अखिलेश के पास भी है. मुलायम भी तलाश ऱहे हैं.
ग़दर कटी है कि साइकिल किसके पास जाएगी. बाप या बेटे के पास? इलेक्शन कमीशन के यहां हाजिरी लग रही है. याद दिला दिया जाए कि 17 जनवरी तक साइकिल पर कोई राय नहीं बनी तो इलेक्शन कमीशन इस सिंबल को फ्रीज़ कर देगा.
शुक्रवार को मुलायम फिर से इलेक्शन कमीशन पहुंचे. रामगोपाल भी अपना दावा लेकर पहुंचे. हालांकि उन्होंने इलेक्शन कमीशन से पहले ये भी कहा था कि अगर हमें साइकिल नहीं मिलती है तो मोटर साइकिल दे दो. दावा है कि बहुमत अखिलेश के साथ है. रामगोपाल बोले कि नेताजी के पास तो इतने लोग हैं कि सब एक 'बुलेरो' में जा सकते हैं.
शुक्रवार को इलेक्शन कमीशन इस पर फैसला करने वाला था कि साइकिल किसकी है लेकिन अब उसने फैसला सुरक्षित कर लिया है. बाद में इस पर फैसला लिया जाएगा.साइकिल ना मिलने पर दोनों का 'प्लान बी' क्या है?
मुलायम के पास ऑप्शन
मुलायम कह तो रहे हैं कि बेटे और उनके बीच सब ठीक है लेकिन ऐसा है नहीं. गठबंधन भारतीय राजनीति की लम्बी विरासत का बाय-प्रोडक्ट है. मुलायम इसका सहारा ले सकते हैं. इस बात ने तब जोर पकड़ा जब गुरुवार को मुलायम दिल्ली में लोक दल के अध्यक्ष सुनील सिंह से मिले थे. इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर मुलायम को साइकिल चुनाव निशान नहीं मिलता है तो वो लोक दल के चुनाव निशान 'हल जोतता किसान' के साथ जा सकते हैं.
'इंडियन एक्सप्रेस' के हवाले से कहा गया है कि लोक दल के अध्यक्ष सुनील सिंह मुलायम और शिवपाल से मिले और उन्होंने मुलायम को पार्टी अध्यक्ष पद का भी प्रस्ताव दिया. उन्होंने कहा, 'मुलायम सिंह लोक दल के फाउंडर मेम्बर रहे हैं. अगर वो पार्टी जॉइन करते हैं तो इससे पार्टी मजबूत होगी. इससे हम फिर से पार्टी को नेशनल लेवल पर स्थापित कर सकते हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'मैंने मुलायम सिंह जी को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का भी प्रस्ताव दिया है. उनके आने से पार्टी यूपी, राजस्थान, बिहार और दूसरे राज्यों में मजबूत होगी.'
लोक दल का बैकग्राउंड
लोक दल इस समय लगभग मरी हुई पार्टी है. इसके अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह उसे जिंदा करने की फिराक में हैं इसीलिए मुलायम को अध्यक्ष पद देने को भी तैयार हैं.
चौधरी सुनील सिंह
एक जमाने में लोकदल भारतीय लोक दल हुआ करता था. 1974 में इंदिरा गांधी के खिलाफ कई पार्टियों को मिलाकर चौधरी चरण सिंह ने ये पार्टी बनाई थी. इन पार्टियों में थीं- स्वतंत्र पार्टी (सी राजगोपालाचारी की पार्टी), उत्कल कांग्रेस (बीजू पटनायक की पार्टी), भारतीय क्रान्ति दल ( चौधरी चरण सिंह की पार्टी), सोशलिस्ट पार्टी वगैरह. चौधरी चरण सिंह इस पार्टी के अगुआ थे. बाद में ये पार्टी इमरजेंसी के गुस्से से उपजी जनता पार्टी में शामिल हो गई.
मुलायम भारतीय लोक दल के सदस्य हुआ करते थे. मुलायम इटावा की जसवंतनगर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे. करीब 37 साल पहले मुलायम ने लोक दल छोड़ दिया था.
बाद में चौधरी चरण सिंह के बेटे अजित सिंह ने राष्ट्रीय लोक दल नाम से पार्टी बनाई जिसका जाट बाहुल्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर प्रभाव है. लोक दल चौधरी सुनील सिंह के पास रहा.
लोक दल की वेबसाइट
पर आज भी हेमवती नंदन बहुगुणा, देवी लाल, मुलायम सिंह यादव, कर्पूरी ठाकुर, शरद पवार, राम विलास पासवान की तस्वीरें हैं, जो इस पार्टी से जुड़े रहे हैं.
2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में लोक दल ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सारी सीटों पर उसे हार मिली थी. 2007 के चुनाव में भी पार्टी 76 सीटों पर लड़ी और सब पर हार गई. 2017 चुनावों के लिए भी उसने अब तक 18 उम्मीदवारों के नाम बताए हैं.
अपनी पार्टी को फिर से जिंदा करने की उम्मीद से भरे सुनील सिंह ने ये भी कहा कि अगर मुलायम अपने उम्मीदवार लोक दल के सिंबल पर उतारते हैं तो मैं अब तक की उम्मीदवारों की लिस्ट में बदलाव कर सकता हूं.
अखिलेश के पास क्या ऑप्शन हैं?
अखिलेश की तरफ से रामगोपाल ने ये कह रखा है कि अगर साइकिल चुनाव चिन्ह न मिले या उसे फ्रीज कर दिया जाए तो हमें मोटर साइकिल दे दो. साइकिल और मोटर साइकिल ना मिले तो अखिलेश के पास एक और ऑप्शन है. उनके 'पेड़' की छांव में जाने के चर्चे हैं. पेड़ समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) का चुनाव निशान है. ये पार्टी 1990 में चंद्रशेखर ने बनाई थी. पूर्व डिप्टी पीएम चौधरी देवीलाल के संग मिलकर. जनता दल से अलग होकर. पार्टी में 60 सांसद थे. इसके बाद राजीव गांधी की कांग्रेस की मदद से सरकार बनाई थी, जो कुछ महीनों में गिर गई थी. इस बारे में यहां पढ़ें.17 जनवरी तक सब कुछ क्लियर हो जाए, वरना सबका प्लान बी जल्द ही अप्लाई भी होना शुरू हो जाएगा.
ये स्टोरी निशांत ने की है.












