“पापा कहते हैं, बड़ा नाम करेगा...बेटा हमारा ऐसा काम करेगा…”
"आमिर का 'पापा कहते हैं' न गा पाने का अफ़सोस आज भी है मगर उदित नारायण..."
सुरेश वाडकर बोले- "बोलना नहीं चाहिए. जो हो गया वो गया. बुरा मान जाते हैं लोग. चाहे सच बोलो."


Aamir Khan और Juhi Chawla की पहली कमर्शियल हिट Qayamat Se Qayamat Tak का ये यादगार गाना, Udit Narayan के करियर का मील का पत्थर बना. मगर ये गाना उदित नारायण के लिए नहीं बना था. इसे Suresh Wadkar गाने वाले थे. मगर वो कहावत है ना, ‘बिल्ली से भाग से छीका टूटा’. यहां कुछ ऐसा ही हुआ, और ये गाना उदित नारायण के हिस्से आ गया. और इससे उन्हें बड़ा ब्रेकथ्रू मिला. पिछले दिनों जब सुरेश वाडकर दी लल्लनटॉप के ख़ास कार्यक्रम गेस्ट इन द न्यूज़रूम में आए, तो ये पूरा किस्सा सुनाया. कुछ लोग बुरा न मान जाएं, इस डर के साथ थोड़ा संभलकर ही सही, मगर मन की बात तो कही.
सुरेश वाडकर ने बताया,
"1992-93 के बाद ये जो गानों की फेहरिस्त आई ना, ये मैं गाने वाला था. पापा कहते हैं... बड़ा नाम करेगा. उस फिल्म के सारे गाने मैं गाने वाला था. मैं गया था आशा जी (आशा भोसले) के साथ US टूर पे. शोज़ के लिए. और वापस आकर रिकॉर्डिंग करने वाला था. तो जब मैं लौटा, तो वो गाना मैंने उदित की आवाज़ में आमिर खान के ऊपर सुना. थोड़ा सा गाना उदित की आवाज़ में रिकॉर्ड हुआ था. और म्यूजिक डायरेक्टर वो लाए थे फिल्म सेंटर में. तो आमिर के साथ उसकी (उदित नारायण की) आवाज़ बहुत मैच कर गई. अब मुझे आनंद-मिलिंद ने कहा कि आपके गाने रिकॉर्ड करने हैं. मैंने कहा उदित ने कितना ख़ूबसूरत गाया है यार ये. तब आनंद-मिलिंद ने कहा कि यहां मेकर्स भी यही बोल रहे हैं. कि नई आवाज़ है. नया एक्टर है."
फिर उदित नारायण की आवाज़ आमिर खान के साथ जुड़ गई. सुरेश वाडकर ने कहा.
“मैं नहीं था ना बॉम्बे में, तो डबिंग के लिए शायद उससे गवा लिया था. ऐसा उनका कहना था. आनंद मिलिंद का. बाक़ी भगवान जाने. तो मैंने कहा रहने दो इसका गाना. बहुत अच्छा गाया है. फिर उसकी आवाज़ जुड़ गई आमिर खान के साथ. और आमिर के लिए उदित नारायण ही गाता रहा. उसका भी एक बहुत कमाल का किस्सा है. (सुरेश वो किस्सा सुनाने ही लगे थे, कि पत्नी पद्मा ने ऑडियंस में से आवाज़ लगाई. और सुरेश ठिठक कर बोले) बोलना नहीं चाहिए… देखिए… हमारी इंडस्ट्री हेल्दी इंडस्ट्री नहीं है. मैं तो पब्लिकली बोल रहा हूं. बुरा मान जाते हैं लोग. चाहे सच बोलो.”
और अंतत: किसी का दिल न दुखे, इसके चलते सुरेश वाडकर ने ज़ुबां पर आई बात नहीं कही. हालांकि सुरेश वाडकर ने भी आमिर के लिए गाने गाए. मगर ‘पापा कहते हैं…’, के लिए उनका मानना है कि ये भी उनके करियर का एक माइलस्टोन साबित होता. उदित के साथ यही हुआ. उनकी आवाज़ ही स्क्रीन पर आमिर खान की आवाज़ बन गई...'लगान' के गाने ‘सुन मितवा…’ के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला. सुरेश वाडकर ने आमिर के लिए ‘दिल’ (1990), ‘जवानी ज़िंदाबाद’ (1990) और ‘राजा हिंदुस्तानी’ (1996) के गाने गाए.
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