The Lallantop

हेलिकॉप्टर से उड़ने वाले ये नेताजी कहते हैं, 'वोट मांगने में शर्म आती है'

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017.

Advertisement
post-main-image
करतार सिंह

साल 1997. मेरठ जिले की एक तहसील बागपत शहर बन चुकी थी. आज बागपत NCR में शामिल है. NCR यानी नेशनल कैपिटल रीजन यानी दिल्ली से नजदीक एक शहर यानी नोएडा-गुड़गांव वाली हैसियत का एक शहर. यमुना किनारे बसे इस शहर का जिक्र महाभारत में मिलता है. लेकिन, इतिहास का सिर्फ एक ही वर्जन नहीं होता. और भी कई कहानियां हैं.

Advertisement

यहां के किसान सबसे ज्यादा गन्ने की खेती करते हैं. गन्ने मिल में जाते हैं, लेकिन लोगों को पेमेंट नहीं मिलता. दो साल से नहीं मिला. यहां प्राइवेट हॉस्पिटल तो हैं, लेकिन पढ़ाई के इंतजाम दोयम दर्जे के हैं. पिछले साल अक्टूबर में यहां के एक गांव में छह लोगों ने एक घर में घुसकर तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. बड़ा बवाल हुआ था. SHO सस्पेंड कर दिए गए थे. पार्टियों पर नजर डालें, तो बीएसपी और रालोद मजबूत नजर आती हैं. पिछले चुनाव में बीजेपी की बड़ी बुरी गति हुई थी. आइए, देखें इस बार क्या चल रहा है बागपत में.


पिछले चुनाव का हाल

2012 में 2,63,492 वोटों में से 1,64,882 वोट पड़े थे. 56,957 वोटों के साथ बीएसपी की हेमलता चौधरी जीती थीं. रालोद के कौकब हमीद 49,294 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे. सपा के साहब सिंह तीसरे नंबर पर 41,535 वोटों के साथ और चौथे नंबर पर पीस पार्टी के जयभगवान 5,891 वोटों के साथ. बीजेपी को 5 हजार वोट भी नहीं मिले थे. बीजेपी ने नीरज को उतारा था, जिन्हें 4,910 वोट मिले थे. पिछली बार हारने वाले नवाब कौकब हमीद 2007 और 2002 में जीतने के साथ 5 बार विधायक रह चुके हैं.

Advertisement

बागपत- 2012 विधानसभा चुनाव का हाल


बागपत के कुछ किस्से

बागपत में रालोद बहुत मजबूत रही है. हालांकि, पिछली बार बीएसपी ने इसे बहुत कमजोर किया, लेकिन अगर इस बार रालोद हारी और बीजेपी जीती, (हालांकि, बसपा भी मजबूत है) तो चौधरी अजित सिंह को शायद मार्च 2016 का एक वाकया याद आए.

मार्च 2016 में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें अजित सिंह बैठे हैं. बहुत से लोग घेरकर खड़े हैं. उसमें से किसी ने योगेश धामा को टिकट देने की बात कही. कहा कि वो हमारे सुख-दुख में खड़े होते हैं. उनको टिकट नहीं मिला, तो वो लोग किसी और कैंडिडेट को वोट नहीं देंगे. अजित सिंह भड़क गए. बोले कि योगेश धामा को किसने बनाया, योगेश को गटर से उठाकर नेता बनाया और कहां से कहां पहुंचा दिया. तैश में उठकर खड़े हो गए और कमर पर हाथ रखकर बोलने लगे. गुस्से से बोले कि जाओ सब लोग, मुझे नहीं लड़ना चुनाव.

Advertisement

यहां आज भी वोट चौधरी चरण सिंह के नाम पर ही मांगे जाते हैं. कोई कहता है कि चौधरी उनके सपने में आए थे. कोई कहता है कि उसके बेटे को जिताकर चौधरी की लाज रख लो.

इस चुनाव के कैंडिडेट्स

बीजेपी

तीन बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहे योगेश धामा नवंबर 2016 में बीजेपी में आ गए थे. वो रालोद को नुकसान पहुंचाएंगे. चूंकि भाजपा पहले ही कमजोर रही है, तो भाजपा में बाहरी से असंतोष जैसा कुछ नहीं होना चाहिए.

रालोद


"attachment_55247" align="aligncenter" width="600"

Advertisement