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नहीं रहे 'नुक्कड़' में खोपड़ी बने समीर खाखर, जिन्हें अपना सबसे यादगार रोल मराठा मंदिर के बाहर मिला था

गोविंदा की 'राजाबाबू' में अमावस का यादगार किरदार निभाने वाले समीर खाखर का मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की वजह से निधन हो गया.

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'राजा बाबू' में अमावस के किरदार में समीर खाखर.

‘सर्कस’ और ‘नुक्कड़’ जैसे धारावाहिकों में काम कर चुके समीर खाखर का निधन हो गया है. वो 71 साल के थे. मल्टीपल ऑर्गन फेलियर होने की वजह से उनकी डेथ हुई है. उनके भाई गणेश ने इंडियन एक्स्प्रेस से बात करते हुए बताया,

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कल सुबह अचानक उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी. हमने डॉक्टर को घर बुलाया. उन्होंने हमें एडमिट करने की सलाह दी. हम उन्हें हॉस्पिटल ले गए और ICU में एडमिट करवाया गया. उसके बाद आज सुबह 4:30 बजे मल्टीपल ऑर्गन फेल होने की वजह से वो गिर पड़े. 

मुंबई के बोरिवली में स्थित बभाई नाका क्रिमेटोरीयम में उनका अंतिम संस्कार किया गया. समीर खाखर ने अपने करियर में कई फिल्मों और टीवी शोज़ में काम किया. हालांकि उनकी पहचान बुलंद करने का काम किया दूरदर्शन के धारावाहिक ‘नुक्कड़’ ने. शो में उन्होंने खोपड़ी नाम का किरदार निभाया था. वो खोपड़ी, जो कागज़ पर 2000 लिखने से पहले पूछता कि दो हज़ार में कितना मेंडी आता है रे. समीर खाखर ने कैमरे के सामने आने से पहले गुजराती नाटकों के ज़रिए अपनी एक्टिंग जर्नी शुरू की थी. फिर उन्हें अपना पहला धारावाहिक मिला. 1984 में आया ‘ये जो है ज़िंदगी’. उन्हें ‘नुक्कड़’ में खोपड़ी का रोल मिलने के पीछे एक कहानी है. 

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हुआ ये कि वो ‘फुर फुर कर के आई चिड़िया’ नाम का एक नाटक कर रहे थे. उस नाटक में उनके एक दोस्त थे. दोस्त ने बताया कि एक बड़ा शो बनने जा रहा है और उसके मेकर्स तुमसे मिलना चाहते हैं. उसने कहा कि तुम कल मराठा मंदिर पहुंच जाना. वहां मैं तुम्हें सईद मिर्ज़ा से मिलवा दूंगा. बातचीत के मुताबिक समीर अगले दिन मराठा मंदिर के सामने पहुंच गए. पर उनका दोस्त नहीं आया. टाइम निकालने के लिए उन्होंने पास की दुकान से सिगरेट ले ली. जलाकर पीने लगे. तभी थोड़ी देर में वहां कुंदन शाह पहुंच गए. कुंदन ने ‘जाने भी दो यारों’ और ‘कभी हां कभी ना’ जैसी फिल्में बनाई हैं. खैर कुंदन के साथ उस दिन एक और शख्स थे. दोनों लोग समीर से मिले. वहां होने का कारण पूछा. उन्होंने पूरी कहानी बता दी. 

ये सुनने के बाद कुंदन ने समीर का साथ खड़े शख्स से परिचय करवाया. वो अजीज़ मिर्ज़ा थे. सईद अख्तर मिर्ज़ा के छोटे भाई. वो समीर को सईद मिर्ज़ा से मिलवाने ले गए. उनका छोटा सा टेस्ट लिया गया. उसके आधार पर उन्हें मिला ‘नुक्कड़’ का खोपड़ी. टीवी शोज़ के अलावा समीर ने ‘जय हो’, ‘परिंदा’ और ‘पुष्पक’ जैसी फिल्मों में भी काम किया. समीर खाखर आखिर बार अमेज़न प्राइम वीडियो की सीरीज़ ‘फर्ज़ी’ में नज़र आए थे. समीर खाखर का एक रोल लोगों को काफी याद रहता है. गोविंदा की सुपरहिट फिल्म ‘राजाबाबू’ में उन्होंने अमावस नाम का किरदार निभाया था. 
 

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