अरविंद केजरीवाल का फेसबुक पेज दिखा. ब्लू टिक भी लगा है. लेकिन प्रोफाइल पिक्चर नजर नहीं आ रही. अब मुख्यमंत्री हैं. फोटो हटाए हैं तो ऐसे ही थोड़ी. वैसे भी आजकल सरकारें फेसबुक-ट्विटर से ही ज्यादा चल रही हैं. प्रदेश की प्रदेश जाने, फेसबुक संभालने में कोई कमी नहीं छोडी जाती. डिजिटल इंडिया यू नो. ये बहुत गंभीर बात है. केजरीवाल इतनी गंभीरता से दिल्ली को न लेते होंगे उतनी गंभीर. प्राइम टाइम वाली बहस होनी चाहिए. चार-पांच पैनलिस्ट बैठाकर. पर प्राइमटाइम के लिए रात का वेट करना होगा. लल्लन अभी बताएगा.
लल्लन ने वजह खोजनी चाही. पांच वजहें समझ आईं.
1. डर था, कोई इंक न फेंक जाए
केजरीवाल आजकल नेता कम निशानेबाजी का प्रैक्टिस बोर्ड ज्यादा समझे जाने लगे हैं. जो आता है तुक कर चला जाता है. उन्हें डर था कोई सामने न पाए तो फेसबुक पर ही स्याही न फेंक जाए. हटा ली फोटो.
2. आम आदमी हैं जी
केजरीवाल इतने आम हैं कि उन्हें फेसबुक पर लगाने को फोटो तक नहीं मिलती. एक बार उनने कहा भी था. मैं तो छोटा आदमी हूं जी. छोटे आदमी की फोटो भी फेसबुक की 160 बाय 160 से छोटी आ रही थी. अपलोड ही नहीं हो पाई.
3. क्योंकि केंद्र में मोदी की सरकार है
एक आम आदमी पार्टी वाले दोस्त से पूछा. जवाब आया. सरकार मोदी की है, जकरबर्ग मोदी के दोस्त हैं, मोदी की चलती है, उन्होंने ही हटवा दी होगी.
4. ठंड खत्म हो गई है, और आम का मौसम अभी आया नहीं है
कहते हैं कर्ण कवच-कुंडल के साथ पैदा हुए थे और केजरीवाल मफलर-स्वेटर के साथ. अब ठंड तो चली गई है. स्वेटर वाली फोटो आउट ऑफ फैशन हो गई. धर्मसंकट है क्या रखें क्या न रखें. तो कुछ नहीं रखा.
5. इस बार फिल्म का रिव्यू नहीं दिया है
'तेरे बिन लादेन' आई. 'अलीगढ़' आई. 'गॉड ऑफ इजिप्ट' आई. केजरीवाल ने अब तक किसी का रिव्यू नहीं दिया. कसम खाई है. जब तक अगला मूवी रिव्यू नहीं दूंगा. चेहरा नहीं दिखाऊंगा. बस हटा ली फोटो.