष गोयल भिड़ गए. तो लेट ट्रेनों, मजदूरों की मौत, खाने-पीने की कमी पर रेल मंत्री घिर गए. आइए देखते हैं, कैसा रहा रेलवे का सफ़र?

1 मई

करीब 37 दिन बाद फिर से ट्रेनें चलीं. लेकिन केवल मजदूरों के लिए. नाम रखा गया श्रमिक स्पेशल ट्रेन. इऩके जरिए दूसरे राज्यों में काम करने गए मजदूरों को घर भेजने की कवायद शुरू हूई. यह ट्रेनें राज्यों के कहने पर चलाई गईं. पहली ट्रेन तेलंगाना के लिंगमपल्ली से झारखंड के हटिया को गई. लेकिन दो-तीन ही गुजरे होंगे कि विवाद शुरू हो गया.
Shramik Special Trains
फोटो: पीटीआई

मजदूरों के किराए पर नूराकुश्ती
आरोप लगे कि रेलवे ने मजदूरों का किराया मांगा. उसने पहले पैसे लिए और फिर मजदूरों को ट्रेन में बैठाया. कई मजदूरों की भी ऐसी कहानियां आईं. जहां उन्होंने बताया कि पैसे देने के बाद उन्हें ट्रेन का टिकट दिया गया. रेलवे ने आरोपों से इनकार किया. कहा कि मजदूरों की टिकट का पैसा इकट्ठा करना राज्य का काम है. रेलवे ने कहा कि टिकट की रकम में से 85 प्रतिशत पैसा वह खुद भर रहा है. केवल 15 प्रतिशत पैसा ही राज्यों से लिया जा रहा है. लेकिन बवाल नहीं थमा. इस मसले पर बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने हो गए. सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मजदूरों का खर्च उठाने को कहा. राहुल गांधी ने रेलवे को पीएम केयर के जरिए घेरा. कहा कि रेलवे ने इसमें 151 करोड़ रुपये दिए. लेकिन मजदूरों का खर्च वह नहीं उठा रही. बीजेपी की ओर से जवाब आया. कहा कि 85 फीसदी पैसा रेलवे वहन कर रहा है. राज्यों को केवल 15 प्रतिशत पैसा ही देना है. बीजेपी शासित राज्य ऐसा कर रहे हैं. कांग्रेस वाले भी करें.

8 मई

16 मजदूर मालगाड़ी से कटे
श्रमिक ट्रेन चलना शुरू हो चुकी थीं. लेकिन सबको नहीं मिल रही थी. ऐसे में लाखों पैदल जाने को मजबूर थे. ऐसे ही 16 मजदूर महाराष्ट्र में थककर पटरियों पर ही सो गए. एक मालगाड़ी आई और उन्हें कुचलते हुए चली गई.  मरने वाले मध्य प्रदेश के शहडोल और उमरिया के रहने वाले थे.
औरंगाबाद में पटरियों पर बिखरी पड़ीं मजदूरों की रोटियां.
औरंगाबाद में पटरियों पर बिखरी पड़ीं मजदूरों की रोटियां.

14 मई

कांग्रेस शासित राज्यों से रेल मंत्री की तकरार
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आरोप लगाया. कहा कि बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड और राजस्थान श्रमिक ट्रेनों को अप्रूव नहीं कर रहे. इस वजह से मजदूर घरों को नहीं जा पा रहे. इसके जवाब में ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल ने एक महीने के लिए 105 ट्रेनों को मंजूरी दी है. लेकिन गोयल ने कहा कि बंगाल को तो रोज़ 105 ट्रेनों की जरूरत है. राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का भी जवाब आया. उन्होंने कहा कि उनके यहां किसी ट्रेन का मामला नहीं अटका है. सबसे पहले राजस्थान ने ही ट्रेन चलाने की मांग की थी.

