एक हुए हैं ज्ञानी. नाम हुआ फ्रायड. फ्रायड ये मानते थे कि हर आदमी में दो तरह की प्रवृत्ति होती है. एक इरोस, इरोस में प्यार, सेक्स, भूख-प्यास, नाम-दाम. ये सब आते हैं माने वो तमाम चीजें जिनके लिए आप जीते हैं. इसी इरोस से बना इरोटिक और दूसरी वो प्रवृत्ति जो आपको मौत की तरह खींचें. ऐसी हरकतें कराए जो आपको तबाह कर दे. आपकी जान खतरे में डाले. ये प्रवृत्ति हुई थांटोस. हालांकि थांटोस शब्द कभी फ्रायड ने इस्तेमाल नहीं किया. ये तो बाद में पॉल फेडर्न लेकर आए थे.हालांकि इरोस और थांटोस में हमेशा तनातनी सी चलती रहती है पर नाम इनका साथ ही लिया जाता है. कई जगह इरोस और थांटोस को साथ दिखाया-बरता जाता है. अमूमन इसमें इरोस को किसी सुंदर व्यक्ति और थांटोस को मौत के बाद के किसी प्रतीक के जरिए दिखाया जाता है. हड्डी, खोपड़ी, लाश, कांटा, यमदूत जैसा कोई, हथियार. ऐसा कुछ भी, किसी बहुत सुंदर चीज के साथ.
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जानिए कि इरोस और थांटोस शब्द आए कहां से
इरोस थे देवता-ए-इश्क़. मतलब प्रेम के खुदा. तमाम देवताओं में सबसे छोटे. हाथ में धनुष बाण लिए अपने पंखों पर उड़ते रहते. इनका फेवरेट टाइम पास है लोगों को अपने बाण मारकर प्यार में पड़वाना. इनके बारे में कहा जाता है कि अक्सर ये अपने मनोरंजन के लिए ऐसे लोगों को एक-दूसरे के इश्क में गिराते रहते हैं. जिनका कहीं से कोई मेल ही नहीं बैठता.
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थांटोस को ग्रीक कथाओं में मृत्यु का अवतार माना जाता है. थांटोस की अम्मा थीं रात की देवी निक्स और भाई नींद का देवता हाय्प्नोस. कुल जमा सारा खानदान काली शक्तियों टाइप था. ग्रीक कहानियां अगर आपने हॉलीवुड की फिल्मों के जरिए भी देखी होंगी. एक चीज समझ आई होगी कि वो लोग मृत्यु को बड़ी सही चीज मानते थे. बड़े धूमधाम से क्रियाकर्म करते थे. अब क्योंकि हर कोई तो युद्ध में मरता नहीं था. और हर किसी की मौत बड़ी शानदार नहीं होती थी . तो आम सी मौतों का देवता बना दिया गया थांटोस को. थांटोस उन्हें उठाता जो खांसते-खखारते यूं ही मर जाते थे.

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समझिए तो इरोस आपको ग्रीकों के कामदेव और थांटोस यमराज नजर आएंगे. ऐसे ही किरदारों का जिक्र उरम और थुरम के नाम से पाअलो कोएलो ने भी किया है द अलकेमिस्ट में. ऐसा ही एक शब्द है इरम,उर्दू में जिसका मतलब होता है जन्नत. माने कि वही काला और सफेद जहां दोनों साथ हों. अपनी सारी अच्छाई-बुराई लिए और इसमें कुछ धूसर न हो.
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