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क्या वाकई सुरेश वाडकर ने माधुरी दीक्षित से शादी का प्रपोजल ठुकरा दिया था?

सुरेश वाडकर ने कहा- "लोग कहते हैं कि मैंने माधुरी को इसलिए मना किया क्योंकि वो बहुत पतली थी."

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माधुरी के लिए सुरेश वाडकर ने पहला गाना फिल्म 'अबोध' (1984) में गाया था.

मशहूर प्लेबैक सिंगर Suresh Wadkar जितना मीठा गाते हैं, उतना ही मधुर बोलते भी हैं. चाशनी में डुबकी लगाए उनके शब्दों के बीच के वक्फों में भी वो मींड महसूस होता है, जिसे सुरेश गानों में बखूबी बरतते हैं. OCD के चलते सफ़ाई का जुनून है. और ये सफ़ाई बोलचाल में भी नज़र आती है. हाल ही में जब सुरेश वाडकर The Lallantop के ख़ास कार्यक्रम Guest In The Newsroom में आए, तो ज़िंदगी के सारे सफ़्हे पलटे. और जिस वाकए पर उंगली गई, उसे पूरी सच्चाई के साथ सुनाया. चाहे फिर वो Lata Mangeshkar के साथ बिगड़े समीकरण हों, या फिर Madhuri Dixit के साथ होते-होते रह गया रिश्ता. सुरेश वाडकर ने बड़ी साफ़दिली से हर मसले पर बात की. 

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ये किस्सा आम है कि सुरेश वाडकर को माधुरी की ओर से शादी का प्रस्ताव आया था. और सुरेश इनकार कर गए थे. इस बात का ज़िक्र इस बातचीत में भी हुआ. जैसे ही माधुरी का नाम आया, सुरेश वाड़कर ने कहा,

“हे भगवान! माधुरी तो मुझे किसी दिन ना... (फिर अपने सिर पर हाथ फेरते हुए बोले) वैसे ये आर्टिफीशियल लगे हुए हैं. मगर जितने भी बचे हैं, वो भी नोच लेगी वो. मेरी बहुत अच्छी फ्रेंड है. अच्छी कलीग है. और मुझे बहुत पसंद भी है वो. सॉरी पद्मा (सुरेश वाड़कर की पत्नी) के सामने बोलना पड़ रहा है. मगर उसको भी मालूम है ये चीज़.”

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ये बात कहां से चली, कैसे ये किस्सा आम हुआ, इसके जवाब में उन्होंने कहा,

“ये शैतानी अर्चना पूरन सिंह की है. वो भी मेरी बहन हैं. बहुत प्यार करती हैं. उन्होंने ये पता नहीं कहां से सुनकर इसको टीवी पर पब्लिकली बोल दिया. उस वक्त के बाद से मेरे जितने भी इंटरव्यू होते हैं, सबमें ये सवाल पूछा जाता है. मुझे हमेशा ऐसा डर लगता है, कि माधुरी किसी दिन मुझे मारेगी इसके लिए.”

सच क्या है, ये बताने की शुरुआत तो उन्होंने की. मगर कुछ संशय भी बना रहने दिया. उन्होंने कहा,

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“जब मैं एलिजिबल बैचलर था, तब वो मैट्रिमोनियल कॉलम आता था. तो मेरे घरवाले मेरे लिए लड़कियां देख ही रहे थे. बडी-बड़ी फैमिलीज़ से भी लड़कियों के मुझे प्रपोज़ल आए थे. हो सकता है उस वक्त कोई ऐसा किस्सा हुआ होगा. कि उनकी तरफ़ से कोई फोन-वोन आया होगा, उनके फ़ादर की तरफ से. मगर ये लिखकर आता है कि सुरेश वाडकर ने उसको (माधुरी को) इसलिए मना किया क्योंकि वो बहुत पतली थी. पतली तो थी वो. अगर अबोध पिक्चर आप देखेंगे, तो उसमें ऐसी पतली थी लड़की वो.”

इस प्रस्ताव को क्या सुरेश वाड़कर ने ठुकरा दिया? इसके जवाब में उन्होंने कहा,

“मैं कैसे मना करता? मगर तब तक पद्मा मेरी ज़िंदगी में आ चुकी थी. पद्मा मेरी स्टूडेंट रही है.”

सुरेश वाडकर को क्रिकेट का जुनून रहा है. रेडियो पर कान धरे वो क्रिकेट मैच सुना करते थे. गायकी कहीं भी उनके प्लान में नहीं था. मगर मिल में काम करने वाले मिट्टीपकड़ पहलवान पिता हमेशा से चाहते थे उनका बेटा भी अखाड़े में उतरे. साथ ही ये ख्वाहिश भी थी उनका राबता संगीत से बने. पिता क्रिकेट के उतने पक्ष में नहीं थे. इसलिए खेल छूट गया. और संगीत ही उनका जीवन बन गया. बकौल सुरेश वाड़कर, “पिताजी मिल से लौटें, और उनके कानों में तबले की आवाज़ न पडे़, तो कुत्ते जैसा मारते थे.” सुरेश वाड़कर तबलावादन और गायन, दोनों में ग्रेजुएट हैं. 

प्लेबैक सिंगिंग में उन्हें पहला मौक़ा दिया म्यूजिक डायरेक्टर रवींद्र जैन ने. गाना था फिल्म 'पहेली' (1977) से ‘सोना करे झिलमिल-झिलमिल’. इसके बाद उन्होंने ‘प्यासा सावन’, ‘प्रेम रोग’, ‘मासूम’, ‘डिस्को डांसर’, ‘सदमा’ और ‘उत्सव’ जैसी यादगार फिल्मों के गाने गाए. फिर ‘रंगीला’, ‘सत्या’, ‘माचिस’ और ‘कमीने’ में भी उनके गाए गीत मशहूर हुए. संगीत के क्षेत्र में इस योगदान के लिए उन्हें साल 2020 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया.

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