समाजवादी पार्टी का झगड़ा लखनऊ से निकलकर दिल्ली पहुंच गया है. सोमवार को इलेक्शन कमीशन के पास पहुंचे मुलायम सिंह यादव और रामगोपाल यादव ने अपने-अपने कागज जमा करके साइकिल चुनाव चिन्ह पर दावा ठोंका, लेकिन रामगोपाल की तैयारी जरा एडवांस थी. उन्होंने इलेक्शन कमीशन को एक विकल्प भी सुझा दिया. मोटरसाइकिल.
तो अखिलेश का चुनाव चिह्न बदल दिया रामगोपाल ने
चुनाव आयोग ने साइकिल चुनाव चिन्ह फ्रीज किया, तो नए निशान पर ही लड़ना पड़ेगा न.

अखिलेश के नेतृत्व वाली पार्टी को 'मोटरसाइकिल' चुनाव चिन्ह मिल सकता है.
मुलायम की नजर में सबसे बड़े विलेन रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग से कहा है कि विवाद की स्थिति में अगर साइकिल चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया जाता है, तो वो मोटरसाइकिल का निशान लेना पसंद करेंगे. रामगोपाल ने EC को पार्टी के नामों को लेकर भी कई विकल्प दिए हैं, जिनमें से एक 'प्रोग्रेसिव समाजवादी पार्टी' है.
मुलायम ने कोई ऑप्शन नहीं दिया है. कहा है कि इलेक्शन कमीशन ही देगा, जो देगा.
असल में यादव कुनबे की लड़ाई में अगर कोई समाधान नहीं निकला, तो EC चुनाव चिन्ह फ्रीज कर देगी, जिसके बाद मुलायम और अखिलेश, दोनों खेमों को नए चुनाव चिन्ह दिए जाएंगे. ऐसे में 2017 का विधानसभा चुनाव दोनों को नए चुनाव चिन्हों पर लड़ना पड़ेगा. अगर दोनों अलग-अलग लड़ते हैं.

इससे पहले दोपहर में EC के पास गए मुलायम ने भी चुनाव निशान साइकिल और पार्टी के अध्यक्ष पद पर दावा किया था. उन्होंने कहा कि असली पार्टी के असली अध्यक्ष वही हैं. साथ ही, रामगोपाल के बारे में कहा कि 'उन्हें पार्टी में वापस लेने की अफवाह तो सिर्फ ट्विटर पर फैली थी. उन्होंने तो ऐसा कोई फैसला लिया ही नहीं है और इसकी कोई कानूनी मान्यता भी नहीं है.'
https://www.youtube.com/watch?v=AJCmImuMRM8वहीं बेटे अखिलेश ने EC को जो कागज सौंपे हैं, उनमें एक जनवरी को हुए समाजवादी पार्टी के अधिवेशन को लीगल बताते हुए खुद को सपा का अध्यक्ष होने का दावा किया गया है.
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