यूपी में जेडीयू का असर कभी नहीं रहा. लेकिन पहली बार जेडीयू प्रदेश में इतना एग्रेसिव कैंपेन कर रही है. नीतीश ने शुरुआत बिहार की सीमा से लगे पूर्वी यूपी से की. लेकिन सभाओं में जब ठीक-ठाक भीड़ आने लगी तो उनके मंसूबे बढ़ गए. नजरें अब पूरे प्रदेश पर हैं. रविवार को उन्होंने इलाहाबाद के पास फूलपुर में सभा की और अब कानपुर जा रहे हैं.
सीधे मौर्य के घर में चैलेंज
फूलपुर ही वो जगह है जो एक जमाने में जवाहरलाल नेहरू की सीट थी. अब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य वहां से सांसद हैं. नीतीश कुमार सीधे बीजेपी के मुखिया के घर में घुसकर चुनौती दे रहे हैं.इस रैली के लिए शरद यादव और केसी त्यागी पहले ही फूलपुर में डट चुके थे. बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार 12 जुलाई से ही इलाहाबाद में बैठे थे और माहौल बनाने में लगे थे.

फूलपुर में नीतीश की सभा
आरके चौधरी और नीतीश ने मिलाया हाथ
शराबमुक्त और संघमुक्त भारत के सपने में उन्होंने बसपा के बड़े बागी नेता को भी साथ ले लिया है. इस रैली में पूर्व बसपा नेता आरके चौधरीभी शामिल हुए तो सबकी आंखें बड़ी हो गईं.
26 जुलाई को नीतीश आरके चौधरी के मंच पर होंगे. जानकारी के मुताबिक, मायावती को ताकत दिखाने के लिए चौधरी 26 जुलाई को लखनऊ के बिजली पासी किला में रैली करेंगे और अगले सियासी कदम का ऐलान करेंगे.आरके चौधरी बसपा में छोटे-मोटे पद पर नहीं थे. महासचिव थे. बसपा के फाउंडिंग मेंबर थे. 1981 से कांशीराम के साथ थे. चार बार विधायक रहे हैं. चार बार उन्हें प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया गया था. वह पासी कम्युनिटी से आते हैं. पासी समुदाय में अच्छी पकड़ रखने वाले आरके चौधरी करीब तीन साल पहले खत्म हो चुके संगठन बीएस-4 (बहुजन समाज स्वाभिमान संघर्ष समिति) को दोबारा जिलाएंगे और मायावती के खिलाफ बिगुल फूकेंगे. नीतीश से उनकी दोस्ती बसपा और भाजपा दोनों के लिए चिंता की बात है.
'मुझे मां गंगा ने नहीं बुलाया, मैं खुद आशीर्वाद लेने आया'
इसके बाद नीतीश कुमार का अगला ठिकाना कानपुर होगा. अगले महीने नीतीश कुमार की कानपुर के घाटमपुर में सभा होगी. इससे पहले नीतीश पूर्वांचल के बनारस और मिर्जापुर में सभाएं कर चुके हैं, जहां अच्छे-खासे कुर्मी वोट हैं और जहां इन दिनों NDA का कब्जा है.नीतीश का सीधा टारगेट मोदी और बीजेपी को नुकसान पहुंचाना है. बनारस में जब वो गंगा किनारे पहुंचे तो मोदी के उलट बोले, 'मां गंगा ने मुझे बुलाया नहीं है. मैं खुद आशीर्वाद लेने आया हूं.' मोदी ने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर स्वच्छ भारत अभियान चलाया था. नीतीश ने जब बिहार में शराबबंदी कानून बनाया तो वो भी लोगों को बताना नहीं भूले कि गांधी शराब को देश और समाज के पतन की वजह मानते थे.नीतीश की नजर महिलाओं और कुर्मी वोटरों पर हैं. उत्तर प्रदेश में कुर्मी, पटेल, शाक्य, राजभर, कुशवाहा और मौर्य लगभग एक सी जातियां हैं और ये पूरे प्रदेश में फैले हुए हैं. इन चुनाव में इन वोटरों के कई दावेदार हैं. हर पार्टी इन्हें लुभाने में लगी है. इसी के तहत बीजेपी ने केशव प्रसाद मौर्य को यूपी बीजेपी की कमान सौंपी और अनुप्रिया पटेल को टीम मोदी में जगह दी गई.

समाजवादी पार्टी ने भी मौके की नजाकत को समझा और पुरानी दुश्मनी भूलकर मुलायम सिंह यादव ने बेनी प्रसाद वर्मा को गले से लगाया और राज्यसभा भेज दिया. स्वामी प्रसाद मौर्य जब मायावती से बगावत करके अलग हो गए तो बीजेपी से लेकर समाजवादी पार्टी दोनों ने उन्हें चारा डाला.
पिछड़ों का एक नया मोर्चा, जिसके नेता नीतीश कुमार?
पिछले हफ्ते मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के उपेंद्र कुशवाहा ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात की और उन्हें एनडीए में आने का न्योता भी दिया. लेकिन उन्होंने अपना नया संगठन बहुजन लोकतांत्रिक मंच नाम से बना लिया है. 22 सितम्बर को वह लखनऊ में रैली करेंगे और मिशन 2017 की भी शुरुआत करेंगे.स्वामी का कहना है कि देवी पाटन मंडल, बस्ती मंडल, गोरखपुर मंडल, फैज़ाबाद मंडल, और इलाहाबाद, वाराणसी, आजमगढ़ मंडल की कमेटियां गठित की गई हैं जहां पदाधिकारियो को तैनात किया गया है. जिले के पदाधिकारी विधानसभा के पदाधिकारी को तैनात करेंगे.
बीजेपी में अमित शाह और उनकी टीम ने पूरी ताकत लगा रखी है कि किसी तरह से कुशवाहा, कुर्मी, पटेल वोट बैंक को अपने साथ जोड़ा जाए. लेकिन नीतीश कुमार देश में सबसे कद्दावर कुर्मी नेता हैं और उनका इस तरह से यूपी में सक्रिय होना बीजेपी की कोशिशों में पलीता लगा सकता है.
BJP के लिए चिंता की बात!
बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात यह भी है कि नीतीश कुमार अपनी ताकत बढ़ाने के लिए छोटी-छोटी पार्टी और नेताओं को साथ जोड़ने में भी लग गए हैं. आरके चौधरी साथ आ गए हैं. कल को स्वामी प्रसाद मौर्य भी आ सकते हैं. उधर अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल भी बीजेपी से गठबंधन तोड़ चुकी हैं. वो भी इस मोर्चे में शामिल हो सकती हैं.कानपुर, इलाहाबाद, फतेहपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, जालौन, उन्नाव, प्रतापगढ़, कौशांबी और श्रावस्ती के इलाकों में कुर्मियों की आबादी बहुत है और इसीलिए नीतीश कुमार इन्हीं इलाकों में पूरी ताकत लगा रहे हैं. छोटे-छोटे क्षत्रपों को साथ लेकर वो ओबीसी-दलित वोटरों का वैकल्पिक मोर्चा बना रहे हैं.यूपी का दंगल पहले से ही कम दिलचस्प नहीं है. नीतीश के भी अखाड़े में उतरकर ताल ठोंकने से मुकाबला और भी रोचक हो गया है.
शराबबंदी की बात औरतों को अपील कर रही है. नीतीश कुमार की इस चाल से सबसे ज्यादा फिक्रमंद कोई है, तो वो है बीजेपी.
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