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पश्चिम यूपी: BJP प्रत्याशियों का जगह-जगह विरोध, कहीं काले झंडे दिखाए, कहीं चले पत्थर-कीचड़

विरोध होने पर BJP नेता ने कहा, 'ये हमारे लोग हैं, मैंने उन्हें माफ किया.'

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वोटिंग की शुरुआत पश्चिमी यूपी से होनी है. (सांकेतिक फोटो: सोशल मीडिया)
उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से विधानसभा चुनावों के लिए वोटिंग का सिलसिला शुरू हो जाएगा. मतदान की शुरुआत पश्चिमी यूपी से हो रही है. चुनावी नजरिए से इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. बड़े-बड़े दिग्गजों ने पश्चिमी यूपी में चुनाव प्रचार के लिए खुद को पूरा झोंक दिया है. इस बीच खबरें हैं कि पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में बीजेपी उम्मीदवारों को काले झंडे दिखाने और उनके ऊपर कीचड़ फेंकने के दर्जन भर से अधिक मामले सामने आए हैं. कई जगहों पर उनके ऊपर पथराव भी हुआ है. इन मामलों में FIR भी दर्ज हुई है. 'ये हमारे ही लोग हैं' अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने इस बारे में विस्तार से रिपोर्ट की है. रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का एक बड़ा मामला 24 जनवरी का है. इस दिन शाम को सिवलखास से बीजेपी उम्मीदवार मनिंदरपाल सिंह के काफिले पर चूर गांव में हमला हुआ. मनिंदरपाल के मुताबिक उनकी गाड़ी पर पत्थरबाजी हुई. हालांकि, उन्होंने हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं कराई. पुलिस ने खुद 20 लोगों के खिलाफ नामजद और 65 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया.
मनिंदरपाल सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनके काफिले में शामिल सात गाड़ियों पर पत्थरबाजी की गई. गाड़ियों को काफी नुकसान पहुंचा. हालांकि, हमलावरों के बारे में उन्होंने यह भी कहा,
"ये हमारे ही लोग हैं, मैंने उन्हें माफ कर दिया. लेकिन लोकतंत्र में वोट मंगने वालों के साथ ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए."
 
मनिंदरपाल सिंह के ऊपर हुए हमले को लेकर पुलिस ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया है कि हमलावर राष्ट्रीय लोक दल से संबंध रखते हैं. पुलिस ने ये बात इस आधार पर कही है क्योंकि हमलावरों के हाथ में राष्ट्रीय लोक दल के झंडे थे. दूसरी तरफ आरएलडी के एक प्रवक्ता ने इसे बीजेपी की साजिश बताया है. प्रवक्ता ने बताया कि ये बीजेपी का सहानुभूति लेने का एजेंडा है. अगर राष्ट्रीय लोक दल के लोगों को हमला करना होता, तो वो झंडे लेकर ऐसा क्यों करते. कहीं दिखाए काले झंडे, तो कहीं हुई नारेबाजी पश्चिमी यूपी में इसी तरह के और भी मामले सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 27 जनवरी को मुजफ्फरनगर की खतौली सीट से बीजेपी के वर्तमान विधायक विक्रम सैनी के खिलाफ भैंसी गांव में किसानों ने भाजपा विरोधी नारे लगाए. किसानों ने कहा कि विक्रम पांच साल बाद इस इलाके में आए हैं. दरअसल सैनी ने दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों की आलोचना की थी. जिसके बाद भी भैंसी के किसानों ने उनका विरोध किया था.
यूपी के मुज्जफ़रनगर जिले में भाजपा का चुनाव प्रचार करते गृह मंत्री अमित शाह (सांकेतिक फोटो: पीटीआई)
यूपी के मुज्जफ़रनगर जिले में भाजपा का चुनाव प्रचार करते गृह मंत्री अमित शाह (सांकेतिक फोटो: पीटीआई)

खतौली के ही मुनव्वर कलां गांव में कुछ दिनों पहले भी किसानों ने विक्रम सैनी का विरोध किया था. इसी तरह बागपत जिले की छपरौली सीट से खड़े बीजेपी उमीदवार सहेन्द्र रामला का भी किसानों ने विरोध किया. शुक्रवार, 28 जनवरी को छपरौली के दाह गाँव में रामला को किसानों ने काले झंडे दिखाए. साथ ही उसी दिन रामला को निरूपद गांव में भी नहीं घुसने दिया गया. किसान नेता क्या बोले? किसानों द्वारा बीजेपी नेताओं के विरोध के मामले पर बुधवार, 26 जनवरी को भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों का समर्थन किया. बिजनौर के तहरपुर गाँव में राकेश टिकैत ने कहा,
"अगर किसानों की समस्याओं को नजरंदाज करेंगे, तो सरकार के प्रतिनिधियों को इस तरह के विरोध का सामना करना है पड़ेगा."
 
किसान नेता राकेश टिकैत
किसान नेता राकेश टिकैत

राकेश टिकैत ने ये भी कहा कि अगर किसानों को अपनी फसल आधे दाम में बेचने से कोई दिक्कत ना हो, तो वो बीजेपी को ही वोट दें. हालांकि, इससे पहले राकेश टिकैत ने कहा था कि वो उत्तर प्रदेश चुनाव के मद्देनजर किसी खास पार्टी के समर्थन में नहीं है.

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