साल 2026 के तकरीबन 7 महीने गुजर चुके हैं. इन सात महीनों में ही दिल्ली में नाबालिगों द्वारा किए गए क्राइम का आंकड़ा पिछले साल के आंकड़े को पार कर गया है. एक रिपोर्ट का दावा है कि पुलिस डेटा के मुताबिक, साल 2026 में अब तक दिल्ली में नाबालिगों द्वारा किए जाने वाले अपराधों में करीब 30% की बढ़त हुई है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 15 जून 2026 तक नाबालिगों से जुड़े 1404 केस दर्ज किए गए. जबकि, साल 2025 में इतने वक्त में 1080 मामले ही दर्ज किए गए थे.
दिल्ली में क्यों बढ़ रही 'नाबालिग क्रिमिनल्स' की तादाद? 7 महीने में पिछले साल का रिकॉर्ड टूट गया
दिल्ली में साल 2026 के पहले साढ़े पांच महीनों में नाबालिगों से जुड़े 1404 आपराधिक मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल की तुलना में करीब 30% अधिक हैं। लूट, हत्या की कोशिश, रेप और चोरी जैसे अपराधों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है.


इनमें लूट और डकैती के मामले सबसे ज्यादा बढ़े हैं. रिपोर्ट में साल 2026 में ये 161 बताए गए हैं, जबकि, साल 2025 में इस वक्त तक करीब 104 मामले ही दर्ज किए गए थे. यानी कि करीब 55% तक की बढ़त हुई है. हत्या की कोशिश वाले मामले इस साल 159 दर्ज हुए, जो साल 2025 में 103 थे. ऐसे मामले करीब 54% बढ़े हैं. रेप के मामलों में भी बढ़त दर्ज की गई है. साल 2025 में ऐसे 61 मामले दर्ज किए गए थे. साल 2026 की छमाही तक ये 86 तक पहुंच गए. ये बढ़त तकरीबन 41% की है.
नाबालिग आरोपियों से जुड़े हत्या के केस भी इस साल 100 हो गए, जो साल 2025 में 80 थे. इसके अलावा मारपीट या चोट पहुंचाने वाले मामले भी 105 (2025) से बढ़कर 141 (2026) हो गए.
नाबालिगों ने संपत्ति से जुड़े ज्यादा अपराध किए. इसमें चोरी, सेंधमारी के केस 278 (2025) से बढ़कर 334 (2026) हो गए. ये सब डेटा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो(NCRB) ओर से जारी किया गया है. NCRB ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली को उस लिस्ट में शामिल किया है, जहां सबसे ज्यादा अपराध होते हैं.
पुलिस ने नाबालिगों द्वारा किए जाने वाले अपराधों के कई कारण बताए हैं. इनमें स्कूल छोड़ना, नशा करना, दोस्तों का असर, अवैध हथियारों तक आसानी से पहुंच और संगठित आपराधिक नेटवर्क को ज्वॉइन करना शामिल है. जांच करने वालों ने आपराधिक गैंग्स में नाबालिगों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता भी जाहिर की है. क्योंकि, ऐसा माना जाता है कि जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम के तहत नाबालिगों को कानूनी तौर पर कम सजा मिलती है.
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