फिल्म गुरु (2007) के गाने माय्या माय्या.. में मल्लिका शेरावत.
#1. जब वो माधुरी के गाने 'एक दो तीन' पर नाचे और मां टोककर कहे
खाना पकाना सीख ले या कापी लेकर सकूल का पाठ पढ़ ल्ये.
मल्लिका के साथ भी ये हुआ. लेकिन ये दोनों चीजें उसके लिए बेड़ियां थीं, और नाचना-एक्टिंग करना आज़ादी. दिल्ली में डीपीएस मथुरा में कोएड शिक्षा लेने और बाद में मिरांडा कॉलेज जैसे आज़ाद ख़याल स्पेस ने उसे जमाने का सामना करने के पर्याप्त औजार दे दिए थे. वो एयरहोस्टेस बन गई. फिर फिल्मों में चली गई. चकला बेलन और सकूल के पाठ से ज्यादा माधुरी के गानों पर नाचना उसके ज्यादा काम आया.
#2. हस्बैंड और सास को जब ऐसी बहू चाहिए थी जो इंडिपेंडेंट
ख़यालों वाली हो लेकिन घर की हदों को भी समझे.
पायलट करण सिंह गिल से लव मैरिज की. लेकिन सात फेरों के बाद घर का खूंटा दिखाया जाता है. लेकिन उसे फिल्मों में जाना था. ग्लैमर की दीवानी थी. ससुराल वाले कहते हैं, हमने उसे बहुत प्यार दिया लेकिन बाद में उसके व्यवहार में बदलाव आ गया और हमारे लिए परेशानियां खड़ी हो गईं. करण गिल ने बाद में दूसरी शादी कर ली. उनकी मम्मी को इस बार ठीक बहू मिल गई. मल्लिका अपने सपनों का पीछा करते करते बराक ओबामा से मिल ली. हॉलीवुड फिल्म कर ली. जैकी चैन की हीरोइन बन गईं.

#3. लड़की की आंखें खुल जाए कि घर में पितृसत्ता उसे बांध रही है और
बाहर जाति, रुढ़ि वाला समाज उसे भेड़-बकरी जैसे ट्रीट करेगा.
हरियाणा के मोठ गांव में आज के दिन 24 अक्टूबर 1976 को मल्लिका का जन्म हुआ. पिता इंजीनियर थे. घर का माहौल पितृसत्ता वाला था. औसत, रुढ़िवादी, जातिवादी हरियाणवी परिवारों जैसा. वो समाज जहां लड़का अहम था, लड़़की गौण थी. इसलिए गर्भजांच के बाद पेट में ही मार दी जाती. जो पैदा हो भी जातीं तो इसलिए रख ली जाती कि बड़ी होकर मर्दों के बच्चे पैदा कर दे. मल्लिका के समाज के 'अच्छे घरों' की लड़कियां नौकरी नहीं करती थीं.
#4. पेरेंट्स की इज्जत के लिए लड़की शादी कर ले और उसके बाद
पति से पिटे या उसके काम से लौटने का इंतजार करे.
मल्लिका ने देखा था कि उनकी ज्यादातर कज़िन बहनों के साथ शादी के बाद मारपीट होती थी. इसका असर उन पर भी पड़ने लगा. उनकी कुछ सहेलियों ने भी सिर्फ अपने पेरेंट्स की इज्जत रखने के लिए शादियां कर लीं. उन्हें पढ़ाई पूरी नहीं करने दी गई. वे अपने पतियों का इंतजार करती रहती थीं. उस जीवन में रुपया-पैसा तो था लेकिन मल्लिका को पता था कि रुपया-पैसा आज़ादी का विकल्प नहीं हो सकता. इसी ने उनके प्रण को और मजबूत कर दिया. उन्होंने महसूस कर लिया कि उनकी सिर्फ एक जिंदगी थी और वे मुंबई एक्ट्रेस बनने के अपने सपने का पीछा करने के लिए घर से भाग गईं.
#5. बाप जब कहे, 'तू मेरे लिए मर गई,
अपने नाम के आगे से मेरा नाम हटा दे.'
पिता मुकेश लांबा ने मल्लिका से यही कहा जो तब तक रीमा लांबा हुआ करती थीं. लेकिन बाप के ऐसा कहने पर उन्होंने अपना फिल्मी नाम मल्लिका रखा और मां का सरनेम शेरावत लगाया. उनका ऐसा करना ठीक ही था क्योंकि जब वे अपने रिएलिटी शो बैचलरेट इंडिया की शूटिंग कर रही थीं और शो पर उनके पिता-मां भी आए तो भी उनका रवैया बिलकुल वैसा ही था जिसकी वजह से मल्लिका ने अपना घर छोड़ा था. जो संकीर्ण नजर पाल लेता है, वो नहीं बदलता. बदलता तो हमारे बीच रीमा लांबा नाम की एक्ट्रेस होती, मल्लिका शेरावत नहीं.
