पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं की ओर से अनुच्छेद 370 और 35 ए हटने की सूरत में भारत से रिश्ता खत्म हो जाने वाले बयान का जिक्र करते हुए जब सवाल हुआ कि क्या पीएम मोदी को लगता है कि ये धाराएं खत्म करना मुमकिन है? पीएम मोदी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ऐसी भाषा बोलने वालों को इस देश का नागरिक होने का हक ही नहीं है. उन्हें चुनाव लड़ने का भी हक नहीं है. ये कोई एग्रीमेंट है क्या?
पीएम मोदी ने कहा कि जहां तक धारा हटाने की बात है तो ये एक कानूनी प्रक्रिया है. हमने अपने संकल्प पत्र में घोषित किया है. हम मानते हैं कि कश्मीर का सबसे बड़ा नुकसान इन धाराओं ने किया है. आज वहां हमने एम्स बनाया, IIM बनाया. बड़े प्रोफेसर वहां जाने को तैयार नहीं हैं क्योंकि वहां किराया ज्यादा है, घर खरीद नहीं सकते. इनवेस्टमेंट नहीं आता, क्योंकि वहां जमीन नहीं मिलती, तो कारखाना नहीं लगाया जा सकता. वहां के बच्चों को रोजगार नहीं मिल रहा. पर्यटन को वहां आतंकवादियों ने खत्म कर दिया. पूंजी निवेश धाराओं के कारण खत्म हो गया. अब वहां के लोगों को समझ आया है कि यहां बड़े पैमाने पर बदलाव होना चाहिए, वहां आर्थिक निवेश होना चाहिए.

पीएम मोदी ने इंटरव्यू में कश्मीर के सारे मसलों पर बात की है.
पीएम ने कहा कि मुट्ठी भर परिवारों ने जम्मू-कश्मीर की जनता को इमोशनली ब्लैकमेल किया है. जब मुफ्ती साहब थे तो हमें लगा कि इससे वापस आएंगे. लेकिन वो हमारी महामिलावट थी, हमने पहले भी कहा था कि वो तेल और पानी का मिलन था. पीएम ने कहा कि जनता ने ऐसा संदेश दिया था कि कोई और चारा नहीं था, लोकतंत्र का तकाजा आया तो हमने इसे छोड़ दिया. वहां सिर्फ अटल जी का ही फॉर्मूला चलेगा ‘इंसानियत-कश्मीरियत-जम्मूरित’. एक मुट्ठी भर परिवार कश्मीर में एक भाषा बोलते हैं और दिल्ली में अलग भाषा बोलते हैं, ये दोगलापन है जिसको मैं उजागर कर रहा हूं.
सपा के गढ़ में मोदी के फैन क्यों हैं लोग?











