समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव करहल से ही अपने जीवन का पहला चुनाव लड़ने जा रहे हैं. उन्होंने भी सोमवार को पर्चा भर दिया. आजतक से जुड़े अभिषेक मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक अखिलेश के बाद एसपी सिंह बघेल अचानक कलेक्टोरेट ऑफिस पहुंच गए और अपना नॉमिनेशन फाइल कर दिया. उस समय उनके साथ BJP जिला अध्यक्ष प्रदीप चौधरी मौजूद थे.

कलेक्टोरेट ऑफिस में एसपी सिंह बघेल. (तस्वीर- अभिषेक मिश्रा/आजतक)
कभी मुलायम सिंह की सुरक्षा में तैनात थे
सत्य पाल सिंह बघेल केंद्र सरकार में विधि एवं न्याय राज्यमंत्री हैं. फिलहाल वे आगरा से भाजपा के सांसद हैं. कभी यूपी के पूर्व सीएम और अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह की सुरक्षा में तैनात रहे एसपी सिंह अब उनके बेटे को चुनाव में चुनौती देने जा रहे हैं.एसपी सिंह बघेल यूपी के औरैया जिले के भटपुरा गांव के निवासी हैं. मिलिट्री साइंस से एमएससी, एलएलबी और इतिहास में पीएचडी की डिग्री लेने वाले एसपी सिंह बघेल आगरा कॉलेज में असोसिएट प्रोफेसर रहे हैं. वे पुलिस में भी सेवाएं दे चुके हैं. 1989 में वो यूपी के तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव की सुरक्षा में बतौर दरोगा तैनात थे. आजतक से जुड़े सुधीर शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक मुलायम सिंह यादव, एसपी सिंह बघेल के काम से काफी प्रभावित थे. बाद में 1998 में उन्होंने बघेल को एटा जनपद की जलेसर लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़वाया था. एसपी सिंह ने भी मुलायम को निराश नहीं किया. चुनाव में जीत दर्ज कर उन्होंने सपा में अपनी छाप छोड़ी और लोकसभा पहुंचे.
1998, 1999, 2004 के लोकसभा चुनावों में भी बघेल सपा के ही टिकट पर सांसद बने. लेकिन बाद में 'साइकिल' छोड़ बसपा के 'हाथी' पर सवार हो गए. लेकिन इसका उन्हें चुनावी फायदा नहीं मिला. 2009 में एसपी सिंह बघेल फिरोजाबाद लोकसभा से चुनाव लड़े और सपा के प्रत्याशी से हार गए. बाद में 2010 में बसपा ने उन्हें राज्यसभा में भेजा. 2014 के लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद लोकसभा की सीट से वो फिर प्रत्याशी बने. इस बार उनके सामने थे सपा के रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव. उन्होंने बघेल को एक लाख से अधिक वोटों से हराया.
हालांकि इसके बाद भी बसपा ने बघेल पर भरोसा बनाए रखा और उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया. लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने BJP का दामन थाम लिया. 2017 के विधानसभा चुनाव में एसपी सिंह बघेल भाजपा के टिकट पर टूंडला विधानसभा से चुनाव लड़े. इस बार वो 40 हजार से अधिक वोटों से विजयी हुए. योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में उन्हें पशुधन मंत्री बनाया गया था.
फिर आए 2019 के लोकसभा चुनाव. BJP ने बघेल को आगरा शहर सीट से प्रत्याशी घोषित किया. इस बार वो जीते और केंद्रीय मंत्री भी बने. पीएम नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में उन्हें विधि एवं न्याय राज्यमंत्री का पद दिया गया.
एसपी सिंह बघेल का सियासी सफर बताता है कि वो किसी एक सीट से चुनाव जीतने वाले नेता नहीं हैं. 1998 से लेकर 2019 तक बघेल ने अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों से इलेक्शन लड़ा और ज्यादातर मौकों पर उन्होंने जीत दर्ज की. ये बड़ी वजह है कि सपा प्रमुख के खिलाफ BJP ने अपने दलित केंद्रीय मंत्री पर भरोसा जताया है.
हालांकि करहल से अखिलेश को हराना एसपी सिंह बघेल के आसान बिल्कुल नहीं होने वाला है. इस सीट पर यादव वोट सबसे ज्यादा हैं और लंबे समय से यहां सपा का दबदबा रहा है. वहीं एसपी सिंह बघेल की जातिगत पहचान को लेकर थोड़ा कन्फ्यूजन है. वो बीजेपी के ओबीसी मोर्चा के प्रमुख रहे हैं, लेकिन खुद को दलित बताते हैं. पिछली बार उन्होंने दलित कैंडिडेट के रूप में ही विधानसभा चुनाव लड़ा था.













