The Lallantop

फिल्म रिव्यू- है जवानी तो इश्क होना है

वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े की नई फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' कैसी है, जानें ये रिव्यू पढ़कर.

Advertisement
post-main-image
'है जवानी तो इश्क होना है' को वरुण धवन के पिता डेविड धवन ने डायरेक्ट किया है.

'है जवानी तो इश्क होना है' डेविड धवन की फिल्म है. उनकी फिल्मों का एक खास कलेवर होता है. जो ज़्यादा सोशल या पॉलिटिकल करेक्टनेस की फिक्र नहीं करतीं. देखते हुए मज़ा आना चाहिए, ये इकलौती अहर्ता होती थी. पब्लिक भी ज़्यादा नहीं सोचती थी. मगर इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में लोग अवेयर हो गए हैं. अब चीज़ों की चीर-फाड़ होती है. उस चीर-फाड़ में डेविड धवन की फिल्में सर्वाइव नहीं कर पाएंगी. अब उनकी फिल्मों को डेटेड कहा जाता है. मगर 'है जवानी, तो इश्क होना है' बोरिंग और अनफनी भी है. क्योंकि अब वो जोक्स लोगों को हंसी नहीं दिलाते. इस ब्लीक माहौल में उन्हें डार्क और रिलेटेबल ह्यूमर पसंद आने लगा है. दुनियाभर की फिल्में देखकर उन्होंने अपना खुद का टेस्ट डेवलप कर लिया है. अब उनके लिए सिनेमा सिर्फ एक्सकेप नहीं रह गया है. क्योंकि थिएटर में उन्हें फिल्में देखने के लिए हज़ारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं. इसलिए सिनेमा से उन्हें बदले में कुछ चाहिए. जो 'है जवानी तो इश्क होता है' डिलीवर नहीं कर पाती.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

ये कहानी है जस उर्फ जसविंदर आहूजा नाम के लड़के की. जिसकी शादी बानी नाम की लड़की से हुई है. पांच साल पहले हुई ये शादी टूट रही है. कोर्ट में डिवोर्स केस चल रहा है. वजह- जस अन-प्रोटेक्टेड सेक्स करना चाहता है. वो बाप बनना चाहता है. मगर क्यों? ये नहीं बताया जाता. रहा होगा उसका कोई कॉम्प्लेक्स. उतनी डिटेल्स स्क्रिप्ट में होती हैं. इस फिल्म को देखने के दौरान आपको कभी महसूस नहीं होगा कि इसकी कोई बाउंड स्क्रिप्ट रही होगी. ख़ैर, बानी से अन-ऑफिशियली अलग होने के एक महीने बाद जस को प्रीत नाम की महिला से प्यार हो जाता है. मगर असली ट्विस्ट तब आता है जब एक दिन जस को मालूम पड़ता है कि उसकी पत्नी और प्रेमिका, दोनों उसके बच्चे की मां बनने वाली हैं. अब वो इन दोनों महिलाओं से अपना ये राज़ कैसे छुपाएगा या उन्हें ये बात कैसे बताएगा, यही फिल्म का बेसिक प्लॉट है.

'है जवानी तो इश्क होना है' अजीब टाइप की फिल्म है. आपको समझ नहीं आता कि किस बात पर हंसना चाहिए और किस पर नहीं. क्योंकि हंसी, दोनों में से किसी पर नहीं आ रही है. मैं इस फिल्म से कोई उम्मीद लेकर नहीं गया था. फिर भी निराश होकर लौटा. ख़ैर, फिल्म में एक्टर्स की भीड़ है. वो आते हैं, अपने हिस्से के डायलॉग्स बोलते हैं और चले जाते हैं. यहां आपको स्टेपल डेविड धवन एक्टर्स दिखते हैं. चंकी पांडे, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, मनोज पाहवा. गोविंदा फिल्म में नहीं हैं. मगर फिल्म के नायक का नाम जसविंदर आहूजा है. तो आप समझ सकते हैं. दोस्तों के बीच में जिन जोक्स को PJs कहा जाता है वही डायलॉग्स इस फिल्म में इस्तेमाल किए गए हैं. मगर वो लैंड नहीं होते. सवा दो घंटे की फिल्म में बमुश्किल दो या तीन चुटकुले ऐसे हैं, जिन पर शायद हंसा जा सकता है. बाकी टाइम आपका एक्सप्रेशन ऐसा रहता है-

Advertisement
nawaz theatre meme
‘है जवानी तो इश्क होना है’ देखते हुए मैं…

इन सारे एक्टर्स के बीच जिमी शेरगिल के लिए आपको बुरा लगता है. उन्होंने पूजा हेगड़े यानी प्रीत के हरियाणवी गैंगस्टर भाई का रोल किया है. फिल्म के आखिर में एक सीन है, जहां ऑलमोस्ट पूरी स्टारकास्ट एक हॉस्पिटल के छत पर खड़ी है. पीछे जिमी शेरगिल खड़े हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वो यहां क्या कर रहे हैं. सेम यही चीज़ दर्शकों को भी फील होती है.

प्रीत के परिवार से मिलाने के लिए जस का किरदार एक फर्जी मां लेकर आता है. वो रोल मौनी रॉय ने किया है. उसे देखकर जस अपने दोस्तो को कहता है- "मैंने निरुपा रॉय कहा था, तू मौनी रॉय ले आया." यहां किसी भी चीज़ का कोई मतलब नहीं है. बस चीज़ें हो रही हैं. डेविड धवन अपने समय के दिग्गज फिल्ममेकर थे. मगर यहां वो रियलिटी से बिल्कुल ही आउट ऑफ टच लगते हैं. क्योंकि वो हैं. उनकी पिछली फिल्म 'कुली नंबर 1' 2020 में यानी 6 साल पहले रिलीज़ हुई थी.

वरुण धवन एक समय पर अपने दौर के इकलौते एक्टर थे, जिन्होंने अपने करियर में कोई फ्लॉप फिल्म नहीं दी थी. अब वो अपने करियर के ऐसे पड़ाव पर हैं, जहां उन्हें अपने फिल्मों के चुनाव पर बेहद ध्यान देने की ज़रूरत है. क्योंकि उनकी पिछली पांच से तीन फिल्में बुरी तरह फ्लॉप रही हैं. 'बॉर्डर 2' हिट हुई. मगर वो सनी देओल की फिल्म थी. प्लस 'बॉर्डर' के रिकॉल वैल्यू ने उसकी सफलता में बड़ी भूमिका निभाई.

Advertisement

कुल जमा बात ये है कि 'है जवानी तो इश्क होना है' दिखने में मॉडर्न फिल्म है. मगर इसके पांव अब भी नब्बे के दशक में गड़े हुए हैं. जब कोई चीज़ क्लिक नहीं करती, तो बिल्कुल ही क्लिक नहीं करती. इस फिल्म के साथ ऐसा ही हुआ है. गानों से लेकर परफॉरमेंसेज़ और स्टोरी, कोई भी चीज़ यहां काम नहीं करती. आप इस फिल्म को एंजॉय करना चाहते हैं. मगर इतनी माइंडलेस कॉमेडी को बस झेला जा सकता है. बर्दाश्त किया जा सकता है. हमने तार लिखा है, आप चिट्ठी समझना! 

वीडियो: फिल्म रिव्यू: कैसी है सनी देओल की 'बॉर्डर 2' फिल्म?

Advertisement