जो लोग मेहनत कर अपनी जगह बना रहे हैं, उनके बदले ऐसे लोगों को तवज्जो मिल रही है. पार्टी के लिए मैंने गालियां और पत्थर खाए हैं, लेकिन उसके बावजूद पार्टी में रहने वाले नेताओं ने ही मुझे धमकियां दीं. जो लोग धमकियां दे रहे थे, वह बच गए हैं. इनका बिना किसी कड़ी कार्रवाई के बच जाना काफी दुर्भाग्यपूर्ण हैं.
चिट्ठी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मथुरा में जब प्रियंका चतुर्वेदी पार्टी की तरफ से राफेल विमान सौदे को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने गई थीं. तब स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उनके साथ बदसलूकी की थी. इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत कांग्रेस आलाकमान से की. फिर जाकर सभी कांग्रेस नेताओं पर अनुशानात्मक कार्रवाई हुई थी. सभी को पार्टी से निकाल दिया गया था.

1 सितंबर को मथुरा के इसी प्रेस कान्फ्रेंस में प्रियंका चतुर्वेदी के साथ बदसलूकी की घटना हुई थी.
लेकिन फिर सभी के माफी मांगने और खेद जताने पर पार्टी ने उन्हे उनके पदों पर बहाल कर दिया. चिट्ठी में ये बातें लिखी गई हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की सिफारिश के बाद इन सभी कार्यकर्ताओं को बहाल किया गया है. क्योंकि सिंधिया पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और लोकसभा चुनाव के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी हैं.
ये पूरा मामला 1 सितंबर 2018 का है जब राफेल विवाद को लेकर कांग्रेस केंद्र सरकार पर हमलावर थी. देशभर में पार्टी के नेता मोदी सरकार के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे. उसी सिलसिले में प्रियंका चतुर्वेदी मथुरा में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने गई थीं. पहले प्रियंका का कार्यक्रम ज़िला कांग्रेस कमेटी के ऑफ़िस में होना था. लेकिन नेताओं के आपसी झगड़े की वजह से इसे एक होटल में कर दिया गया. फिर वहां प्रियंका चतुर्वेदी के साथ बदसलूकी की घटना हुई थी.










