Allu Arjun की Pushpa 2 The Rule को लेकर हर तरह के रिएक्शन आ रहे हैं. कुछ लोग फिल्म के एक्शन के नाम कसीदे पढ़ रहे हैं. किसी को अल्लू अर्जुन का स्वैग भाया. मगर फिल्म के केस में सब कुछ चंगा नहीं सी. कई सारे पहलुओं पर फिल्म की आलोचना भी हो रही है. हम उन कारणों पर बात करेंगे जो ‘पुष्पा 2’ के लिए मुश्किल पैदा करती हैं.
अल्लू अर्जुन की 'पुष्पा 2' को ये 4 वजहें अझेल बनाती हैं!
Allu Arjun की फिल्म Pushpa 2 के असली विलन Fahadh Faasil नहीं, बल्कि ये कारण हैं.


#1. फ्रैंचाइज़ का चक्कर बाबू भइया
एसएस राजामौली ने ‘बाहुबली’ से इंडियन सिनेमा में क्रांति मचा दी. लेकिन उससे एक ऐसा ट्रेंड भी पैदा हुआ जिससे सिनेमा का बहुत नुकसान भी हुआ. ‘बाहुबली’ ने फ्रैंचाइज़ वाले फॉर्मूले को मेनस्ट्रीम कर दिया. नतीजतन बहुत सारी बड़ी फिल्में सिर्फ इसलिए बन रही हैं क्योंकि उन्हें फ्रैंचाइज़ में तब्दील किया जा सके. शंकर ने ‘इंडियन 2’ बनाई. फिल्म को खराब रिव्यूज़ मिले. फिर सफाई दी कि ये तीसरे पार्ट के लिए सेटअप है. हाल ही में सूर्या की ‘कंगुवा’ आई. वहां भी यही मसला था कि फिल्म पर ध्यान देने की जगह इस बात को अहमियत दी गई कि इसके आगे भी पार्ट आने वाले हैं.
‘पुष्पा 2’ भी इसी फेर में फंस जाती है. ये अपने आप में पूर्ण फिल्म नहीं है. अंत में आकर आपको बस इतना बता दिया जाता है कि ये कहानी सिर्फ यहीं तक थी. अब ‘पुष्पा 3 द रैमपेज’ देखिए. आपको छला हुआ महसूस होता है, कि क्या आपने ये फिल्म सिर्फ इसलिए देखी कि तीसरे पार्ट में कहानी खत्म हो सके.
#2. फहाद फासिल के साथ ऐसा क्यों किया?
फहाद फासिल का किरदार भंवर सिंह शेखावत पुष्पाराज के गले की सबसे बड़ी हड्डी है. पहले पार्ट में दोनों की दुश्मनी पर ही फिल्म खत्म होती है. ऐसे में आपको लगता है कि दूसरे पार्ट में दोनों के बीच भारी फ्रिक्शन होने वाला है. लेकिन फिल्म आपकी ऐसी उम्मीदों को लेती है और आपसे कहती है कि कैमरा वहां है, आपके साथ प्रैंक हो रहा था. ‘पुष्पा 2’ में फहाद का किरदार किसी भी पॉइंट पर पुष्पा को टक्कर नहीं दे पाता, डॉमिनेट करना तो दूर की बात है. उल्टा फिल्म उसे किसी मूर्ख और घमंडी ऑफिसर में तब्दील कर देती है जो बस अपने अहं को शांत करना चाहता है. फिल्म में उनके किरदार के आखिरी सीन को देखकर आप समझ जाएंगे कि फिल्म उन्हें कितना सीरियसली ले रही है.
फहाद के किरदार की दुर्दशा के बाद उनकी एक क्लिप भी वायरल हो रही है. यहां वो एक इंटरव्यू में कहते हैं कि ‘पुष्पा’ उनके लिए सिर्फ कोलैबोरेशन है. उनका असली काम मलयालम सिनेमा में है.
#3. प्रॉब्लमैटिक पार्ट हटाया पर प्रॉब्लम नहीं
‘पुष्पा द राइज़’ में जिस तरह से रश्मिका मंदन्ना के किरदार श्रीवल्ली को ट्रीट किया गया था, उसकी खोब आलोचना हुई थी. पुष्पा का किरदार चूमने के लिए श्रीवल्ली को पांच हज़ार रुपये देता है. तअब ये बात उठी कि फिल्म महिलाओं को कितने घिनौने ढंग से देखती है. ‘पुष्पा 2’ में मेकर्स ने ऐसे दाग धोने की कोशिश की. प्रोग्रेसिव महिला के तौर पर दिखाया गया कि श्रीवल्ली अपनी शारीरिक ज़रूरतों को लेकर मुखर है. मुमकिन है कि मेकर्स को लगा होगा कि सब सही है. मगर वो श्रीवल्ली को उसकी आवाज़ नहीं देते. श्रीवल्ली की पूरी दुनिया सिर्फ पुष्पा के इर्द-गिर्द ही घूमती है. ऊपर से रश्मिका बेहद लाउड ढंग से उसे परफॉर्म करती हैं जो फिल्म के हक में काम नहीं करता.
#4. किसिक किसिक क्या है?
‘पुष्पा 1’ की सफलता में बड़ा हाथ उसके गानों का भी था. हिंदी ऑडियंस ने ‘श्रीवल्ली’, ‘सामी’ और ‘ऊ अंटावा’ जैसे गानों को बहुत पसंद किया. दूसरे पार्ट में उनकी लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश की मगर उसमें कामयाब नहीं हो पाए. फिल्म खत्म होने के बाद आप उसके गाने अपने साथ लेकर बाहर नहीं निकल पाते. ‘ऊ अंटावा’ की तर्ज़ पर बने ‘किसिक’ गाने के साथ मसला ये था कि उसे हिंदी में बहुत बुरे ढंग से ट्रांसलेट किया गया. दूसरा उसे देखकर लगता है कि मेकर्स बस पहले पार्ट के रेफ्रेंस को इस्तेमाल करना चाहते हैं.
वीडियो: दि सिनेमा शो: अल्लू अर्जुन ने पुष्पा 2 का शूट पूरा किया, रश्मिका ने फिल्म से जुड़ा बड़ा हिंट दे दिया




