23 मई

ट्रेनों के भटकने की पहेली
खबर आई कि महाराष्ट्र से रवाना हुई एक ट्रेन को उत्तर प्रदेश जाना था. लेकिन वह ओडिशा के राउरकेला पहुंच गई. फिर शुरू हुआ श्रमिक ट्रेनों के लेट चलने की शिकायतों का दौर. कई रिपोर्ट्स ऐसी भी आईं, जिनमें बताया गया कि 40 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें अपना रास्ता भटक गईं
. रेलवे ने इन दावों का खंडन किया. उसने कहा कि ट्रेनें रास्ता नहीं भटकती हैं. उन्हें बदले हुए रूट से चलाया जा रहा है. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद यादव ने 23 मई को बताया कि अधिकतर ट्रेनें यूपी और बिहार में गईं. इस वजह से उस रूट पर कंजेस्चन हो गया. ऐसे में ऑप्शनल रूट से ट्रेनों को भेजा गया है. ... और यहां तो गजब ही हो गया!
लेकिन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को लेकर विवाद थमा नहीं. एक खबर आई कि सूरत से चली ट्रेन 9 दिन बाद बिहार के सीवान पहुंची. इस पर हंगामा हुआ. रेलवे की ओर से फौरन खंडन आए. रेलवे प्रवक्ता, रेलवे बोर्ड चेयरमैन और खुद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस पर बयान दिया. कहा कि यह गलत खबर है. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद यादव ने कहा कि 3840 ट्रेनों में से केवल 4 ट्रेनों ने ही गंतव्य तक पहुंचने में 72 घंटे से ज्यादा समय लिया. ये चार ट्रेनें उत्तर-पूर्व को जा रही थीं. और तूफान और बारिश के चलते पानी भरने की वजह से लेट हुईं. इंडियन एक्सप्रेस ने 31 मई को छापा कि करीब 40 प्रतिशत ट्रेनें लेट रहीं. लेट होने वाली ज्यादातर रेलगाड़ियां उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वी भारत के राज्यों को जाने वाली थीं. जो 78 ट्रेनें एक दिन से ज्यादा लेट हुईं उनमें से 53 महाराष्ट्र और गुजरात से रवाना हुई.

25 मई

उद्धव से टकराए पीयूष
एक तरफ रेलवे ट्रेनों के लेट होने सवालों से घिरा था. वहीं रेल मंत्री पीयूष गोयल महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे से भिड़े हुए थे. उद्धव ने कहा था कि केंद्र की तरफ से राज्यों को ज़रूरत के मुताबिक ट्रेनें नहीं दी जा रहीं. इसलिए प्रवासियों को उनके राज्य भेज पाने में मुश्किल आ रही है. इस पर पीयूष गोयल ने 24 और 25 मई की रात को ताबड़तोड़ 12 ट्वीट कर दिए. उन्होंने जानकारी दी कि केंद्र सरकार महाराष्ट्र से 125 ट्रेनें देने के लिए तैयार थी. लेकिन महाराष्ट्र सरकार 41 ट्रेनों की ही लिस्ट दे पाई. तपता महीना और खाने को झपटते मजदूर
ट्रेनों के लेट होने के बीच मजदूरों के भूखे सफर करने के मामले भी उभरे. मई का तपता महीना. भूखे और प्यासे सफर करते मजदूरों की कहानियां इंटरनेट पर बिखरी पड़ी हैं. सोशल मीडिया इस तरह के वीडियो से भरा पड़ा है, जहां पर मजदूर बिस्कुट के पैकेटों और पानी के लिए झपट रहे हैं. कई स्टेशनों पर यात्रियों ने खाने को लेकर प्रदर्शन किया. हालांकि रेलवे ने कहा कि खाने-पानी की व्यवस्था की गई है. रेल मंत्री ने कहा कि ट्रेन चलने पर राज्यों की ओर से खाना-पानी दिया जाता है. इसके अलावा रास्ते में यात्रियों को 1.19 करोड़ से अधिक भोजन पैकेट और 1.5 करोड़ से अधिक पानी की बोतलें रेलवे ने दी.
श्रमिक ट्रेन में सवार लोगों को पानी पिलाता एक स्काउट गाइड. (Photo: PTI)
श्रमिक ट्रेन में सवार लोगों को पानी पिलाता एक स्काउट गाइड. (Photo: PTI)

29 मई

श्रमिक ट्रेनों में 80 मजदूरों की मौत!
फिर सामने आया कि श्रमिक ट्रेनों में सफर करने वाले 80 मज़दूरों की जान गई. यह आंकड़े 9 से 27 मई के बीच के हैं. हिंदुस्तान टाइम्स ने रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी आरपीएफ के डेटा के आधार पर यह खबर छापी. हालांकि रेलवे इससे भी इनकार कर रहा है. पीआईबी फैक्ट चैक के जरिए श्रमिक ट्रेनों में मारे गए मजदूरों के बारे में सफाइयां दी गई. बताया गया कि वे पहले से बीमार थे.
रेलवे का फरमान- कमजोर न करें यात्रा
फिर रेलवे ने एक एडवायजरी जारी की. 29 मई को. इसमें कहा कि पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रस्त व्यक्ति, गर्भवती महिलाए, कम उम्र के बच्चे और बुजुर्ग लोग ट्रेन में यात्रा न करें. इस तरह उसने यात्रियों के सफर की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया. ऐसे ही हंगामों, ट्वीट संग्रामों और विवादों के बीच मई का महीना समाप्त हो गया. साथ ही रेलवे का मजदूरों का काम भी कम हो चला है. लेकिन जनता के मन में रेलवे को लेकर कई सवाल रह गए.
भारत में कोरोना वायरस के मामलों का स्टेटस

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Video: लॉकडाउन में मजदूरों के लिए चली श्रमिक ट्रेन के लेट होने का कारण रेलवे ने बता दिया

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