प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल को कोलकाता के थांतानिया कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की. यह 300 साल पुराना मंदिर है, जो मां काली को मांसाहारी प्रसाद चढ़ाने की अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है. मंदिर में पूजा करने के बाद पीएम मोदी शहर में होने वाले एक रोड शो के लिए रवाना हो गए. उनका यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब राज्य में खान-पान की संस्कृति को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है.
कोलकाता के कालीबाड़ी मंदिर में PM मोदी ने की पूजा, पता है यहां मांसाहारी प्रसाद क्यों चढ़ता है?
West Bengal Election 2026: पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब बंगाल में खान-पान के कल्चर को लेकर बहस छिड़ी हुई है. Kalibari Temple में मां काली को नॉन-वेज प्रसाद चढ़ाया जाता है. इसके पीछे एक वजह है.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि अगर BJP सत्ता में आई तो वह राज्य के खान-पान के कल्चर में दखल दे सकती है. उन्होंने बिहार और गुजरात जैसे NDA शासित राज्यों का हवाला दिया, जहां त्योहारों के दौरान कथित तौर पर मछली और मांस की बिक्री पर रोक लगा दी जाती है. पीएम मोदी का यह दौरा नॉन-वेज खाने को लेकर चल रही इन्हीं बहसों के बीच हुआ है.
हालांकि, BJP ने इन आरोपों को खारिज कर दिया. प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि मांसाहारी खाने पर रोक लगाने का कोई प्लान नहीं है और लोगों के खाने की पसंद का सम्मान किया जाएगा. BJP नेता तेमजेन इमना अलोंग ने भी इस बहस में हिस्सा लिया. उन्होंने मांस खाया और फिर वीडियो शेयर किया और लिखा, "ममता दीदी, मैं BJP में हूं और शौक से मांसाहारी हूं."
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी बीते दिनों BJP नेताओं के साथ मछली-चावल खाते हुए दिखे. इसे इन दावों का जवाब माना गया.
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कालीबाड़ी मंदिर में मां काली की पूजा 'मां सिद्धेश्वरी' के रूप में की जाती है. यह भारत के उन कुछ मंदिरों में से एक है, जहां देवी को नॉन-वेज प्रसाद चढ़ाया जाता है. इस परंपरा की शुरुआत संत रामकृष्ण परमहंस से हुई थी. उन्होंने एक बार ब्रह्मानंद केशव चंद्र सेन के ठीक होने की प्रार्थना करते हुए मां सिद्धेश्वरी को ‘दाब चिंगरी’ का भोग लगाया था. यह एक बंगाली झींगा करी है, जिसे हरे नारियल के खोल में पकाया और परोसा जाता है.
इस मंदिर का रामकृष्ण परमहंस से गहरा नाता है. माना जाता है कि वे अक्सर यहां आते थे और भजन गाते थे. मंदिर के अंदर एक शिलालेख में लिखा है, “शंकरेर हृदय माझे, काली बिराजे.” इसका मतलब है कि मां काली शंकर के हृदय में रहती हैं.
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