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लॉकडाउन के बाद भारत को अब क्या करना चाहिए? पुलित्जर अवॉर्ड पा चुके एक्सपर्ट ने बताया

क्यों कह रहे हैं कि युवाओं को वापस काम पर जाना चाहिए?

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पुलित्जर अवॉर्ड से सम्मानित थॉमस फ्रीडमैन (दाएं)का कहना है कि जो लोग पहले से ही हल्के या बिना किसी लक्षण के कोविड -19 वायरस का शिकार हो चुके हैं उन्हें काम पर वापस जाना चाहिए. (फोटो-इंडिया टुडे-पीटीआई)
इंडिया टुडे ई-कॉन्क्लेव चल रहा है. कोरोना वायरस के दौर में अलग-अलग फील्ड के लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात की जा रही है. 28 अप्रैल को कॉन्क्लेव से जुड़े 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के फेमस कॉलमनिस्ट और तीन बार के पुलित्जर अवॉर्ड से सम्मानित थॉमस फ्रीडमैन. उनसे बात की 'इंडिया टुडे' के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने. थॉमस फ्रीडमैन ने कहा कि भारत को लॉकडाउन से अब हर्ड इम्युनिटी की तरफ बढ़ना चाहिए. भारत में शुरुआती दिनों में वायरस के चेन को तोड़ने के लिए लॉकडाउन एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन इसे लंबे समय तक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. थॉमस फ्रीडमैन ने कहा,
यह बेहद चुनौतीपूर्ण है, जब लोगों को अपने गांव लौटने के लिए कहा जाता है. दिन में बार-बार हाथ धोने के लिए कहा जाता है. यह वंचित और गरीब लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण है. जब उन्हें बताया जाता है कि आप बीमार महसूस करते हैं, तो डॉक्टर के पास जाएं, लेकिन भारत में 10 हजार लोगों पर एक डॉक्टर है. सोशल डिस्टेंसिंग भी बहुत बड़े तबके लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा रूम नहीं है.
थॉमस फ्रीडमैन ने आगे कहा,
भारत के पास विकल्प नहीं है, लेकिन उसे हर्ड इम्युनिटी की तरफ बढ़ना चाहिए, जो बुजुर्गों की सुरक्षा करेगा. युवाओं को वापस काम पर जाना चाहिए, ताकि वो कोरोना वायरस के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी डेवलप कर सकें.
फ्रीडमैन ने यह भी सुझाव दिया कि भारत में जो लोग पहले से ही हल्के या बिना किसी लक्षण के COVID-19 वायरस का शिकार हो चुके हैं, उन्हें काम पर वापस जाने की अनुमति देनी चाहिए. ये भी कहा कि उन्हें लगता है कि पीएम मोदी ने शुरुआत में संक्रमण की दर को बढ़ने से रोकने को लेकर अच्छा काम किया है. क्या है 'हर्ड इम्युनिटी' Herd शब्द का मतलब होता है झुंड. जब लोगों का एक बड़ा झुंड किसी संक्रामक बीमारी से इम्यून हो जाता है, यानी उस रोग का प्रतिरोधक हो जाता है, तो उसे हर्ड इम्युनिटी कहा जाता है. ये सिर्फ संक्रामक बीमारियों के लिए इस्तेमाल होता है. कोरोना वायरस के लिए भी ये कहा जा रहा है कि एक बार अगर काफी लोग इसकी चपेट में आकर ठीक हो गए, तो फिर ये वायरस उनसे आगे नहीं फैलेगा. इस तरह इम्यून हो चुके लोगों के पास अगर कमज़ोर इम्युनिटी वाले लोग भी हों, तो भी उन्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि ये वायरस उन तक नहीं पहुंच पाएगा. बड़ी संख्या में लोग इन्फेक्ट हों, ठीक हों और इस वजह से उनका शरीर इसके लिए इम्यूनिटी विकसित कर ले. जब ढेर सारे लोग इन्फेक्ट हो कर ठीक हो जाएंगे, तो उनसे भी ये वायरस आगे नहीं फैलेगा. वो एक सुरक्षात्मक दीवार की तरह काम करेंगे अपने आस-पास के लोगों के लिए. लेकिन ये विकल्प विवादित भी है, क्योंकि इसमें ज्यादा लोगों की जान जाने का खतरा है. कोरोना ट्रैकर
इस दिग्गज बिजनेस पत्रकार ने बताया, कोरोना के बाद दुनिया कैसे बदलेगी?

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