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प्रियंका गांधी ने मोदी के सामने लड़ने से क्यों मना किया, सैम पित्रोदा ने बताया

क्यों वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ रही हैं प्रियंका, पता चल गया.

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प्रियंका गांधी के वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ने को लेकर कांग्रेस के नेता सैम पित्रोदा ने बड़ा बयान दिया है
पीएम मोदी ने 26 अप्रैल को वाराणसी से अपना नामांकन भर दिया. इससे एक दिन पहले यानी 25 अप्रैल को मोदी ने 7 किलोमीटर लंबा रोड शो किया था. पीएम मोदी के खिलाफ प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की चर्चा पिछले कई दिनों से चल रही थी. लेकिन 25 अप्रैल को अचानक कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार का एलान कर दिया. 2014 के लोकसभा चुनाव में अपनी जमानत जब्त करा चुके अजय राय पर कांग्रेस ने एक बार फिर दांव लगाया है. अजय राय को लगभग 75 हजार वोट मिले थे. वह तीसरे नंबर पर रहे थे. इस बीच प्रियंका गांधी के वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ने को लेकर कांग्रेस के नेता सैम पित्रोदा ने बड़ा बयान दिया है. इंडियन ओवरसीज कांग्रेस अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा कि वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला प्रियंका गांधी का खुद का था. एक सवाल के जवाब में पित्रोदा ने ये बात कही. सैम पित्रोदा ने कहा-
'पार्टी अध्यक्ष ने प्रियंका गांधी पर फैसला छोड़ दिया था. उन्होंने (प्रियंका) सोचा कि एक सीट पर फोकस करने की बजाय पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है उस पर फोकस करें. तो फाइनली यह उनका फैसला था.'
सैम पित्रोदा से जब पूछा गया कि अगर राहुल गांधी दोनों सीट से जीत जाते हैं तो क्या एक सीट से प्रियंका गांधी चुनाव लड़ेंगी? इसके जवाब में पित्रोदा ने कहा-
'रिजल्ट आने के बाद हम इस बारे में फैसला करेंगे'
21 अप्रैल को मीडिया से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा था-
'अगर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी कहेंगे तो मैं बनारस से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं.'
  प्रियंका गांधी कांग्रेस की महासचिव हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश की 40 सीटों की जिम्मेदारी उनके पास है. 23 जनवरी, 2019 को प्रियंका गांधी  आधिकारिक तौर पर कांग्रेस में शामिल हुई थीं. प्रियंका गांधी यूपी में कांग्रेस के उम्मीदवारों के पक्ष में रोड शो और जनसभाएं कर रही हैं. ऐसे में अगर वो वाराणसी से चुनाव लड़तीं, तो और सीटों पर वक्त नहीं दे पातीं. वहीं सपा-बसपा-आरएलडी का गठबंधन पहले ही इस सीट पर शालिनी यादव को पीएम मोदी के खिलाफ उतार चुका है. शालिनी यादव पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता श्यामलाल यादव की पुत्रवधू हैं और बनारस से मेयर का चुनाव लड़कर हार चुकी हैं.
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