#6. फिल्मों में फीमेल लीड पर सारे कब्ज़े
जब करीना कपूर जैसे स्टार किड्स के हों.
मल्लिका की पहली फिल्म 17 लिपलॉक वाली 'ख्वाहिश' नहीं थी, बल्कि उससे एक साल पहले 2002 में रिलीज हुई 'जीना सिर्फ मेरे लिए' थी जिसमें तुषार कपूर हीरो थे लेकिन हीरोइन का स्पॉट खाली नहीं था. वो स्टार किड करीना कपूर के हवाले था. फिल्म में वो अच्छी संस्कारी लड़की बनी थीं और मल्लिका को मिला छोटा सा रोल जिसमें उनसे flaunt करवाया गया. बिना ब्रा का टॉप पहनवाया गया जो पूरे ऑफिस में उन्होंने ही पहना था और ऑफिस में ऐसे कपड़े भले ही न पहने जाते हों. लेकिन उनके जिस्म की ही जरूरत थी, अभिनय की नहीं. फिर भी पहली फिल्म में भी सीमित दृश्य में वे करीना से 19 नहीं थीं. जब यही दस्तूर दिखाई पड़ा तो अगली फिल्म में उन्होंने चुम्मियों की बारिश कर दी.
#7. दर्शक जब मूर्ख हों.
मल्लिका ये देख चुकी थीं कि चुम्मियां, हवस, सेक्स, अनैतिक औरत जैसे तत्व हैं जो उनके देश के दर्शकों को आकर्षित करते हैं. उसे भी वे सनसनी लिए देखते हैं, शारीरिक संबंधों को जीवन की किसी भी अन्य चीज की तरह नहीं. फिर उन्होंने इमरान हाशमी के साथ 'मर्डर' फिल्म की. इसमें भीगे होठ तेरे गाने ने उन्हें बहुत लोकप्रिय किया. इसमें भी एक लाइन थी जिसने दर्शकों की नैतिकता की नींद उड़ा दी थी. हीरो गाता है - "कभी मेरे साथ कोई रात गुजार, तुझे सुबह तक मैं करूं प्यार". सुनकर दर्शक को लगता था कितनी गंदी औरत है. पति है, फिर भी दूसरे आदमी के साथ मजे ले रही है. बिना मजे के रह नहीं सकती? कोई संस्कार नहीं? हवस के आगे घुटने टेक दिए हैं? खुल्लम खुल्ला इन पंक्तियों का हिस्सा है जिसमें सुबह तक बेशर्मी से सेक्स करने की बात हो रही है. इन मूर्ख दर्शकों ने 'बद्चलन' औरत को देखने के लिए सिनेमाघरों में कतार लगाई. अगर मूर्ख न होते तो जीवन और शारीरिक संबंधों को नैतिकताओं से न बांधते. मल्लिका के इन्हीं किरदारों को अलग ही नजरिए से देखते, उसे एक आर्ट के तौर पर सम्मान देते.
#8. ताकत और मर्दानगी में अंधे समाज के
ठेकेदार जब उसे मारने की कोशिश करे.
मल्लिका ने अक्टूबर 2006 में महिलाओं की स्थिति को लेकर हरियाणा व जाट समाज की कथित रूप से आलोचना की थी. लेकिन इतने बली लोग आलोचना तो सुनते नहीं हैं न. अपमान हो जाता है. इसी से आहत राजेश दलाल नाम के एक लड़के ने मल्लिका को मारने की योजना बनाई थी. हालांकि इस योजना में वो सफल नहीं हो पाया. उसके पांच साल बाद वो परोल जंप करने के चक्कर में पकड़ा गया. उसके ऊपर 13 आपराधिक मुकदमे थे. छोरे के पापा वकील थे और छोरा ग्रेजुएट भी था, फिर भी अकल इतनी न थी कि आलोचना का अर्थ समझे या उसे सुनकर सामाजिक सुधार की सोचे. मल्लिका ने अपने संघर्ष को जारी रखा. अगर सरवाइव करने के लिए आइटम सॉन्ग करने पड़े तो भी किए. लेकिन अपनी इंटरनेशनल छवि भी बनाई. ऐश्वर्या राय, कटरीना कैफ तो अपने सौंदर्य प्रसाधन ब्रैंड के न्यौते पर फ्रांस के कान फिल्म फेस्टिवल जाती हैं लेकिन मल्लिका अपनी फिल्म 'हिस्स' (2010) के प्रचार के लिए गईं वो भी असली अजगरों के साथ. अगले साल उनकी हॉलीवुड फिल्म 'पॉलिटिक्स ऑफ लव' भी रिलीज हुई जिसकी कहानी बराक ओबामा के चुनाव अभियान की पृष्ठभूमि वाली थी. अब उनकी चाइनीज़ फिल्म 'टाइम रेडर्स' भी आ रही है. वे एक ग्लोबल सेलेब्रिटी हैं.