ये कहावतें डायनासोर हो गई हैं, जिन्हें लुप्त हो जाना चाहिए
मानव सभ्यता से भी पुरानी कहावतें यूज करते हैं लोग. सिर्फ अपनी बातों में वजन लाने के लिए. लेकिन वो इतनी जर्जर हैं कि उनका आज के जमाने से तारतम्य नहीं बैठता.
Advertisement

फोटो - thelallantop
हमारे गांव में रजिस्टर काका थे. नहीं किसी सरकारी नौकरी में नहीं थे. पढ़ाई लिखाई में कबीरदास थे. मसि कागद छुयो नहीं कलम गही नहिं हाथ. लेकिन फिर भी वो रजिस्टर थे. कहावतों का रजिस्टर. दिल्ली में घूमो तो यहां एक क्लास मिलती है. अपनी बातों के बीच रांगा(वो वजन होता है न) रखने के लिए कीट्स के कोट्स लेते हैं. नोम चोमस्की से लेकर रस्किन बॉन्ड तक की बातें वे अपनी बातों के बीच रखते हैं. तो रजिस्टर काका गांव के एलीट थे. उनकी कोई बात बिना रहीम के दोहे, तुलसी की चौपाई या घाघ की कहावत के शुरू नहीं होती थी. खतम होने की तो बात ही क्या. इसीलिए उनका नाम रजिस्टर रखा गया था कि उनके पास कहावतों का रजिस्टर था. आगे चलके हमको एहसास हुआ कि कहावतें बनाने वाले बड़े चालू थे. और उनको हमेशा इस्तेमाल करने वाले अव्वल दरजे के शातिर. वो पांच सौ साल पहले मर गए. उनकी कहावतों की वैलिडिटी भी खत्म हो गई. उनमें से ज्यादातर अब यूजलेस हैं. नहीं मानते तो आओ बइठो हमारे साथ और करो पोस्टमार्टम. 1: बोया पेड़ बबूल का आम कहां से खाय
मार्केट से. सिंपल. आम मार्केट में आसानी से अवलेबल है लेकिन बबूल नहीं. उसके लिए बबूल का पेड़ लगाना ही पड़ेगा. 2: थोथा चना बाजे घना
तभी तो बच जाता है. उसको छान कर निकाल दिया जाता है. जबकि नाक ऊंची किए बैठा चना जाता है भाड़ में. 3: काल करे सो आज कर आज करे सो अब
आप आज ही करने के लिए सिर पटक लो. लेकिन कुछ काम सैलरी आने के बाद ही होंगे. कल हो चाहे 10 दिन बाद. 4: किस्मत से ज्यादा और वक्त से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता
ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगी लौकी देखे हो? 5: नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली
भरे पेट वाले ही धरम करम ज्यादा करते हैं साहब. वैसे इस कहावत में भयानक टेक्निकल एरर है. 6: नेकी और पूछ पूछ
फिर भी चाय लेंगे या कॉफी? ठंडा कि गरम? पान लेंगे कि दारू? पूछना तो पड़ता है. तुम जलेबी ले आओ और अगले को डायबिटीज हो तो. भैया नेकी करने के लिए ही पूछते हैं, मर्डर करने के लिए नहीं. 7: न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी
तेल घी, गेंहूं, ज्वार, बाजरा से आगे बढ़ कर एक बार कैश पेमेंट पर तय कर लो. 8: बाप मरा अंधेरे बेटवा पावरहाउस
डेमोक्रेसी मेरी जान. अब सिक्योरिटी गार्ड का लड़का IAS बनता है. ऑटो ड्राइवर का बेटा साइंटिस्ट. नथिंग इज इंपॉसिबल डूड. इतनी कहावतें तो हम एक झटके में पकड़ लिए. आगे का काम आप करो. हर बात में कोट्स गिराने वालों को समझाओ. खोपड़ी में इत्ता बड़ा दिमाग दिया है कुदरत ने. उसे लगाओ और हर मुसीबत का तोड़ पाओ.
Add Lallantop as a Trusted Source

Advertisement
Advertisement
Advertisement

















