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बुलंदशहर से ग्राउंड रिपोर्ट: 'अखिलेश ने काम तो किया, मगर वोट हाजी को ही जाएगा'

यूपी चुनाव, बुलंदशहर की सदर सीट से आंखों देखा माहौल.

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फोटो - thelallantop

विधानसभा सीट: बुलंदशहर सदर रिपोर्टिंग: टीम मोती

उम्मीदवार: हाजी अलीम (बीएसपी) वीरेंदर सिरोही (बीजेपी) शुजात आलम (सपा) गुड्डू पंडित (आरएलडी)

शहर में उस नहर का कोई नाम नहीं है. पर आप यहां से नहीं हैं तो इसे वलीपुरा नहर कह सकते हैं. यही वो लकीर है जो इस विधानसभा सीट को दो हिस्सों में बांटती है. यहां शहरी एरिया बहुत कम है और अधिकतम नहर के इसी तरफ है. 150 से ज्यादा गांव हैं. लगभग 65 फीसदी देहाती वोटर है. लेकिन ये भौगोलिक आंकड़े इस रपट में उतने ही अप्रासंगिक हैं, जितना कांग्रेस-सपा गठबंधन का इस सीट पर असर.
ER4A1782 वलीपुरा नहर. फोटो: TheLallantop.com

यहां शहर और गांव का वोटिंग पैटर्न अलग-अलग नहीं है. तयशुदा नियम की तरह जाति-बिरादरी के नाम पर ही वोट जाता है. हालांकि लोग चुनाव और अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को लेकर खूब उत्साहित दिखे. आप यूपी इलेक्शन कवर करने निकलें तो शुरुआत ऐसी ही अपेक्षित होती है.
इस सीट पर कुल 3 लाख 81 हजार वोट हैं, जिनमें एक लाख के करीब मुस्लिम हैं. उसके बाद 40 हजार जाटव हैं. ये गठजोड़ बसपा के हाजी अलीम को बाकी उम्मीदवारों के मुकाबले कागजों पर काफी मजबूत बना देता है.
ER4A1884 फोटो: TheLallantop.com

यहां 35 हजार लोध वोट है जो कल्याण सिंह के घटते असर के बावजूद अब भी बीजेपी के माने जाते हैं. जाट आबादी 23 हजार है और बीजेपी ने जाट उम्मीदवार (वीरेंदर सिरोही) को दूसरी बार टिकट दिया है. पिछली बार सिरोही 6-7 हजार के अंतर से हाजी अलीम से हार गए थे. हालांकि 17 हजार ब्राह्मण और 18 हजार वैश्य वोट के साथ सिरोही हैं.
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गुड्डू पंडित ने सपा में रहते हुए MLC चुनावों में बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, जिसके बाद उन्हें 'माया मिली न राम'. सपा से 'कट लो' की पर्ची मिला और बीजेपी ने भी अपने शामियाने का टिकट नहीं दिया. फिर उन्होंने 'नलका' पकड़ लिया. नलका वेस्ट यूपी में 'नल' यानी हैंडपंप को बोलते हैं जो आरएलडी का चुनाव निशान है. गुड्डू पंडित अब बुलंदशहर सदर से आरएलडी के टिकट से लड़ रहे हैं. यह उनका तीसरा चुनाव है. यह उनकी तीसरी पार्टी है. वो अपनी बिरादरी के बूते कुछ ब्राह्मण और अपनी पार्टी के बूते कुछ जाट वोट काटेंगे और इस तरह बीजेपी को कमजोर करेंगे. लोकल बसपा कार्यालय में जो प्रचार पर जाने से बच गए जो इक्का-दुक्का लोग मिले, उनसे इसका जिक्र किया तो वे अपनी मूंछों में मुस्कुराने लगे.
"attachment_55401" align="alignnone" width="720"ER4A1801 बुलंदशहर-जेवर रोड.

हालांकि गुड्डू पंडित के बारे में एक थ्योरी ये भी है कि उन्होंने कुछ जगहों पर बीजेपी का संगठन ही हाइजैक कर लिया है. उनके साथ प्रचार में जुटे लोगों में कुछ मोदी समर्थक भी हैं. एक राष्ट्रीय अखबार के सीनियर पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चमत्कार हुआ तो हो सकता है कि गुड्डू पंडित और हाजी अलीम में ही मुख्य मुकाबला हो जाए. क्योंकि गुड्डू पंडित की छवि शुरू से हाजी अलीम विरोधी रही है. जब गुड्डू पंडित बसपा में थे तब भी हाजी अलीम से उनका छत्तीस का आंकड़ा रहा है. इसलिए अलीम के खांटी विरोधी कमल के बजाय गुड्डू पंडित के पास भी जा सकते हैं. गुड्डू पंडित की बाहुबली छवि भले ही हो, लेकिन यहां वो आदमी जनता के बीच घुला-मिला है और कुछ-एक मुस्लिम इलाकों के सुख-दुख में भी जाते हैं. इन्हीं पत्रकार महोदय ने कहा, 'भाई साहब इतना नौटंकी आदमी है कि आप देखना ये चुनाव आते आते कुछ मुसलमानों के वोट भी ले आएगा.' इन्होंने ही ये भी कहा कि शुजात आलम फाइट में नहीं है और अभी जो दिख रहा है, वह बाल-सुलभ उत्साह है, जिसका निर्णायक असर नहीं है.
फोटो: TheLallantop.com फोटो: TheLallantop.com

आह कि हम अंतत: समीकरणों पर ही बात करते रह जाते हैं, समीकरणों पर बात करने के लिए छोड़ दिए जाते हैं. बाकी सब चीज़ें ‘गिवेन’ हैं. युवाओं के सामने शिक्षा और रोजगार की समस्याएं बाकी जगहों की तरह ही हैं. डीएवी डिग्री कॉलेज में एक लड़के ने कहा कि मुझे बस नौकरी दिलवा दीजिए. कुछ न हो तो पुलिस की भर्तियां निकलवा दीजिए. नए लड़कों में दिल्ली में नौकरी करने वालों की तादाद कम नहीं है, जो हफ्ते की छुट्टी में यहां आ पाते हैं. हल्की सी बारिश जिला अस्पताल के परिसर में इतना पानी जमा कर सकती है कि वहां मच्छर और कुव्यवस्था शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के साथ रह सकें.
इसी तरह की दो-चार बातें और जोड़ लें, जिन पर पीड़ित-प्रताड़ित भी अब बात नहीं करते.
देखिये बुलंदशहर से ग्राउंड रिपोर्ट
https://www.youtube.com/watch?v=HHdW7WCdARQ
शेष शुभ है.
लोग उत्सव का आनंद ले रहे हैं.
जान लीजिए कि हम आपके शहर में कब आ रहे हैं
https://www.youtube.com/watch?v=VWIxUBCT9so
groundreportBulandshahar

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